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चीन सोचता रह गया और PM मोदी ने बांग्लादेश में तीस्ता पर 'टीम' सजा दी! इस तस्वीर की खुशी की वजह समझिए

पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के बीच बीते दिनों दिल्ली में बातचीत हुई. इस बातचीत के बाद दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी ने इस बातचीत के बाद कहा कि बांग्लादेश की पीएम के साथ हुई बातचीत के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच डिजिटल, हरित साझेदारी और समुद्र आधारित इकोनॉमी से जुड़े कई अहम समझौते हुए हैं. इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष यान से बांग्लादेश के लिए निर्मित सैटेलाइट को भी अंतरिक्ष में स्थापित करने पर सहमति बनी है. साथ ही साथ बांग्लादेशी नागिरकों को अब भारत में इलाज कराने के लिए उन्हें ई-वीजा उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है. 

शेख हसीना के बीजिंग दौरे से पहले तीस्ता पर समझौता भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना को अगले महीने बीजिंग की यात्रा पर जाने वाली हैं. जानकारों के अनुसार शेख हसीना की बीजिंग यात्रा से भारत ने तीस्ता को लेकर जो समझौता किया है, उसकी वजह से चीन अब बांग्लादेश पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाल पाएगा. आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियों को लेकर अलग-अलग सहयोग चल रहा है. बीते दिनों पीएम मोदी ने भी साझा प्रेस वार्ता में कहा था कि 54 साझा नदियां, भारत और बांग्लादेश को जोड़ती हैं. लिहाजा, बाढ़, प्रबंधन, पेजयल परियोजनाओं पर हम सहयोग करते आए हैं. 

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बांग्लादेश को भी क्या श्रीलंका की तरह ही ‘बर्बाद’ करना चाहता है चीन

चीन जिस तरह से बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना में अपनी रुचि दिखा रहा था, उसे लेकर कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं. कई जानकार मानते हैं कि भारत को चारों तरफ से (श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल और अब बांग्लादेश) घेरने की अपनी योजना के तहत ही चीन बांग्लादेश को लेकर इतनी रुचि दिखा रहा है. चीन चाहता है कि तीस्ता नदी के बहाने वह किसी तरह से पहले बांग्लादेश में एंट्री करे और फिर धीरे-धीरे उसे अतिरिक्त कर्ज देकर उसे बाध्य करे कि वह उसे अपनी जमीन पर बेस बनाने की अनुमति दे. आपको बता दें कि कुछ वर्ष पहले चीन ने इसी तरह से श्रीलंका में भी अपनी एंट्री की थी.

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वहां पहले एक बंदरगाह को विकसित करना का ठेका उसने लिया और धीरे-धीरे करके श्रीलंका को इतना कर्ज दे दिया जिसे वो एक समय के बाद चुका पाने की स्थिति में नहीं था. अब चीन श्रीलंका में अपना एक बेस भी तैयार कर चुका है ताकि वो वहां से भारत पर नजर रख सके. चीन ने पाकिस्तान और नेपाल के साथ भी कुछ ऐसा ही किया है. 


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