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आखिर Exit Poll से क्यों डर गया था चुनाव आयोग! जानिए 1998 से अब तक की पूरी कहानी

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इससे चुनाव आयोग की स्थिति बड़ी असहज हो गई. चुनाव आयोग को अपनी गाइडलाइन वापस लेनी पड़ी और मीडिया ने इसे भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की जीत बताया. 

Exit Poll पर पाबंदी के लिए कानून में संशोधन

इसके बाद 2004 के चुनाव में Exit और Opinion पोल पर बैन के लिए आयोग ने कानून मंत्रालय की शरण ली. छह राष्ट्रीय और 18 क्षेत्रीय दलों के समर्थन से चुनाव आयोग ने यह मांग रखी कि प्रतिनिधित्व अधिनियम कानून में धारा 126 (अ) में संशोधन किया जाए. इसके बाद 2010 में चुनाव की घोषणा के बाद और अंतिम चरण का मतदान खत्म होने से पहले तक Exit Poll पर पाबंदी लगा दी गई. हालांकि चुनाव आयोग इन पोल पर पूरी तरह से बैन चाहता है. साल 2013 में भी चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से संपर्क कर इन पोल पर पूरी तरह से बैन लगाने के प्रयास किए.  चुनाव आयोग की मांग पर कानून मंत्रालय ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है. साल 2022 में तत्कालीन कानून मंत्री किरण रिजिजू ने इससे जुड़े सवाल पर कहा था कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर अभी विचार नहीं हो रहा है. 

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