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यात्रियों को सफर ले जानी वाली 'पंजाब मेल' का 111 साल का सफर, ब्रिटिश काल में थी सबसे तेज ट्रेन

भारतीय रेल (Indian Rail) की सबसे पुरानी ट्रेन पंजाब मेल (Punjab Mail) ने 111 वर्ष पूरे कर 112वें वर्ष में कदम रखा है. ब्रिटिश भारत की सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाली इस ट्रेन का अतीत जितना गौरवशाली था, इसका वर्तमान भी उतना ही समृद्ध है. कभी तत्‍कालीन बॉम्‍बे से पेशावर तक की दूरी तय करने वाली यह ट्रेन आज मुंबई से फिरोजपुर छावनी की दूरी तय करती है. कोविड के दौरान इस ट्रेन के पहिए जरूर थमे, लेकिन अब हमें इस ट्रेन की नियमित सेवाएं मिल रही हैं. आज यह ट्रेन 52 स्‍टेशनों पर रुकती है और 1930 किमी की दूरी तय करती है. 

 
फ्रंटियर मेल से भी 16 साल अधिक पुरानी है पंजाब मेल 

पंजाब मेल का कोई सानी नहीं है. यह बेहद प्रसिद्ध फ्रंटियर मेल से भी 16 साल अधिक पुरानी है. पंजाब मेल को पहले पंजाब लिमिटेड के नाम से जाना जाता था. उस वक्‍त बैलार्ड पियर मोल स्टेशन जीआईपीआर सेवाओं का केंद्र था. भारत में पहली पोस्टिंग पर पी एंड ओ स्टीमर मेल में ब्रिटिश राज के अधिकारी अपनी पत्नियों के साथ होते थे. साउथेम्प्टन और बॉम्बे के बीच स्टीमर यात्रा तेरह दिनों तक चलती थी. चूंकि ब्रिटिश अधिकारियों के पास बंबई तक अपनी यात्रा के साथ पोस्टिंग के स्थान तक ट्रेन से अपनी यात्रा दोनों के लिए संयुक्त टिकट होते थे, इसलिए वे उतरने के बाद मद्रास, कलकत्ता या दिल्ली के लिए जाने वाली ट्रेनों में से एक में सवार हो जाते थे. 

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पेशावर तक 2,496 किमी की दूरी तय करती थी ट्रेन 

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पंजाब लिमिटेड बंबई के बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से जीआईपी मार्ग के माध्यम से पेशावर तक करीब 2,496 किमी की दूरी तय करने में 47 घंटे का वक्‍त लेती थी. ट्रेन में छह डिब्‍बे थे, तीन यात्रियों के लिए और तीन डाक सामान और मेल के लिए. तीन यात्री डिब्बों में केवल 96 यात्रियों को ले जाने की क्षमता थी.

विभाजन के पूर्व पंजाब लिमिटेड ब्रिटिश भारत की सबसे तेज रफ्तार वाली गाड़ी थी. पंजाब लिमिटेड के मार्ग का बड़ा हिस्‍सा जीआईपी रेल पथ इटारसी, आगरा, दिल्‍ली, अमृतसर और लाहौर से गुजरता था और पेशावर छावनी में समाप्‍त हो जाता था. इस गाड़ी ने 1914 से बंबई वीटी (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई) से आवागमन प्रारंभ किया. बाद में इसे पंजाब लिमिटेड के स्‍थान पर पंजाब मेल कहा जाने लगा और इसकी सेवाएं दैनिक कर दी गई. 

1914 में बांबे से दिल्‍ली का जीआईपी रूट 1,541 किमी था, जिसे यह 29 घंटे और 30 मिनट में पूरा करती थी. 1920 के प्रारंभ में इसके समय को घटाकर 27 घंटा 10 मिनट किया गया. 1930 के मध्‍य में पंजाब मेल में तृतीय श्रेणी का डिब्‍बा और 1945 में वातानुकूलित शयनयान लगाया गया. 1972 में यह गाड़ी फिर से 29 घंटे लेने लगी और 2011 में पंजाब मेल 55  अन्य स्‍टेशनों पर रूकने लगी.  

1968 में इस गाड़ी को डीजल इंजन से झांसी तक चलाया जाने लगा और बाद में डीजल इंजन नई दिल्‍ली तक चलने लगा और 1976 में यह फिरोजपुर तक जाने लगी. 1970 के अंत या 1980 के प्रारंभ में पंजाब मेल भुसावल तक बिजली के करंट से इंजन को गति दी जाने लगी. इगतपुरी में डीसी से एसी में बदलता था. 

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अब 59 किमी प्रति घंटे है पंजाब मेल की स्‍पीड 

पंजाब मेल मुंबई से फिरोजपुर छावनी तक की 1930 किमी की दूरी 52 स्टेशनों पर रुकने के बावजूद औसतन 59 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 32 घंटे 35 मिनट में पूरी करती है. अब इसमें रेस्‍टोरेंट कार के स्‍थान पर पेंट्रीकार लगाई जाती है. 

22 मार्च 2020 से कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान यात्री ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था. बाद में सेवाओं को एक मई 2020 को अनलॉक के बाद स्पेशल ट्रेनों के रूप में फिर से शुरू किया गया. कोविड के बाद पंजाब मेल स्‍पेशल ने एक दिसंबर 2021 से एलएचबी कोचों के साथ अपनी यात्रा शुरू की और नियमित सेवा 15 नवंबर 2021 से शुरू हुई. 

वर्तमान में इसमें एक फर्स्ट एसी सह वातानुकूलित टू टीयर, 2 -एसी टू टियर ,6- एसी  थ्री टीयर, 6 शयनयान, एक पैंट्रीकार, 5 सेकेंड क्लास के कोच और एक जनरेटर वैन है. वर्तमान में यह गाड़ी 250 प्रतिशत से अधिक आक्यूपेंसी पर चल रही है. 

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