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अयोध्या रेप केस: आरोपी मोईन की बेकरी सील और लाइसेंस कैंसिल; बैकफुट पर सपा


दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म (Ayodhya Rape Case) मामले में यूपी सरकार पूरी तरह से सख्त दिख रही है. आरोपी सपा नेता मोईद खान की बेकरी को आज सील कर दिया गया और उसके लाइसेंस को कैंसिल कर दिया गया है. मोईद खान पर नाबालिग लड़की को नौकरी का झांसा देकर उसके साथ दो महीने तक रेप करने और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है. शिकायत के मुताबिक, मोईद (Rape Accused Moeed Khan) ने लड़की को पापड़, बिस्किट वगैरह का लालच देकर अपनी बेकरी में बुलाया और उसे कोई नशीली दवा खिलाकर कथित रूप से उसके साथ रेप किया. उसके कर्मचारी ने नाबालिग का अश्लील वीडियो बनाया और उस वीडियो को लीक कर देने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया.

नाबालिग के पेट में दर्द होने पर मामले का खुलासा हुआ. मेडिकल में पता चला कि वह तो प्रेग्नेंट है. इस मामले में सपा कनेक्शन सामने आने के बाद विपक्ष अखिलेश यादव पर हमलावर है. वहीं सीएम योगी पूरी तरह से एक्शन के मूड में दिखाई दे रहे हैं. 

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आरोपी मोईद खान कौन है?

गैंगरेप आरोपी मोईद खान समाजवादी पार्टी का नेता और अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी है. वह समाजवादी पार्टी के भदरसा नगर का अध्यक्ष है. उस पर बेकरी में बुलाकर बच्ची से रेप करने और उसका अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है. गैंगरेप मामले में अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं. मोईद और उसके कर्मचारी को 30 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया था. अब मोईद की संपत्तियों पर प्रशासन का बुलडोजर चलने जा रहा है. मोईद की बेकरी को सील कर दिया गया है और उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है. बेकरी मे बन रहे सामानों का भी सैंपल लिया गया है. 2 अगस्त को मोईद खान की संपत्तियों की जांच के आदेश दिए गए थे. आरोप है कि मोइद ने तालाब और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया है.

क्यों बैकफुट पर समाजवादी पार्टी?

अयोध्या में 12 साल की बच्ची से रेप के मामले में समाजवादी पार्टी बैकफुट पर आ गई है. मामले पर अखिलेश की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. मोईद पर 29 जुलाई को मुकदमा दर्ज हुआ था और 30 को उसकी गिरफ्तारी हुई. लेकिन सपा ने अब तक उसे पद से नहीं हटाया है. इसके पीछे की वजह वोटबैंक खिसकने का डर हो सकता है. अखिलेश की चुप्पी पर अब सवाल उठने लगे हैं. सीएम योगी इस मामले में अखिलेश पर हमलावर हैं. सीएम ने विधानसभा में कहा कि मोईन सपा का एक्टिव मेंबर और अयोध्या सांसद की टीम का सदस्य है. सपा सांसद के साथ उठता-बैठता, खाता-चलता है. सपा ने अभी तक उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है. वहीं निषाद पार्टी के संजय निषाद से सपा की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सपा के नेता इसमें शामिल हैं, वे भला इस पर टिप्पणी क्यों करेंगे. वहीं पूर्व कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने भी इस घटना पर चुप्पी के लिए कांग्रेस और सपा पर निशाना साधा. वहीं सांसद अवधेश से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनको इस बारे में कुछ भी नहीं पता है.

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मिल्कीपुर उपचुनाव में BJP बना रही मुद्दा

बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना सामने आते ही विपक्ष को सपा के खिलाफ एक मुद्दा और मिल गया है. बीजेपी इस मुद्दे को मिल्कीपुर उपचुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है. अयोध्या के मिल्कीपुर में होने वाला उपचुनाव बीजेपी और सपा दोनों के लिए ही अहम है. फैजाबाद में हार का मुंह देखने के बाद बीजेपी इस सीट को जीतने के लिए बेताब है. वहीं सपा भी इस सीट को अपने पाले में कर लेना चाहती है. इस बीच नाबालिग संग गैंगरेप में सपा नेता की संलिप्तता और अखिलेश और अवधेश की चुप्पी पार्टी के खिलाफ बीजेपी के लिए बड़ा हथियार बन सकती है. 

रेप पीड़िता के परिवार पर केस वापस लेने का दबाव

सीएम योगी इस मामले पर पूरी तरह से सख्त हैं. लापरवाही के मामले में दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. उन्होंने पीड़ित के परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया है. सपा पर मामले में गुंदागर्दी का आरोप लगा है. जानकारी के मुताबिक, अयोध्या के सपा नेता और नगर पंचायत भदरसा के चेयरमैन मोहम्मद राशिद, सपा नेता जय सिंह राणा और एक अन्य पर रेप पीड़िता की मां को आरोपी के साथ सुलह करने की धमकी दी है, जिसके बाद सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि इन सभी ने रात 11 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचकर उन पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाते हुए धमकाया. आरोपी के साथ सुलह न करने पर परिवार को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप सपा नेताओं पर लगा है. 

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