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Explainer: क्या है एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस? इसका ईरान से कौन सा कनेक्शन? इजरायल के लिए ये कितनी बड़ी चुनौती


नई दिल्ली/तेहरान:

इजरायल और फिलिस्तीनी संगठन हमास की जंग के बीच लेबनान में भी तनाव बढ़ता जा रहा है. लेबनान में मिलिशिया ग्रुप हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायल के हवाई हमले जारी हैं. बीते 5 दिनों में इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह के 1700 ठिकानों को टारगेट कर एयर स्ट्राइक की. इन हमलों में अब तक कम से कम 558 लोगों की जान जा चुकी है. लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन हमलों में करीब 1650 लोग घायल हुए हैं, जिनमें लगभग 100 महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इस बीच गाजा पट्टी में मानवीय संकट गहराता जा रहा है. एक साल से जंग झेल रहे गाजा का करीब 85% एरिया तबाह हो चुका है. इजरायली हवाई हमलों में 40000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं. मिसाइल अटैक और बमबारी के बीच पूरी आबादी विस्थापित हो गई है. उधर, इजरायल और ईरान के बीच भी तनातनी शुरू हो गई है.

ऐसे में सवाल उठता है कि हमास और इजरायल के बीच शुरू हुई जंग लेबानन और ईरान तक कैसे पहुंचा? इसका जवाब है-एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस (The Axis of Resistance).आइए जानते हैं क्या है एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस? इसका ईरान से क्या ताल्लुक है? इजरायली मिलिट्री पावर के सामने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ कितनी बड़ी चुनौती है:-

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क्या है एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस (Axis of Resistance)
‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ एक अनऔपचारिक गठबंधन है, जो ईरान की मदद से खड़ा हुआ है. एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस ग्रुप में फिलिस्तीन में हमास, लेबनान में हिज्बुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही, इराक और सीरिया के विद्रोही संगठन आते हैं. चूंकि, ईरान की इजरायल और अमेरिका से कट्टर दुश्मनी है. लिहाजा एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस इजरायल और अमेरिका के खिलाफ काम करता है.

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कैसे तैयार हुआ एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस?
80 के दशक में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए कुछ प्रॉक्सी संगठनों को तैयार किया. इसमें ईरानी की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की अहम भूमिका है. यह गठबंधन मिडल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देता है. इसमें शामिल हमास, हूती और हिज्बुल्लाह मिलिशिया ग्रुप लाल सागर में स्वतंत्र आवाजाही में दिक्कतें पैदा करते हैं.

क्या इजरायल की सेना को चुनौती दे सकती है एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस?
एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस इजरायल के लिए एक अहम सैन्य और वैचारिक चुनौती पेश करती है. बेशक अमेरिका की दोस्ती, उसके समर्थन और हथियारों की सप्लाई से इजरायल को काफी फायदा होता है, लेकिन एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस में शामिल हिज्बुल्लाह और हमास जैसे समूह भी अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. ईरान से इन्हें भरपूर समर्थन और फंडिंग मिलती है. इजराल की बेहतर सैन्य ताकत का मुकाबला करने के लिए इन समूहों के पास भी हाइटैक रॉकेट, मिसाइल, गुरिल्ला स्ट्रैटजी और टनल में अंडरग्राउंड होने का नेटवर्क है. जाहिर तौर पर अगर ये मिलकर इजरायल पर हमला करते हैं, तो उसके लिए संभलना मुश्किल हो सकता है.

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हमास ने इजरायल पर कब दिखाई अपनी ताकत?
वैसे इजरायल और हमास के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. हमास फिलिस्तीन की आजादी के लिए इजरायल के खिलाफ  जंग लड़ता रहा है. लेकिन जंग का सबसे ज्यादा असर गाजा पट्टी पर देखा जाता है. बीते साल 7 अक्टूबर को हमास के लड़ाकों ने गाजा पट्टी की जमीन से ही इजरायल की तरफ 5 हजार से ज्यादा रॉकेट दागे थे. इन हमलों में इजरायल के करीब 1200 लोगों की मौत हो गई थी. यही नहीं, हमास के लड़ाकों ने सुरंग के जरिए घुसपैठ की और इजरायली नागरिकों का कत्लेआम किया. हमास के लड़ाके 251 इजरायलियों को बंधक बनाकर भी ले गए. इसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हमास के खात्मे तक गाजा पर हमले जारी रहने की बात कही. 7 अक्टूबर को इस जंग के एक साल हो जाएंगे. लेकिन अब तक इजरायल अपने सभी बंधकों को वापस नहीं ला पाया. न ही हमास को जड़ समेत खत्म कर पाया है.

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हिज्बुल्लाह, इजरायल को कैसे दे रहा चुनौती?
लेबनान में हिज्बुल्लाह शिया इस्लामिस्ट पॉलिटिकल विंग है. लेबनान के गृहयुद्ध के बाद बाकी समूहों ने हथियार डाल दिए थे. लेकिन हिज्बुल्लाह ने जंग जारी रखी थी. 2000 में इजरायल गृहयुद्ध से पीछे हट गया, लेकिन हिज्बुल्लाह को मौके की तलाश थी. 2006 में वो मौका आया. हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच 5 हफ्ते तक जंग चली थी. उस समय हिज्बुल्लाह ने अपनी पूरी ताकत दिखाई थी. हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हजारों रॉकेट छोड़े. फिर गाजा की लड़ाई के दौरान हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया. अब एकबार फिर से इजरायल और हिज्बुल्लाह आमने-सामने आ गए हैं. इजरायल लगातार हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है. हिज्बुल्लाह भी इन हमलों का जवाब दे रहा है.

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हूती विद्रोही संगठन
एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस की तीसरी फोर्स हूती विद्रोही संगठन हैं. यमन के इस विद्रोही गुट ने लाल सागर में आतंक मचा रखा है. वैसे तो हूती की स्थापना 90 के दशक में हुई थी, लेकिन 2014 में यह मजबूती से उभरा. यमन के एक बड़े हिस्से में हूती विद्रोही गुट का कब्जा है. गाजा पर जारी इजरायली हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इजरायली जहाजों को टारगेट किया था. अमेरिका कई प्लेटफॉर्म पर आरोप लगा चुका है कि हूती ग्रुप को ईरान ने फंडिंग और हथियार मिलते हैं. हालांकि, ईरान इससे इनकार करता रहा है.

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इराक और सीरिया में विद्रोही संगठन
ईरान ने इसके साथ ही इराक और सीरिया में भी शिया मिलिशिया समूहों को पालने-पोसने में मदद की है. 2003 में इराक पर अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने वहां अपनी पहुंच बनानी शुरू की थी. ईरान से सालों की मेहनत से इराक में बदर ऑर्गेनाइजेशन, कताएब हिजबुल्लाह समेत कई चरमपंथी गुटों को खड़ा किया. जबकि, सीरिया में ईरान समर्थित कई समूह हैं. ISIS भी इसमें शामिल है. ये समूह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ काम करते हैं.

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