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Explainer: आखिर काली पगड़ी क्यों बांधे रहते थे ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी?

नई दिल्ली:

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi) का रविवार को हुए एक हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो गया. वो 63 साल के थे. रईसी का हेलिकॉप्टर ईरान के उत्तर पश्चिमी प्रांत ईस्ट अजरबैजान के पहाड़ी इलाके में लापता हो गया था.हेलिकॉप्टर का मलबा सोमवार सुबह मिला. इसके बाद राष्ट्रपति की मौत की पुष्टि हुई.इस हादसे में रईसी समेत आठ और लोग भी मारे गए हैं. इनमें ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन (Hossein Amir Abdollahian) भी शामिल थे. रईसी को अक्सर काले कपड़ों और काली पगड़ी पहने देखा जाता था.आइए जानते हैं कि वो काले कपड़े क्यों पहनते थे. 

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कौन पहन सकता है काली ड्रेस 

इब्राहिम रईसी ईरान के आठवें राष्ट्रपति थे.उनकी छवि एक कट्टरपंथी नेता की रही. वो मस्जिद का इमाम रहने के अलावा वकालत के पेश में ज्यूडूशरी से जुड़े थे. इसके बाद वो राजनीति में आए थे. ईरान पूर्व राष्ट्रपति हाशमी रफसंजानी और हसन रूहानी सफेद पगड़ी पहनते थे.दो अन्य पूर्व राष्ट्रपति अली खामेनेई और मुहम्मद खातमी भी काली पगड़ी पहनते थे.लेकिन इब्राहिम रईसी के काली पगड़ी पहनने में थोड़ा अंतर था.दरअसल रईसी अयातुल्ला (Ayatollah) की डिग्री के साथ राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले पहले व्यक्ति थे.वहीं दूसरे लोगों के पास होजत अल-इस्लाम (Hojat al-Islam) की ही डिग्री थी. यह शिया मौलवियों के लिए मध्यम श्रेणी की उपाधि है.

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ईरान की राजनीति और समाज पर बारीकी से नजर रखने वाले पत्रकार जैगम मुर्तजा के मुताबिक अयातुल्ला की डिग्री एक तरह से पोस्ट डॉक्टरेट की डिग्री है. वो बताते हैं कि मौलाना या डॉक्टरेट की डिग्री लेने के लिए धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन, धर्म की नियमावली और किसी एक विषय में विशेष योग्यता का होना जरूरी होता है. इतनी पढ़ाई करने के बाद अयातुल्ला की डिग्री मिलती है.

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अयातुल्ला की सफेद और काली ड्रेस

अयातुल्ला की एक ड्रेस कोड है.इसमें काली पगड़ी और एक काले रंग का लबादा शामिल होता है. लेकिन अयातुल्ला सफेद कपड़े भी पहनते है.सफेद ड्रेस और काले ड्रेस पहनने वाले अयातुल्ला में अंतर यह है कि इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद के परिवार से आने वाले अयातुल्ला काला लबादा पहनते हैं और बाकी के लोग सफेद. इन दोनों रंग के ड्रेस का महत्व एक समान होता है. 

मुर्तजा के मुताबिक शिया मुसलमानों में फतवा देने का काम केवल आयतुल्ला ही कर सकते हैं.वहीं सुन्नी मुसलमानों में फतवा देने का काम मुफ्ती स्तर का व्यक्ति भी दे सकता है.अयातुल्ला शिया मुसलमानों की डिग्री है.

इब्राहिम रईसी धार्मिक बैकग्राउंड वाले राष्ट्रपति थे.वो राष्ट्रपति बनने से पहले ईरान के मशहद में मौजूद इमाम रजा की दरगाह के इमाम रह चुके थे. 

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