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बस्तर पंडुम 2026 : जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त मंच- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

रायपुर: जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की समृद्ध लोककला, सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान प्रदान करने के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

बस्तर पंडुम जनजातीय समाज की जीवनशैली से जुड़ी उन विधाओं को सामने लाता है, जिनमें लोककला, शिल्प, तीज-त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्य यंत्र, नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, व्यंजन एवं पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य तथा वन औषधियों का समृद्ध संसार समाहित है।

यह आयोजन परंपरागत ज्ञान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी तक उसे जीवंत रूप में पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। बस्तर पंडुम की अवधारणा जनजातीय समाज के पारंपरिक सामुदायिक मेलों और उत्सवों से प्रेरित है, जहां कला, प्रकृति और सामूहिक जीवन मूलतत्व रहे हैं। राज्य शासन द्वारा इसे संगठित और प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप देकर कलाकारों को पहचान, मंच और सम्मान देने का अवसर प्रदान किया गया है। आज बस्तर पंडुम जनजातीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है।

नारायणपुर जिले में आयोजित जिला स्तरीय बस्तर पंडुम प्रतियोगिता के लिए विभिन्न विधाओं में कुल 156 प्रतिभागियों एवं टीमों का चयन किया गया है। इनमें जनजातीय नृत्य की 42 टीमें, जनजातीय गीत की 20 टीमें, जनजातीय नाट्य के 27 प्रतिभागी, जनजातीय वेशभूषा के 5, जनजातीय शिल्प का 1, जनजातीय चित्रकला के 2, जनजातीय पेय के 18, जनजातीय व्यंजन के 15, जनजातीय वाद्य यंत्र के 14, जनजातीय साहित्य के 5 तथा जनजातीय औषधि के 4 प्रतिभागी शामिल हैं।

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बस्तर पंडुम 2026 बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मान देने और उनकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है।

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