"मोदी युग में पूरी तरह बदल गई विदेश नीति…" : The Hindkeshariसे बोले विदेशमंत्री एस. जयशंकर

नई दिल्ली :
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने The Hindkeshariसे कहा कि, मोदी युग में भारत की विदेश नीति पूरी तरह बदल गई है. श्रीलंका पर हमारी नीति से दुनिया को संदेश गया. खाड़ी देशों के साथ हमने रिश्ते मजबूत किए. उन्होंने कहा कि, अमेरिका के साथ रिश्ते बहुत मजबूत किए हैं. विदेशी निवेश के कुछ बड़े प्रस्ताव आए हैं. विदेश मंत्री ने The Hindkeshariके एडिटर इन चीफ संजय पुगलिया से विशेष इंटरव्यू में कहा कि, भारत को देखने का दुनिया का नज़रिया बदल गया है. भारत अब एक अलग लीग में पहुंच गया है. 25 साल की तैयारी के लिए बड़े आइडिया की ज़रूरत होती है. ग्लोबल वर्क प्लेस और कनेक्टिविटी ऐसे आइडिया हैं.
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विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने एक किताब लिखी है ‘व्हाय भारत मैटर्स’. तीन साल पहले उन्होंने एक किताब लिखी थी ‘द इंडिया वे’. उन्होंने पिछली किताब के शीर्षक में इंडिया और ताजा किताब के शीर्षक में भारत लिखे जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि, ”इस दशक में और पिछले खास कर तीन-चार साल में देश में ऐसे परिवर्तन हमने देखे हैं.. मुझे लगता है, संस्कृति के क्षेत्र में हो, आत्मविश्वास में हो, हमारी डिलीवरी में हो, हमारी अपनी सोच में हो, अगर आप इस सबको जोड़ेंगे, तो मुझे लगता है कि इसको हमें कहीं संक्षिप्त में इस कांसेप्ट को प्रस्तुत करना है, तो मुझे लगा कि भारत का उपयोग करने से मुझे लगा कि वह सही मैसेज कन्वे होगा. भारत को मैं एक किस्म से माइंडसेट, एक एप्रोच मानता हूं.”
मोदी इरा में फॉरेन पॉलिसी कैसे पूरी तरह ट्रांसफार्म हो गई? सवाल पर एस जयशंकर ने कुछ मार्कर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि, ”हमारे पड़ोस में देखें, आप जानते हैं कि 2014 में नई नीति आई थी, नेबरहुड फर्स्ट. इसका मतलब था कि हम अपने पड़ोस को प्राथमिकता दें, और उनके साथ जो हमारी डिलिंग्स हों, वह खुले दिल के साथ हो. उनकी कभी कोई जरूरतें होती हैं, इसमें हम ज्यादा न पड़ें कि आप हमारे लिए क्या कर रहे हैं, हम आपके लिए.. तो सौदा न हो, रियल फ्रेंडशिप हो. तो उसका सबसे बड़ा मार्कर मैं कहूंगा कि जब श्रीलंका संकट में पड़ा और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि वहां राष्ट्रपति को भी अपना पद छोड़ना पड़ा. बाकी दुनिया चर्चा तो कर रही थी, मगर आप मदद के रूप में देखें तो कोई ज्यादा हेल्प नहीं कर रहा था. भारत एक ऐसा देश था जिसने.. और हमारे इतिहास में हमने पहली बार साढ़े चार बिलियन डॉलर की मदद दी. तो यह मैं कहूंगा कि नेबरहुड में इसका एक मैसेज है.” ए