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किसानों के सम्मान और पारदर्शी डिजिटल प्रणाली से सफल हुआ धान खरीदी का महाअभियान: खाद्य मंत्री बघेल….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़, भारत के कृषि परिदृश्य में एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरा है, जहाँ धान खरीदी और किसान कल्याण की योजनाओं ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विगत तीन वर्षों के धान खरीदी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने न केवल धान खरीदी के अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का देश में सबसे अधिक मूल्य सुनिश्चित कर एक मिसाल पेश की है।

खरीफ सीजन 2025-26 में 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी को मिलाते हुए पिछले तीन खरीफ सीजन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिससे किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है। उक्त बातें खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में सदन की कार्यवाही के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का ‘‘साय मॉडल’’ धान खरीदी और किसान खुशहाली में देश का नंबर-1 राज्य है। अब छत्तीसगढ़ धान का कटोरा के साथ-साथ न्याय का कटोरा के रूप में स्थापित हो रहा है। खाद्य मंत्री ने कहा कि यह बताने में उन्हें कोई हर्ज नहीं है कि अब छत्तीसगढ़ अन्नदाताओं को फसल का वाजिब कीमत देने वाला देश का
पहला राज्य बन गया है।

श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसे फसलों को भी कृषक उन्नति योजना में शामिल किया गया है। कृषक उन्नति योजना के लिए इस बजट में 10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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उन्होंने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 25.49 लाख किसानों से 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। जिनका निराकरण लगभग पूर्णतः की ओर है। वर्तमान में संग्रहण केन्द्रों में 1.60 लाख टन धान और 67 हजार टन उपार्जन केन्द्र में शेष है, जो कुल खरीदी का 3 प्रतिशत से भी कम है। केन्द्र सरकार द्वारा धान निराकरण की समयावधि 30 अप्रैल 2026 तक निर्धारित की गई है। धान निराकरण का कार्य जारी है। चालू खरीफ सीजन 2025-26 में 25.24 लाख से अधिक किसानों से पारदर्शिता के साथ 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। धान को उचित सुरक्षा एवं रख-रखाव के साथ संग्रहित रखा गया है।

खाद्य मंत्री श्री बघेल ने बताया कि पूर्व वर्षों में संग्रहण केन्द्रों में खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में 1.86 प्रतिशत, 2019-20 में 6.32 प्रतिशत, 2020-21 में 4.17 प्रतिशत एवं 2021-22 में 2.78 प्रतिशत सुखद आया है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में संग्रहण केन्द्रों में भंडारित धान के रख-रखाव हेतु समुचित व्यवस्था, कैप कव्हर, किट नाशक आदि सुरक्षा व्यवस्था विपणन संघ द्वारा किया गया है। वर्ष 2024-25 में संचालित 2739 उपार्जन केन्द्रों में से 2728 उपार्जन केन्द्रों का मिलान कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 11 उपार्जन केन्द्रों में मिलान का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में धान सुखद 6.32 प्रतिशत पहुंच गई थी, जो घटकर 3.52 प्रतिशत पर नियंत्रित है।

मंत्री श्री बघेल ने कहा कि वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की गई, जिसमें 33 हजार 431 करोड़ रूपए समर्थन मूल्य के रूप में और कृषक उन्नति योजना के तहत होली तिहार के पहले 10 हजार 324 करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त अंतरित कर प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के वायदे को पूरा करने का काम किया है।

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खेती को आधुनिक और लाभप्रद बनाने के लिए सरकार केवल खरीदी तक सीमित नहीं रही है। उर्वरक प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य ने अपनी योजनाबद्ध रणनीति से यूरिया और डीएपी जैसे खादों की उपलब्धता सुनिश्चित की है। साथ ही, सौर सुजला योजना और धान-धान्य कृषि योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर जैसे कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में भी किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली बिचौलियों के खात्मे और अवैध धान परिवहन पर रोक लगाने में बेहद कारगर साबित हुई है। उच्च स्तर से सीधी निगरानी और शून्य भ्रष्टाचार की नीति ने राज्य को कृषि क्षेत्र में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है। यह सफलता दर्शाती है कि यदि नीतियां स्पष्ट हों और क्रियान्वयन पारदर्शी, तो खेती को वास्तव में एक फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

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