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न बाथरूम, न स्पेस… स्टार टीचर का चेहरा लेकिन कोई और लेता है क्लास… आनंद कुमार ने समझाई कोचिंग सेंटरों की रियालटी


नई दिल्ली:

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित IAS के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में जलभराव से 3 छात्रों की मौत के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. शनिवार को एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बने लाइब्रेरी में बारिश का पानी भरने से 3 छात्रों की डूबकर मौत हो गई. हादसे के बाद MCD और दिल्ली पुलिस हरकत में आ गई है. MCD ने इलाके में स्थित 13 कोचिंग सेंटर को सील कर दिया है. ये सभी कोचिंग सेंटर बिल्डिंग के बेसमेंट में गैरकानूनी तरीके से चल रही थी. मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा है. इस बीच पूरे मामले को लेकर छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, पुलिस और प्रशासन पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं.

The Hindkeshariने बेसमेंट हादसे को लेकर ‘सुपर 30’ के फाउंडर आनंद कुमार से बात की. आनंद कुमार ने बताया, “ये हादसा बेहद दर्दनाक है. एक झटके में 3-3 छात्र दुनिया से चले गए. उनकी कोई गलती नहीं थी. वो जिंदगी से हताश भी नहीं थे. लेकिन सिस्टम में कमी की वजह से उनकी जान गई.”

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ऐसे कोचिंग सेंटरों में हमेशा दम घुटने का बना रहता है खतरा
आनंद कुमार बताते हैं, “आज दिल्ली में खासकर ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे इलाकों में छोटी-छोटी गलियों के अंदर, बेसमेंट में कोचिंग सेंटर खोल दिए गए हैं. जहां दम घुटने, पानी भरने और आग लगने का खतरा बना रहता है… वहां 150-200 और इससे ज्यादा की संख्या में छात्र पढ़ते हैं. ऐसी जगहों पर बने कोचिंग संस्थानों में कभी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है. ऐसी परिस्थितियों में वो छात्रों को पढ़ाते हैं. इसके लिए मोटी फीस वसूली जाती है. हर सर्विस के लिए अलग फीस ली जाती है. इससे बच्चों का शोषण भी होता है. लेकिन छात्रों को वो सुविधाएं नहीं दी जाती, जो शांति से पढ़ने के लिए जरूरी होता है.”

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दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा
‘सुपर 30’ के फाउंडर कहते हैं, “बेसमेंट की लाइब्रेरी में पानी भरने से 3 छात्रों की डूबकर मौत हो गई. ये बहुत दुखद बात है. इसके लिए सरकार को कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए. जो लोग इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनका विरोध करना एकदम जायज है. लेकिन मेरा मानना है कि उन छात्रों को भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए.”

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गाइडलाइनों का नहीं होता पालन
क्या ऐसी कोचिंग संस्थानों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं होती? इसके जवाब में आनंद कुमार कहते हैं, “ऐसे कोचिंग सेंटरों के लिए बेशक गाइडलाइन तो बने हुए हैं. बस उनपर अमल नहीं किया जाता है. कोचिंग सेंटरों के लिए कितने बाथरूम होने चाहिए? कितने साइज के स्पेस पर एक छात्र को बैठाया जाना चाहिए, कौन-कौन सी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए… ये सब गाइडलाइन में है. लेकिन शायद ही किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट में सभी गाइडलाइनों का पालन किया जाता हो. कई कोचिंगों में तो बाथरूम तक का इंतजाम नहीं होता. क्षमता से ज्यादा छात्रों को भर लिया जाता है.”

गरीब छात्रों को दिया जाता है झांसा
आनंद कुमार बताते हैं, “ऐसे कोचिंग सेंटरों में खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को झांसा देने का काम होता है. उन्हें सिलेबस पूरा नहीं पढ़ाया जाता. पढ़ाने के दौरान जिन छात्रों को बातें समझ में नहीं आती, वो जब दोबारा पूछने जाते हैं… तो उन्हें समय नहीं दिया जाता. फिर एक्स्ट्रा क्लासेस के लिए उनसे अलग चार्ज किए जाते हैं.” 

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स्टार टीचर का चेहरा, पढ़ाने वाले कोई और
आनंद कुमार कहते हैं, “ऐसे कोचिंग सेंटरों में फर्जीवाड़ा भी चलता है. प्रमोशन के बैनर पर तो स्टार टीचर का चेहरा दिखा दिया जाता है, लेकिन वो क्लास लेने के लिए बहुत कम ही आते हैं. ये समस्याएं ऑफलाइन और ऑनलाइन कोचिंग दोनों जगह है. स्टार टीचर की जगह कोई दूसरा टीचर क्लास लेने आता है.”

आनंद कुमार “दिल्ली के कोचिंग संस्थानों में ऐसी बहुत सी खामियां हैं, जिनका सामना छात्र हर रोज करते हैं. मेरे पास कई बच्चे ऐसी समस्याएं लेकर आते हैं. इसलिए इन मामलों में सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए. कोटा  के कोचिंग सेंटरों में भी इंतजाम ठीक नहीं है. ऐसे तमाम कोचिंग सेंटरों पर निरीक्षण करना चाहिए. जो कोचिंग सेंटर गैरकानूनी तरीके से चल रहे हैं, उन्हें तुरंत बंद करवाना चाहिए.”

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