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करगिल की कहानी, जनरल की जुबानी : पूर्व आर्मी चीफ ने बताया कैसे पाकिस्तानी घुसपैठ का चला पता


द्रास (लद्दाख):

लद्दाख में करगिल की पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के घुसपैठियों को मार भगाने के 25 साल पूरे हो रहे हैं. पाकिस्तानी सेना पर भारत की इस जीत को हर साल 26 जुलाई के दिन करगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है. करगिल युद्ध (Kargil War Diwas)में भारतीय सेना (Indian Army) के 543 जवान शहीद हुए थे. करीब 1300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे. करगिल युद्ध के 25 साल पूरे होने के मौके पर 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करगिल के द्रास पहुंच रहे हैं. पीएम मोदी करगिल युद्ध स्मारक पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे. 

करगिल युद्ध के 25 साल पूरे होने पर The Hindkeshariखास सीरीज ‘वतन के रखवाले’ चला रहा है. आज की सीरीज में हमने करगिल युद्ध के समय थलसेना अध्यक्ष रहे जनरल वीपी मलिक और उनके बेटे मेजर जनरल सचिन मलिक से खास बातचीत की है. सचिन मलिक 8 माउंटेन डिवीज़न के GOC हैं. इन्हीं की देखरेख में 26 जुलाई को द्रास में खास प्रोग्राम होने वाला है, जिसमें पीएम मोदी शिरकत करेंगे.

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नॉर्थ ईस्ट से कैसे द्रास आया 8 माउंटेन डिवीज़न?
करगिल युद्ध 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चला था. जनरल वीपी मलिक उस समय इस युद्ध को लीड कर रहे थे. जनरल वीपी मलिक ने बताया, “मेरी ही कोशिशों से 8 माउंटेन डिवीज़न घाटी से द्रास लाया गया है. जब हमें मालूम पड़ा कि ये जिहादी वाला मामला नहीं है, बल्कि घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी आर्मी हैं… तब मैंने ही 8 माउंटेन डिवीज़न को घाटी से द्रास लाने का ऑर्डर दिया था.” 

जनरल वीपी मलिक बताते हैं, “ये और बात है कि 8 माउंटेन डिवीजन 35 साल पहले मैंने कमांड किया था. जब मैंने कमांड किया था, तब ये डिवीजन नॉर्थ ईस्ट के राज्य नगालैंड की राजधानी कोहिमा में था. तब भी मैं ही इसे कोहिमा से कश्मीर घाटी में लेकर आया था. आज मेरी जगह मेरा बेटा मेजर जनरल सचिन मलिक इसे लीड कर रहे हैं. ये देखकर मुझे बहुत फक्र महसूस होता है.” मेजर जनरल सचिन मलिक ने बताया, “8 माउंटेन डिवीजन इंडियन आर्मी की फ्रंटलाइन डिवीजन है. इसे लीड करना बड़े गौरव की बात है.”

इनपुट देने में इंटेलिजेंस आर्मी रही फेल
जनरल वीपी मलिक (रिटायर्ड) ने बताया कि जंग आसान नहीं थी. उन्होंने बताया, “करगिल युद्ध को लेकर इनपुट देने में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसी नाकाम रही थी. युद्ध की शुरुआत में सरकार के सामने स्थिति साफ ही नहीं थी. ये घुसपैठिए कौन हैं, इसकी जानकारी नहीं थी. सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठियों की लोकेशन के बारे में कोई इनपुट नहीं था.”

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जनरल वीपी मलिक  ने बताया, “16 मई को मुझे बताया कि घुसपैठ करने वाले कोई चरवाहे नहीं थे, बल्कि ये पाकिस्तानी आर्मी थी. सभी ने यही बताया कि ये घुसपैठिये हैं. वैसे घुसपैठिये तो कश्मीर में 1989-90 से आ रहे हैं. इसलिए शुरुआत में पाकिस्तानी आर्मी को घुसपैठिये समझा गया था. एजेंसियों ने बड़े कॉन्फिडेंस के साथ बताया था कि मैं फिक्र न करूं, ये चीफ के लेवल की बात नहीं है. ये नीचे लेवल पर ही क्लियर कर दिया जाएगा. लेकिन ऐसा था नहीं. चीजें जैसी दिख रही थीं, जैसी समझी जा रही थीं… वैसा बिल्कुल नहीं था.”

15 कोर कमांडर ने दिया ओवर कॉन्फिडेंस
जनरल मलिक बताते हैं, “उस समय हमारे रक्षा मंत्री भी आए थे. उस समय रक्षा मंत्री के सामने 15 कोर कमांडर ने कहा कि फिक्र की बात नहीं है. घुसपैठियों को निचले लेवल से ही खदेड़ दिया जाएगा. लेकिन जिस तरीके से यहां पर घुसपैठिये डटे रहे, उससे मुझे शक हुआ कि कुछ बड़ा मामला है. क्योंकि इन्हें आर्टिलरी सपोर्ट (हथियारों की मदद) मिलने लगी थी. एक-दो हेलिकॉप्टर भी नजर आए थे. तब मैंने तय किया कि हमें रूल्स ऑफ इंगेजमेंट बदलने की जरूरत है, क्योंकि ये सिर्फ घुसपैठियों की बात नहीं है.”

