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कुवैत नौका जांच : मुंबई की अदालत ने तीन लोगों को 10 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेजा

पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के बाद तीनों को यहां एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार तीनों लोगों के नौका मार्ग और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में कोई अपराध किये जाने को सत्यापित किये जाने की आवश्यकता जताये जाने के बाद उन्हें 10 फरवरी तक हिरासत को मंजूरी दी.

हालांकि, अभियुक्तों के वकील ने दावा किया कि वे अपने कुवैती नियोक्ता से बचकर भागे, जिसने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिये थे और उनके साथ दुर्व्यवहार किया. पुलिस द्वारा अदालत में जमा कराए गए रिमांड नोट के मुताबिक नौका से जीपीएस प्रणाली बरामद की गई है, जिसे कुवैत से भारत तक तीनों द्वारा चुने मार्ग को लेकर स्पष्टता प्राप्त करने के लिए विश्लेषण के लिए भेजे जाने की जरूरत है.

पुलिस ने रिमांड नोट में कहा, ‘‘ प्रारंभिक जांच के दौरान आरोपियों ने कहा कि उन्होंने 28 जनवरी को कुवैत छोड़ दिया और भारतीय तटीय क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले सऊदी अरब, कतर, दुबई, मस्कट, ओमान और पाकिस्तान की यात्रा की. पुलिस को अभी इस मार्ग की जांच करनी है.”

मुंबई पुलिस ने बुधवार को मछली पकड़ने वाली एक नौका का उपयोग करके अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले तीन व्यक्तियों आई.वी. विनोद एंथोनी (29), सहाया एंटनी अनीश (29) और निदिसो डिटो (31) को गिरफ्तार किया.

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘पुलिस ने भारत में प्रवेश के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के लिए पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियमों की धारा 3 (ए) के साथ दंडात्मक धारा 6 (ए) के तहत एक मामला दर्ज करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया.”

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अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह पता चला कि वे तीनों मछुआरे थे और जिस मछली पकड़ने वाली नौका पर वे सवार थे, वह कुवैत में उनके मालिक अब्दुल्ला शरहित की है. उसने उन्हें मछुआरों के तौर पर काम पर रखा था. तीनों ने दावा किया कि शरहित ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिये और उन्हें नियमित रूप से मजदूरी का भुगतान नहीं किया व मारपीट की गई.

पुलिस ने कहा, ‘‘ आरोपी व्यक्तियों का दावा है कि उन्होंने कुवैत के एक स्थानीय पुलिस थाने और वहां भारतीय दूतावास से इसकी शिकायत की है. हालांकि, जब उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो तीनों ने वहां से भागने का फैसला किया.”

आरोपियों के अधिवक्ता सुनील पांडे ने कहा कि ये सभी परिस्थितियों के शिकार हुए हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक होने के नाते उनके सथ सही व्यवहार किया जाना चाहिए. पांडे ने अदालत से कहा, “कुवैत में नियोक्ता द्वारा उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया. उन्हें मजदूरी नहीं दी गई और उनके पासपोर्ट रखकर उन्हें वहां बंधक बना लिया गया. इसलिए, उन्होंने भागने और अपने देश लौटने का फैसला किया.”

पुलिस ने कहा कि आरोपियों की पहचान और पते की सत्यता की पुष्टि उनके तमिलनाडु स्थित रिश्तेदारों से की गई है. साथ ही कहा कि उनके परिवारों को गिरफ्तारी की सूचना दी गई है. पुलिस ने बताया कि तीनों लोग दो साल पहले रोजगार के लिए कैप्टन मदन नाम के एक एजेंट के माध्यम से केरल के त्रिवेन्द्रम से कुवैत गए थे. बम जांच एवं निपटान दस्ता (बीडीडीएस) की एक टीम ने नौका की जांच की है और उसमें से कोई विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला है.

 

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(इस खबर को The Hindkeshariटीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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