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सिविल सर्विसेज एग्जाम के 12 अटेम्प्ट में 7 इग्नोर कीजिए… पूजा खेडकर ने दिल्ली HC में क्यों दी ये दलील?


नई दिल्ली:

महाराष्ट्र के पुणे में 34 साल की ट्रेनी IAS ऑफिसर पूजा खेडकर (Puja Khedkar)अपने UPSC सिलेक्शन को लेकर विवादों में हैं. उनपर UPSC CSE-2022 एग्जाम में शामिल होने के अपनी पर्सनल इंफॉर्मेंशन और डिसएबिलिटी को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप है. UPSC ने उन्हें अयोग्य करार दिया है. इस मामले को लेकर पूजा खेडकर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. पूजा खेडकर ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से सिविल सर्विसेज एग्जाम के उनके 12 अटेम्प्ट में से 7 अटेम्प्ट को नजरअंदाज करने की अपील की है. खेडकर का दावा है कि उन्हें घुटने में दिक्कत है. लिहाजा उन्हें ‘दिव्यांग’ कैटेगरी में ही मौके मिलने चाहिए थे. उन्होंने यह भी दलील दी है कि 47% दिव्यांगता होने के बावजूद वह जनरल कैटेगरी से एग्जाम में बैठीं. सिविल सर्विसेज एग्जाम के लिए डिसएबिलिटी का बेंचमार्क 40% है.

UPSC के पास मुझे अयोग्य करार देने की शक्ति नहीं : पूजा खेडकर ने दिल्ली HC में दाखिल किया जवाब

पूजा खेडकर ने शुक्रवार सुबह दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक एफिडेविट में कहा कि उसके जनरल कैटेगरी के रूप में सिविल सर्विसेज एग्जाम के 7 अटेम्प्ट को इग्नोर किया जाए. इससे उनके अटेम्प्ट की लिमिट घटकर 5 हो जाएगी (जिनमें से हर एग्जाम में वो पास हुईं). UPSC के सिविल सर्विसेज एग्जाम के लिए फिजिकली हैंडीकैप कैटेगरी के लिए अपर लिमिट से 4 अटेम्प्ट कम है, जबकि जनरल कैटेगरी के लिए ये अपर लिमिट से 1 अटेम्प्ट कम है.

पूजा खेडकर ने फिजिकल डिसएबिलिटी को लेकर महाराष्ट्र के एक हॉस्पिटल का सर्टिफिकेट भी सबमिट किया है. इसमें जिक्र है कि उनके बाएं घुटने में अस्थिरता के साथ पुराने ACL (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) भी फटा हुआ है.” 

UPSC के पास अयोग्य करार देने की शक्ति नहीं 
अपनी अयोग्यता को लेकर पूजा खेडकर ने बुधवार को भी दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया था. इसमें उन्होंने सारे आरोपों को नकारा है. अपने जवाब में पूजा खेडकर ने कहा, “एक बार प्रोवेशनरी ऑफिसर के रूप में सिलेक्ट और अपॉइंट होने के बाद  UPSC के पास उम्मीदवारी को अयोग्य घोषित करने की शक्ति नहीं रहती है.”

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2023 बैच की ट्रेनी IAS ऑफिसर थीं पूजा खेडकर
पूजा खेडकर 2023 बैच की ट्रेनी IAS ऑफिसर थीं. उन्हें सिविल सर्विसेज एग्जाम 2022 में 841वीं रैंक मिली थी. मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक एकेडमी में उनकी जून 2024 से ट्रेनिंग चल रही थी. पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने आरक्षण का लाभ लेने के लिए UPSC को अपने बारे में गलत जानकारियां दीं.

पूजा पर UPSC एग्जाम के लिए अपनी उम्र, अपने मां-बाप से जुड़ी गलत जानकारी देने का भी आरोप है. UPSC के मुताबिक, पूजा खेडकर ने अपनी पहचान छिपाकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेज का एग्जाम देने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र और दिव्यांगकता का सर्टिफिकेट बनवाया था. 

UPSC ने पाया धोखाधड़ी का दोषी
UPSC ने अपनी इंटर्नल इन्क्वॉयरी में पूजा खेडकर को धोखाधड़ी का दोषी पाया था. इसके बाद UPSC ने 31 जुलाई 2024 को उनका चयन रद्द कर दिया था. इसके बाद पूजा खेडकर भविष्य में किसी भी एग्जाम में नहीं बैठ सकेंगी. इस मामले में उनके खिलाफ UPSC की ओर से FIR दर्ज करायी गई है. लिहाजा उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. 

गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट पहुंचीं पूजा खेडकर
पूजा खेडकर अपनी गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट पहुंची थीं. पटियाला कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद पूजा ने 8 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जिसके बाद हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी. पूजा ने अग्रिम जमानत की मांग की है.

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