दिवाली के पीछे छिपी हैं ये 6 रोचक पौराणिक कथाएं, भगवान राम से लेकर माता लक्ष्मी तक जुड़ा है इतिहास
दिवाली सिर्फ भगवान राम की अयोध्या वापसी का पर्व नहीं है। जानिए दीपावली से जुड़ी 6 रोचक पौराणिक कथाएं और उनका धार्मिक महत्व।

दीपावली 2026: दिवाली का नाम आते ही सबसे पहले भगवान श्रीराम की 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या वापसी की तस्वीर सामने आती है। मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने हजारों दीप जलाकर पूरी नगरी को रोशन कर दिया था। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दीपावली का संबंध सिर्फ भगवान राम की वापसी से ही नहीं, बल्कि कई अन्य धार्मिक और पौराणिक घटनाओं से भी जुड़ा है? समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी के प्राकट्य से लेकर भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और भगवान महावीर के निर्वाण तक, दीपावली से जुड़ी कई ऐसी कथाएं हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए जानते हैं दीपावली से जुड़ी छह प्रमुख पौराणिक और धार्मिक कथाओं के बारे में।
दीपावली क्यों मनाई जाती है?
दीपावली यानी दीपों का त्योहार भारत के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस त्योहार का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद खास है।
इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, मोमबत्तियों, रंग-बिरंगी लाइटों और रंगोली से सजाते हैं। शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों और धर्मों में दीपावली मनाने के पीछे अलग-अलग धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
1. भगवान श्रीराम की 14 साल बाद अयोध्या वापसी
दीपावली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा रामायण से संबंधित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के वचन को पूरा करने के लिए माता सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था।
वनवास के दौरान लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। इसके बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान और वानर सेना की सहायता से लंका पर चढ़ाई की और रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया।
रावण पर विजय प्राप्त करने और 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे, तो उनके स्वागत में पूरी नगरी को दीपों से सजाया गया। अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर अपने प्रिय राजा का स्वागत किया।
इसी घटना की स्मृति में दीपावली मनाने की परंपरा को व्यापक रूप से जोड़ा जाता है। यह कथा बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देती है।
2. भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर की कथा से है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर एक शक्तिशाली असुर था, जिसने अपने अत्याचारों से देवताओं और आम लोगों को परेशान कर रखा था। उसने हजारों महिलाओं को बंदी बना लिया था।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया और बंदी महिलाओं को मुक्त कराया।
नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय को अन्याय और अत्याचार पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। इसी घटना की याद में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस दिन का विशेष महत्व है।
3. समुद्र मंथन से हुआ था माता लक्ष्मी का प्राकट्य
दीपावली का संबंध धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी से भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था।
इस समुद्र मंथन के दौरान कई दिव्य वस्तुएं और रत्न प्रकट हुए। इन्हीं में माता लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था। मान्यता है कि माता लक्ष्मी कमल के पुष्प पर विराजमान होकर समुद्र से प्रकट हुईं और बाद में उन्होंने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया।
माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण दीपावली की अमावस्या पर घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में उनकी विशेष पूजा की जाती है।
लोग मानते हैं कि माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में आर्थिक समृद्धि और खुशहाली आती है।
4. जैन धर्म में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस का महत्व
दीपावली का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। जैन धर्म में भी इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है।
जैन मान्यताओं के अनुसार, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने कार्तिक अमावस्या के दिन बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया था।
भगवान महावीर के निर्वाण के बाद उनके अनुयायियों ने उनके ज्ञान और उपदेशों की स्मृति में दीप जलाए थे। जैन परंपरा में दीपावली को भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन जैन समुदाय के लोग धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा, त्याग और आत्मसंयम के संदेश को याद करते हैं।
5. सिख धर्म में मनाया जाता है बंदी छोड़ दिवस
दीपावली का सिख धर्म में भी विशेष ऐतिहासिक महत्व है। सिख समुदाय इस अवसर को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। इसका अर्थ है बंदियों को मुक्त कराने का दिन।
सिख इतिहास के अनुसार, छठे सिख गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी को मुगल शासक जहांगीर के शासनकाल में ग्वालियर के किले में बंदी बनाया गया था।
परंपरागत सिख मान्यताओं के अनुसार, जब गुरु हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई हुई, तो उन्होंने अपने साथ 52 बंदी राजाओं को भी मुक्त कराया था।
उनकी रिहाई और अमृतसर वापसी की स्मृति में बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर को विशेष रूप से रोशनी से सजाया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारों में पहुंचकर मत्था टेकते हैं।
यह पर्व स्वतंत्रता, न्याय और मानवता का संदेश देता है।
6. राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा
दीपावली के आसपास मनाए जाने वाले बलि प्रतिपदा पर्व का संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा बलि अपनी दानवीरता और पराक्रम के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपनी शक्ति से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि के पास पहुंचे।
भगवान वामन ने राजा बलि से दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली।
इसके बाद भगवान वामन ने विशाल रूप धारण कर दो पगों में पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।
भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेज दिया। कुछ क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं में मान्यता है कि राजा बलि को वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का अवसर मिलता है।
इसी कथा को बलि प्रतिपदा से जोड़ा जाता है, जिसे देश के कुछ हिस्सों में दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है।
दीपावली का संदेश सिर्फ रोशनी तक सीमित नहीं
दीपावली से जुड़ी ये छह कथाएं बताती हैं कि यह त्योहार केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।
भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी धर्म की विजय का संदेश देती है, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध अन्याय पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है, जबकि माता लक्ष्मी का प्राकट्य सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, जैन धर्म में भगवान महावीर का निर्वाण और सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस स्वतंत्रता, ज्ञान और मुक्ति के महत्व को दर्शाते हैं।
अलग-अलग धर्मों और परंपराओं में मनाए जाने के बावजूद दीपावली का मूल संदेश एक ही है—अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना, बुराई को छोड़कर अच्छाई अपनाना और जीवन में प्रेम, शांति तथा सकारात्मकता का संचार करना।
इसी विशेषता के कारण दीपावली भारत के सबसे महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहारों में से एक मानी जाती है।