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"लक्षद्वीप बड़ी संख्या में पर्यटकों को संभाल नहीं पाएगा", जानें सांसद ने ऐसा क्यों कहा?

खास बातें

  • लक्षद्वीप से लोकसभा के हैं मोहम्मद फैज़ल
  • लक्षद्वीप में हाल के दिनों में पर्यटकों का आकर्षण बढ़ा है
  • पीएम मोदी हाल ही में लक्षद्वीप के दौरे पर गए थे

नई दिल्ली:

भारत और मालदीव (India and Maldives) के बीच चल रहे विवादों के बीच भारतीय लोगों का लक्षद्वीप को लेकर रुझान बढ़ा है. सोशल मीडिया में भी लोग “चलो लक्षद्वीप” का आह्वान कर रहे हैं. हालांकि इस बीच लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैज़ल (Mohammad Faisal) ने The Hindkeshariसे बात करते हुए कहा है कि मालदीव के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वो भारी संख्या में पर्यटकों की संख्या को संभाल पाए. उन्होंने कहा कि अभी लक्षद्वीप में होटलों की संख्या काफी कम है साथ ही सीधी उड़ानों की भी भारी कमी है. अगर इन बाधाओं को दूर भी कर लिया जाता है तो द्वीप की नाजुक इकोसिस्टम को देखते हुए भी पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित ही रखना होगा.

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न्यायमूर्ति रवींद्रन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही हो विकास: सांसद

फैज़ल ने कहा कि लक्षद्वीप, कोरल (coral) से बना है जो कि बहुत संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से बहुत नाजुक है.  लक्षद्वीप के सांसद ने कहा कि यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति रवींद्रन आयोग ने एक “एकीकृत द्वीप प्रबंधन योजना” बनाया था. यह “विकास के लिए बाइबिल” की तरह, जिसकी सलाह सड़कों, घाटों या अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शुरू करने से पहले ली जाती रही है. उन्होंने कहा कि आयोग की यह “व्यापक रूप से स्वीकृत” योजना में द्वीपों की “वहन क्षमता” और उनमें आने वाले पर्यटकों की संख्या को लेकर भी सुझाव दी गयी है.

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सांसद ने कहा कि आयोग की सलाह के कारण ही लक्षद्वीप इस समय “उच्च-स्तरीय नियंत्रित पर्यटन” पर ध्यान दे रहा है. केंद्र शासित प्रदेश अत्यधिक नियंत्रित पर्यटन से अधिकतम राजस्व जुटाने की योजना बना रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटकों को इस बात की सहमति भी देनी होगी कि उनकी तरफ से कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे.

36 में से केवल 10 द्वीपों पर ही रहते हैं लोग

गौरतलब है कि लक्षद्वीप के 36 द्वीपों में से केवल 10 पर ही अभी लोग रहते हैं.  वर्तमान में लक्षद्वीप की केवल 8-10 प्रतिशत आबादी ही पर्यटन पर निर्भर है. लक्षद्वीप लोगों की सूची में कभी नहीं था. लेकिन मालदीव के साथ विवाद के कारण, सोशल मीडिया पर कई लोग अब लक्षद्वीप जाने की सोच रहे हैं. 

मालदीव के साथ विवादों के बाद चर्चा में आया लक्षद्वीप

भारत और मालदीव के बीच राजनयिक विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बारे में व्यापक रूप से प्रसारित पोस्ट के बाद मालदीव के मंत्रियों ने अपमानजनक टिप्पणियां कीं थी. भारत द्वारा कड़ा विरोध जताने के बाद मालदीव के तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया गया और मालदीव ने टिप्पणियों की आलोचना की. लेकिन मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार चीन के साथ अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं. आज मालदीव के राष्ट्रपति ने भारत को द्वीप अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए समय सीमा दे दी है. उन्होंने कहा, भारतीय सैन्यकर्मियों को 15 मार्च तक देश छोड़ देना चाहिए. 

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