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"मेरी मूर्खता थी कि इन्हें CM बनाया…" : जब विधानसभा में जीतन राम मांझी पर भड़के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

खास बातें

  • जीतन राम मांझी पर भड़के सीएम नीतीश कुमार
  • नीतीश कुमार के बयान पर विधानसभा में हंगामा
  • बिहार विधानसभा में आरक्षण विधेयक पर हो रही थी चर्चा

पटना:

बिहार विधानसभा में गुरुवार को एक बार फिर हंगामा देखने को मिला. आरक्षण विधेयक पर जब जीतन राम मांझी ने अपनी बात रखी तो उसके जवाब में सीएम नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Former Chief Minister Jitan Ram Manjhi) पर भड़क गए. उन्होंने जीतन राम मांझी को सीएम बनाए जाने के निर्णय को अपनी गलती बतायी. बीजेपी के सदस्यों ने सीएम नीतीश के बयान का जमकर विरोध किया. 

नीतीश कुमार ने कहा कि इन्हें कोई आइडिया है? ये तो मेरी मूर्खता थी कि मैंने इसे सीएम बना दिया. लेकिन ये आदमी किसी काम के नहीं थे. मेरे पार्टी वालों ने बाद में मुझे समझाया तो फिर इन्हें हटाया गया. ये अभी गवर्नर बनना चाहते हैं. बीजेपी वाले इन्हें गवर्नर क्यों नहीं बना देते हैं. इनके खिलाफ इनके परिवार के लोग भी हैं. 

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विधानसभा अध्यक्ष को करना पड़ा हस्तक्षेप

नीतीश कुमार ने पूर्व सीएम को लेकर कहा कि ये जब हमारे साथ थे तब भी गलत बयानबाजी करते थे. अभी भी ये गलत बयानबाजी कर रहे हैं. बीजेपी नेताओं के द्वारा सीएम नीतीश के बयान का विरोध करने पर नीतीश कुमार ने कहा कि मैंने ही इन्हें सीएम बनाया था. सीएम नीतीश ने कहा कि जीतन राम मांझी आज कहते हैं कि हम भी मुख्यमंत्री थे. लेकिन इनसे पूछा जाए कि इन्हें किसने मुख्यमंत्री बनाया. नीतीश कुमार को रोकने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा. 

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नीतीश कुमार ने विधानसभा में दिया था अमर्यादित बयान

बता दें कि इससे पहले मंगलवार को भी नीतीश कुमार के बयान को लेकर हंगामा हुआ था. नीतीश कुमार के परिवार नियोजन के मुद्दे पर दिए गए बयान की काफी आलोचना हुई थी. उन्होंने बिहार विधानसभा में जातीय गणना (Bihar Caste Survey) पर बोलते समय शादीशुदा जोड़े के फिजिकल रिलेशन पर अमर्यादित बयान दिया था, जिसे लेकर महिला विधायक भी झेंप गईं थी. बीजेपी समेत अन्य नेताओं ने नीतीश कुमार को घेरा था. 

बिहार विधानसभा में आरक्षण बढ़ोतरी का प्रस्ताव पारित

बिहार विधानसभा में आरक्षण विधेयक पर चर्चा चल रही थी. उसी विधेयक पर जीतन राम मांझी अपनी बात रख रहे थे. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा में आरक्षण संशोधन बिल आम राय से पास हो गया. ये संशोधन राज्य सरकार के नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के नए प्रावधान के लिए हैं. इसके बाद जहां अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण बीस और दो प्रतिशत होगा जबकि वर्तमान में उन्हें सोलह और एक प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा हैं. वहीं ओबीसीं और ईबीसी को अब अठारह और पच्चीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया हैं. जबकि उन्हें वर्तमान में बारह और अठारह प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा हैं.

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