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Mumbai Dust Storm : उफ्फ! ऐसी आंधी, धूल के ऐसे गुबार, आखिर मुंबई की ऐसी हालत हो क्यों गई?

भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई धीरे-धीरे दिल्ली की तरह प्रदूषित होती जा रही है. मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भी शामिल हो गई है. इसी साल फरवरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक या AQI के आधार पर मुंबई को दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर का दर्जा दिया गया था. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के अन्य हिस्सों में भी हाई पॉल्यूशन लेवल दिखाई दिया. नवी मुंबई, मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत 9 नगर निगमों में शामिल है. बीते साल अक्टूबर में नवी मुंबई देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया.

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कंस्ट्रक्शन वर्क्स प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह

मुंबई की एयर क्वालिटी खराब होने की कई वजहें हैं. लेकिन सबसे बड़ी वजह कंस्ट्रक्शन वर्क्स (निर्माण के कामों) को माना जा रहा है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में बहुत से कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. ये वास्तव में धूल भरे प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है. BMC ने बीते साल 20 अक्टूबर को एक बयान में कहा था, “वर्तमान में मुंबई में 6000 लोकेशन पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है. ये जलवायु परिवर्तन मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की एयर क्वालिटी पर नेगेटिव असर डाल रहा है.” 

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हाई राइज बिल्डिंग और कॉमर्शियल टावरों के लिए पुरानी इमारतों को गिराया जा रहा है. शहर में भीड़भाड़ को कम करने के लिए मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं. इनमें एक कोस्टल रोड और मेट्रो लाइनें शामिल हैं. 

हवा के पैटर्न को बदल रही हैं हाई राइज बिल्डिंगें

नई और हाई राइज बिल्डिंगें हवा के पैटर्न को बदल रही है. इससे समुद्री हवा का असर कम हो रहा है. समुद्र से आने वाली हवा मुंबई के पार्टिक्यूलेट मैटर और डस्ट मिक्स के साफ करने में नाकाम साबित हो रहे हैं. इसीलिए पिछले महीने मुंबई के कई इलाकों में कई दिनों तक प्रदूषण  का स्तर 300 से पार हो गया था. 

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह दूसरा साल है, जब मुंबई में एयर पॉल्यूशन का लेवल बढ़ा हो. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रिसर्च एंड एडवोकेसी अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक, “मुंबई में इस महीने की शुरुआत में दर्ज किया गया पॉल्यूशन लेवल पिछले साल के इसी समय की तुलना में बहुत ज्यादा था. प्रदूषण मुंबई के लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है. यह शहर के लिए एक चेतावनी है.”

मुंबई शहर के अधिकारियों ने बिल्डरों को कंस्ट्रक्शन साइटों पर 11 मीटर ऊंचे बैरिकेड लगाने का आदेश दिया है, जो धूल को कंट्रोल करे. इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन साइटों और प्रमुख सड़कों पर धूल के कणों को कम करने के लिए एंटी-स्मॉग मशीनें तैनात की जाएंगी. खुले मैदानों में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. हालांकि, नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा. इस महीने कई दिनों तक मुंबई शहर का AQI 200 से ऊपर चला गया, जो सुरक्षित सीमा से 3 गुना ज्यादा है.

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सड़कों पर गाड़ियों की बढ़ती संख्या से भी नुकसान

मुंबई के प्रदूषण में दूसरा बड़ा योगदान सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की संख्या भी है. मुंबई में प्राइवेट कारों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है. प्रति किलोमीटर 600 कारें सड़कों पर दौड़ती हैं. वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के क्लीन एयर एक्शन विभाग के प्रोग्राम डायरेक्टर श्रीकुमार ने कहा कि मुंबई का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सबसे अच्छा माना जाता था, लेकिन बीते कुछ समय में हालात बदले हैं. इस पर फौरन ध्यान देने की जरूरत है.

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श्रीकुमार कहते हैं, “गाड़ियों की संख्या 40 लाख तक पहुंच गई है, ये बहुत बड़ा फिगर है. बाहर से आने वाली जो 7-8 लाख गाड़ियां हैं, उन्हें भी इसमें शामिल करके डेटा को देखा जाए, तो पता चलेगा कि मुंबई वास्तव में कितना कार्बन उत्सर्जन झेल रहा है. हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए फिर से जागरुकता लानी होगी.” बता दें मुंबई में गाड़ियों की संख्या दो दशकों में करीब 300 फीसदी बढ़ी है. इसमें 35% वाहन 15 साल से पुरानी कैटेगरी के हैं, जो वाहनों से हुए PM10 उत्सर्जन का 49% उत्सर्जित करते पाए गए हैं.

क्लाइमेट चेंज भी एक वजह

मुंबई में बढ़ते प्रदूषण के पीछे क्लाइमेट चेंज भी एक वजह हो सकता है. ‘स्क्रॉल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र के ऊपर तापमान में असामान्य गिरावट ने मुंबई में तटीय हवाओं की गति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. क्योंकि अरब सागर में कम हवा चलने के कारण प्रदूषक तत्वों का फैलाव नहीं हो सका. इससे एयर पॉल्यूशन की स्थिति और खराब हो गई.

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कार्बन उत्सर्जन को रोकना चुनौती

एयर पॉल्यूशन के डेटा को समझने वाले एक्सपर्ट और SAFAR के फाउंडर-डायरेक्टर डॉ. गुफरान बेग ने 2020 में एक स्टडी की थी. उन्होंने कहा, “स्टडी में 17 प्रदूषण स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. इन्हें मोटे तौर पर पांच क्षेत्रों में बांटा गया है. इनमें परिवहन, हवा से उड़ने वाली सड़क की धूल, उद्योग शामिल है. सबसे ज़्यादा गाड़ियों से 30% से ज़्यादा प्रदूषण निकलता है. उसके बाद इंडस्ट्री उत्सर्जन, स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज़, म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट जलाना, लैंडफ़िल फायर उत्सर्जन और कंस्ट्रक्शन के कारण तेज़ी से प्रदूषण बढ़ रहा है. मुंबई 44 गीगाग्राम उत्सर्जन कर रहा है. लेकिन, दिल्ली में 80 गीगाग्राम उत्सर्जन हो रहा है. दिल्ली का एरिया तीन गुना ज़्यादा है. मुंबई में कार्बन उत्सर्जन को रोकना एक चुनौती है.”

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सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर से इकट्ठा किए गए डेटा से पता चलता है कि 2018 के बाद से पीएम 2.5 और पीएम 10 के बीच का अनुपात 0.3 से 0.4 के बीच रहा है. इसे कम करने की जरूरत है.

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