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मलिक बताते हैं, “हमने फ्रंट एज भी चेक किया. कोई 150-160 किलोमीटर की फ्रंट एज थी. तब चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी में मैंने अपने दोनों साथियों एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपनिस और उन दिनों एडमिरल सुशील कुमार से चर्चा की. हमने पूरे मामले को डिटेल में रिव्यू किया. हमने तय किया कि हम तीनों को मिलकर एक मिलिट्री स्टैटजी बनानी पड़ेगी.”

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जनरल वीपी मलिक के मुताबिक, ये मीटिंग 21-22 मई 1999 को हुई. 23 मई को कैबिनेट कमिटी फॉर सिक्योरिटी (CCS) को पूरा प्लान बताया गया. उन्हें हालात से वाकिफ कराया गया. हमने CCS को बताया कि इस ऑपरेशन का नाम Operation Vijay रखा गया है. मतलब आखिर में विजय हमारी ही होनी है. ऐसा हुआ भी.”

ऑपरेशन विजय में आर्मी के साथ ऐसे शामिल हुई नेवी और एयरफोर्स
मलिक कहते हैं, “CCS को घुसपैठ की जानकारी तो थी. लेकिन सबको पॉलिटिकल के ऊपर कुछ पता नहीं चल पा रहा था. क्योंकि 3 महीने पहले हमारे प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने लाहौर डिक्लरेशन (लाहौर समझौता) साइन किया था. 15 जून तक पीएम को शक था कि ये पाकिस्तान आर्मी है या घुसपैठ करने वाले चरवाहे. मुझे पूरा यकीन था कि हमें पूरी तैयारी करनी पड़ेगी. CCS की मीटिंग में मैंने मांग रखी थी कि ऑपरेशन विजय में इंडियन आर्मी के साथ इंडियन नेवी और इंडियन एयरफोर्स भी काम करेगी. इसलिए करगिल के लिए एयरफोर्स ने ‘सफेद सागर’ ऑपरेशन शुरू किया. नेवी ने ‘ऑपरेशन तलवार’ शुरू किया. बाकी फौज ने मोर्चा संभाल रखा था.”

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मुशर्रफ अच्छे फौजी, लेकिन खराब कमांडर 
इस दौरान जनरल (रिटायर्ड) वीपी मलिक ने तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्फ अच्छे फौजी थे, लेकिन वो खराब कमांडर साबित हुए. लोअर लेवल पर वो बेशक अच्छे कमांडो थे. बहादुर थे. लेकिन बड़े लेवल पर उन्हें स्ट्रैटजी नहीं आती थी. स्ट्रैटजी में वो फेल हो गए. उन्होंने सोचा नहीं कि दुश्मन क्या करेगा? किस तरीके से लड़ेगा?”

अग्निवीर स्कीम में सुधार करने की ज़रूरत
वीपी मलिक ने बताया कि ‘अग्निवीर’ और ‘अग्निपथ स्कीम’ पैसा बचाने के लिए लाया गया है. पेंशन के लिए ज्यादा खर्च न हो, इसके लिए ये स्कीम लाई गई. अभी भी इस साल डिफेंस बजट में कुछ खास फर्क नहीं आया है. मुझे लगता है कि इस स्कीम में सुधार की जरूरत है. अग्निवीरों को सेवा बढ़ाने का सुझाव संभव है.

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26 जुलाई को लेकर कैसी हैं तैयारियां?
26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्रास दौरे को लेकर क्या तैयारियां हैं? इसके जवाब में मेजर जनरल सचिन मलिक ने बताया, “करगिल युद्ध के सिल्वर जुबली है. हमने प्रोग्राम में उन लोगों को आमंत्रित किया है, जिन्होंने जंग लड़ी थी. जिन्हें वीरता पुरस्कार मिला है. सबसे अहम बात ये है कि जंग में शहीद हुए जवानों के परिवार के सदस्यों को भी कार्यक्रम में बुलाया गया है. सारा कार्यक्रम उन लोगों के लिए किया जा रहा है. अगले दो दिन अलग-अलग इवेंट्स होंगे.”

फौज में आने वालों के लिए क्या है मैसेज?
फौज में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं के लिए क्या मैसेज है? इसके जवाब में मेजर जनरल सचिन मलिक बताते हैं, “करगिल युद्ध को 25 साल गुजर चुके हैं. इस जंग में शहीद हुए जवानों को भारतीय सेना कभी नहीं भूलेगी. आज भी ये लोग भारतीय सेना के परिवार का हिस्सा हैं और रहेंगे. फौज में जो युवा आना चाहते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि ये आर्मी तो है ही, लेकिन उससे पहले एक बड़ा परिवार है.”

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