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मणिपुर के जिरीबाम में संदिग्ध कुकी विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशन पर किया हमला, एक घर जलाया


इंफाल/गुवाहाटी:

मणिपुर के जिरीबाम जिले में संदिग्ध कुकी विद्रोहियों ने शनिवार को एक पुलिस स्टेशन पर गोलीबारी की. जिले के बोरोबेकरा उपखंड के पुलिस सूत्रों ने बताया कि संदिग्ध कुकी विद्रोहियों ने जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन पर सुबह 5.30 बजे गोलीबारी की. पुलिस स्टेशन से प्राप्त तस्वीरों में दीवारों और दरवाजों पर गोलियों के निशान दिखाई दे रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि एक घर में आग लगा दी गई और एक बम हमला भी हुआ. मणिपुर पुलिस प्रमुख राजीव सिंह ने संवाददाताओं से कहा, “जिरीबाम जिले सहित कुछ इलाकों में छिटपुट गोलीबारी हो रही है. सुरक्षा बलों के प्रयासों से स्थिति पर काबू पा लिया गया है.”

आज का हमला सत्तारूढ़ बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के मीतेई, नागा और कुकी विधायकों की दिल्ली में केंद्र से अलग-अलग मुलाकातों के कुछ ही दिनों बाद हुआ है. यह विधायक मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद पहली बार केंद्र से मिले थे. 

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शुक्रवार को लेटरहेड ‘हमार विलेज वालंटियर्स’ पर एक बयान में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को “सूर्यास्त से पहले” जिरीबाम में यह क्षेत्र छोड़ने की धमकी दी गई है, और न छोड़ने पर किसी भी घटना की जिम्मेदारी लेने के लिए कहा गया है.

मैतेई नागरिक समाज संगठन जिरी अपुनबा लूप ने आज एक बयान में इस खतरे के बारे में चिंता जताई. उसने  आरोप लगाया कि कुकी विद्रोहियों ने बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन पर गोलीबारी और बमों से बड़ा हमला किया. बमों का उपयोग करके एक दुकान और एक घर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और एक घर को जला दिया.

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एक अगस्त को मैतेई समुदाय और हमर जनजाति के प्रतिनिधियों ने जिरीबाम में एक शांति बैठक की थी. उन्होंने जातीय हिंसा से ग्रस्त असम की सीमा से लगे इस जिले में दो माह में स्थिति सामान्य बनाने के लिए सहमति व्यक्त की थी.

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जिरीबाम में एक साल से शांति थी

मणिपुर की राजधानी इंफाल से 250 किलोमीटर दूर जिरीबाम में मई 2023 में मीतेई-कुकी जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से एक साल से अधिक समय तक हिंसा नहीं देखी गई. हालांकि, जून में जिले में झड़पें हुईं, जिससे दोनों समुदायों के एक हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. इनमें से कुछ लोग पड़ोसी राज्य असम में हैं.

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घाटी के प्रमुख मैतेई समुदाय और कुकी (यह शब्द औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों द्वारा दिया गया था) नाम से जानी जाने वाली लगभग दो दर्जन जनजातियों, जो कि मणिपुर के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में प्रमुखता से रहती हैं, के बीच संघर्ष में 220 से अधिक लोग मारे गए हैं और लगभग 50,000 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं.

सामान्य श्रेणी के मैतेई लोग अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल होना चाहते हैं. कुकी समुदाय के पड़ोसी म्यांमार के चिन राज्य और मिजोरम के लोगों के साथ जातीय संबंध हैं. यह समुदाय अपने लिए मणिपुर से अलग प्रशासनिक व्यवस्था चाहता है. वह इसके पीछे मैतेई लोगों द्वारा भेदभाव किया जाना और संसाधनों और सत्ता में असमान हिस्सेदारी का हवाला देता है.

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