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"किसी भी चैनल पर, किसी भी समय और किसी भी मुद्दे पर…", स्मृति ईरानी ने प्रियंका गांधी को दी खुली चुनौती

अमेठी से बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने प्रियंका गांधी को दिया चैलेंज

नई दिल्ली:

अमेठी लोकसभा सीट (Amethi Loksabha Seat) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है. स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने प्रियंका गांधी को खुली बहस की चुनौती दी है. ईरानी ने कहा है कि मैं प्रियंका से किसी भी चैनल पर, किसी भी समय, किसी भी टॉपिक पर बहस करने को तैयार हूं. आपको बता दें कि प्रियंका गांधी ने बीते दिनों एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि पीएम मोदी कई अहम मुद्दों पर बात नहीं करते हैं. स्मृति ईरानी ने प्रियंका गांधी के इस बयान को अधार बनाते हुए आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी है. 

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स्मृति ईरानी ने कहा कि मैं उन्हें (प्रियंका गांधी) चैलेंज करती हूं कि बीजेपी से किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए वो किसी भी चैनल, किसी भी एंकर, कोई भी जगह और किसी भी समय को चुन लें. मैं उनसे बहस के लिए तैयार हूं. उन्होंने आगे कहा कि दोनों भाई बहन एक तरफ और बीजेपी का प्रवक्ता एक तरफ, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. हमारी पार्टी से उनके लिए सुधांशु त्रिवेदी ही बहुत हैं. उन्हें उत्तर मिल जाएगा. 

आपको बता दें कि अमेठी लोकसभा सीट से 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55 हजार वोटों के अंतर से हराया था. 2019 से पहले अमेठी गांधी परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती थी लेकिन स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हराकर कांग्रेस के इस अभेद्य किले को जीत लिया था. 

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को रायबरेली के बछरावां में राहुल गांधी के पक्ष में एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया था. इस दौरान उन्होंने कहाथा कि भाजपा की पूरी मशीनरी राहुल गांधी के बारे में झूठ फैलाने में जुटी है. उन्होंने कहा था कि भाजपा आम जनता को गुमराह करने में जुटी है. इनके राज में महंगाई बढ़ी है. हमारी सरकार आने पर आशा वर्कर्स से लेकर मनरेगा के कर्मचारियों के वेतन को दोगुना किया जायेगा.

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प्रियंका गांधी ने कहा था कि भाजपा के उम्मीदवार जगह-जगह जाकर कहते हैं कि हमें वोट देंगे, तो संविधान बदल देंगे. ये लोग अब संविधान को बदलने की बात कर रहे हैं. अब जब पीएम मोदी को लगा कि बात उलटी हो रही है, तब ‌वह अपना बयान बदलने लगे. यहां के लोग नेताओं को अच्छी तरह समझते हैं. जब उन्हें इंदिरा जी (इंदिरा गांधी) की कोई नीति पसंद नहीं आई तो उन्होंने उन्हें भी हरा दिया. इंदिरा जी गुस्सा नहीं हुईं बल्कि आत्ममंथन किया. आपने उन्हें दोबारा चुना. यह रायबरेली के लोगों की खासियत है कि वे नेताओं को समझते हैं.

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