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विस्तारवाद नहीं, विकासवाद में यकीन… PM मोदी ने दुनिया को बताई समंदर में भारत की ताकत, चीन को भी साफ संदेश


मुंबई:

भारत के तीन योद्धा बुधवार को समंदर में उतर गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में बुधवार को नौसेना के युद्धपोतों आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस सूरत और आईएनएस वाघशीर को मुंबई के नौसेना गोदी (नेवल डॉकयार्ड) में उतारा गया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं, भारत विकासवाद की भावना काम करता है. दरअसल यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नजर गड़ाए और लगातार शरारत कर रहे चीन को सीधा संदेश है. 

मोदी के भाषण की बड़ी बातें-

  • हमारा नीलीगीरी चोल वंश के समुद्री सामर्थ्य के प्रति समर्पित है.
  • सूरत वॉरशिप उस कालखंड की याद दिलाता है, जब गुजरात के पोर्ट्स के जरिए भारत वेस्ट एशिया से जुड़ा था.
  • वाघशीर से कुछ साल पहले मुझे P 75 क्लास की पहली सबमरीन कलवरी के कमिशनिंग में शामिल होने का अवसर मिला था. आज मुझे इस क्लास की छठी सबमरीन बाघशीर को कमिशन करने का सौभाग्य मिला है. 

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत ने हमेशा ओपन, सिक्योर, समावेशी और स्मृद्ध इंडो पसिफिक रीजन का समर्थन किया है. इसलिए जब समुद्र से सटे देशों के विकास की बात आई, तो भारत ने मंत्र दिया- ‘SAGAR’. सागर का मतलब है, सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन. हम सागर के विजन के साथ आगे बढ़े. जब भारत के सामने जी-20 की प्रेजिडेंसी संभालने का दायित्व आया, तो दुनिया को हमने मंत्र दिया- वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर. 

पीएम मोदी ने कहा,’जब दुनिया कोरोना से लड़ते हुए पस्त पड़ रही थी, तो भारत ने विजन दिया- वन अर्थ, वन हेल्थ. हम पूरी दुनिया को परिवार मानते हैं. हम सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर विश्वास करने वाले लोग है. इसलिए इस पूर क्षेत्र की रक्षा सुरक्षा भी भारत अपना दायित्व समझता है. ग्लोबल सिक्यॉरिटी, इकॉमनिक्स और जियो पॉलिटिकल डायनमिक्स को दिशा देने में भारत जैसे मैरिटाइम नेशन की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है. 

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हमारी सेनाएं और अधिक सक्षम हैं, इसके लिए थिएटर कमांड की दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है. पिछले 10 में भारत की तीनों सेनाओं ने जिस तरह आत्मनिर्भरता के मंत्र को अपनाया है, वह बहुत ही सराहनीय है. संकट के समय दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम से कम हो. इस गंभीरता को समझते हुए इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं. नेतृत्व दे रहे हैं.

पीएम मोदी

पीएम ने कहा कि आर्थिक प्रगति और एनर्जी सिक्यॉरिटी के लिए जरूरी है कि ट्रेडिशनल और टेरिटोरियल वॉटर को प्रोटेक्ट किया जाए. फ्रीडम ऑफ नेविगेशन के इन्शोयर किया जाए. और ट्रेड की सप्लाई लाइन और सी रूट सुरक्षित हो.  हमें आतंकवाद, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी में इस पूरे क्षेत्र को बचाकर रखना है. इसलिए आज जरूरी है कि आज समुद्र को सेफ और समृद्ध बनाने में हम ग्लोबल पार्टनर बने. 

हमारी सेनाओं ने 5 हजार से ज्यादा साजो सामान और उपकरण की लिस्ट तैयारी की है, जो अब वे विदेशों से नहीं मंगाएगी. जब भारत का सैनिक भारत में बने साजो सामान के साथ आगे बढ़ता है, तो उसका आत्मविश्वास भी अलग होता है. पिछले 10 सालों में कर्नाटक में देश की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर बनाने वाली फैक्ट्री शुरू हुई है .

पीएम मोदी

भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा 

पीएम मोदी ने कहा कि भारत पूरे प्रशांत क्षेत्र  में पहले रिस्पॉन्डर बनकर उभर है. हमारी नौसेना ने सैकड़ों जानें बचाई हैं. हजारों करोड़ रुपये के नैशनल और इंटरनैशल कार्गों की सुरक्षा की है. भारत पर इससे दुनिया का भरोसा बढ़ा है.

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 जानें नौसेना में शामिल इन युद्धपोतों की विशेषताएं

  • आईएनएस नीलगिरि परियोजना 17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रेणी का शीर्ष जहाज है.
  • भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने इसे डिजाइन किया है.
  • यह आधुनिक विमानन सुविधाओं से परिपूर्ण है. साथ ही एमएच-60 आर समेत विभिन्न प्रकार के हेलिकॉप्टर का परिचालन कर सकता है.
  • परियोजना 15 बी स्टील्थ विध्वंसक श्रेणी का चौथा और अंतिम युद्धपोत आईएनएस सूरत कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक पोतों की अगली पीढ़ी का सदस्य है.
  • इसके डिजाइन और क्षमता में सुधार किए गए हैं.
  • इसे भी आईएनएस नीलगिरि की तरह वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और एमडीएल में इसका विनिर्माण किया गया है.
  • आईएनएस वाघशीर स्कॉर्पीन श्रेणी की परियोजना 75 के तहत छठा और अंतिम युद्धपोत है.
  • यह बहुभूमिका वाला डीजल-विद्युत संचालित पोत है.
  • तीनों युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है. 
  • इससे देश की रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बढ़ती दक्षता पता चलती है.

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