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दिल्ली में कमल खिल चुका है, अब बंगाल की बारी है : लोकसभा में गरजे अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में एक प्रकार से हर परिवार को छूता है. हर गांव में कोई न कोई ऐसी इकाई है, जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के काम में जुटी हुई है और देश के विकास में योगदान करती है. इस विधेयक के पारित होने के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, और सामाजिक समावेशन बढ़ेगा.

गृहमंत्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यों का परिणाम है कि आज दिल्ली में भी कमल खिल गया और यहां भी आयुष्मान भारत योजना आ गई. देश के हर गरीब को इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक खर्च की चिंता नहीं करनी है. अब बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा और आयुष्मान भारत आ जाएगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड को एक राष्ट्रीय कोऑपरेटिव संस्था बनाया है. इनके माध्यम से देश के किसानों का उत्पाद विदेशों में निर्यात करने का काम चल रहा है. अब तक 12 लाख टन सामग्री दुनिया के विभिन्न बाजारों में बेचकर इसका मुनाफा सीधा किसानों के पास पहुंचाया गया है.

अमित शाह ने कहा कि कई साल तक बड़े-बड़े कोऑपरेटिव लीडर कृषि मंत्री रहे, लेकिन सहकारी चीनी मिलों के समक्ष इनकम टैक्स की जो समस्या थी, वह कभी समाप्त नहीं होती थी सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद साल 2022 में एक असेसमेंट की समस्या को मोदी सरकार ने हमेशा के लिए समाप्त कर दिया, जो 2016 से चल रही थी।

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उन्होंने कहा कि “सहकार से समृद्धि” सिर्फ एक नारा नहीं है, इसे जमीन पर उतारने के लिए साढ़े तीन साल में सहकारिता मंत्रालय ने दिन-रात एक किया है. आने वाले दिनों में कुछ ही महीनों में कोऑपरेटिव बेसिस पर ओला-ऊबर जैसी एक बहुत बड़ी कोऑपरेटिव सहकार टैक्सी आने वाली है और इसका मुनाफा किसी धन्नासेठ के हाथ में नहीं जाएगा, वह ड्राइवर के पास जाएगा.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. जब भी देश का इतिहास लिखा जाएगा, यह 10 साल का कालखंड इस देश के गरीबों के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. मोदी सरकार ने देश के गरीबों को घर देने का काम किया, शौचालय देने का काम किया, पीने का शुद्ध पानी देने का काम किया, हर महीने पांच किलोग्राम अनाज मुफ्त देने का काम किया, और गरीबों के घर गैस और बिजली पहुंचाने का काम किया.

(इस खबर को The Hindkeshariटीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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