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थैंक यू मी-लार्ड! सख्त शब्दों ने जलते जख्मों पर रख दिया मरहम


नई दिल्ली:

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज (RG Kar Medical College) में हुई रेप की घटना को लेकर पूरे देश में लोगों में आक्रोश है. घटना के बाद राज्य सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट (Calcutta High Court) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कई सवाल खड़े किए हैं. गुरुवार को सीजेआई (CJI) ने सवाल किया कि FIR में 14 घंटे की देरी का कारण क्या था? उन्होंने सवाल पूछा कि अपराध की GD एंट्री सुबह 10:10 पर हुई जब फ़ोन के ज़रिए यह खबर मिली कि थर्ड फ्लोर पर PG डॉक्टर बेहोशी की हालत में मिली है. पीड़िता के शव को देखकर बोर्ड ने शुरुआती राय दी थी कि मौत का कारण गला घोटना हो सकता है और सेक्सुअल एसॉल्ट से भी इनकार नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद पोस्टमार्टम शाम 6-7 के बीच हुआ और उसके बाद जांच शुरू की गई.

30 साल में ऐसा नहीं देखा:  सुप्रीम कोर्ट
रेप के मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम अदालत ने बंगाल सरकार और पुलिस से कई सवाल किए और कई बार फटकार लगायी. सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे.  दोनों ने ही कई तीखे सवाल पूछे. न्यायमूर्ति पारदीवाला ने बंगाल सरकार से कहा कि आपके राज्य द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया ऐसी है जिसका सामना मैंने अपने 30 साल के अनुभव में कभी नहीं किया था. 

कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने का दिया था आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला चिकित्सक के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के बाद हत्या के मामले की जांच कोलकाता पुलिस से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया था. अदालत ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया था कि वह केस डायरी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दे तथा 14 अगस्त सुबह 10 बजे तक अन्य सभी दस्तावेज सुपुर्द कर दे.  सरकारी आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक का शव बरामद किया गया था, जिसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और हत्या कर दी गई थी.  

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‘आप अपनी रिपोर्ट को अपने पास रखें…’: हाईकोर्ट ने ममता सरकार को फटकारा
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के मामले को लेकर शुरुआती दिनों से ही ममता सरकार को कई बार फटकार लगाई है. बुधवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में कहा था कि मैंने पिछले आदेश के मुताबिक रिपोर्ट तैयार की है. राज्य सरकार की बात सुनकर हाईकोर्ट ने कहा कि आप अपनी रिपोर्ट अपने पास ही रखिए. 

पीड़िता की पहचान उजागर न हो इसे लेकर कोर्ट को करना पड़ हस्तक्षेप
कोलकाता रेप पीड़िता की पहचान को उजागर न करने को लेकर पहले सुप्रीम कोर्ट ने फिर हाईकोर्ट ने सरकार और मीडिया संस्थानों पर सख्त नाराजगी जताई थी. बताते चलें कि पहचान को उजागर करने के मामले में कोलकाता पुलिस ने बीजेपी के पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी को समन भी जारी किया था. 

सुप्रीम कोर्ट ने किया था टास्क फ़ोर्स का गठन
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पहली बार सुनवाई की थी. इस दौरान अदालत ने उस दिन भी सख्त टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ के लिए सुरक्षा पर चिंता जताई थी और बाद में एक टास्कफोर्स का गठन किया था. 

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी है 8 दिन के अंदर स्टेटस रिपोर्ट
हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच अब सीबीआई कर रह ही. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीबीआई से 8 दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया था. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई आरोपी संजय रॉय से लगातार पूछताछ कर रही है. 

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