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सुप्रीम कोर्ट की अपील पर डॉक्टर क्या काम पर लौटेंगे? जानिए, इनके संगठनों ने क्या कहा?

Doctor Rape Murder Case : सुप्रीम कोर्ट की डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील के बावजूद देश के प्रदर्शनकारी डॉक्टर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. डॉक्टरों के निकायों में से एक ऑल इंडिया रेजिडेंट्स एंड जूनियर डॉक्टर्स ज्वाइंट एक्शन फोरम ने कहा है कि अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भले ही नेक इरादे से दिया गया हो, लेकिन यह हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को प्रभावित करने वाली मूल समस्याओं का समाधान नहीं करता है. वास्तविक मुद्दा है कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को दशकों से उपेक्षित रखा गया है. अस्पतालों में सुरक्षा के लिए सीजेआई का आह्वान तत्काल संकट की प्रतिक्रिया है, लेकिन यह स्थायी और व्यवहार्य समाधान नहीं हो सकता है.

क्या चाहते हैं डॉक्टर?

संगठन ने “सिस्टम में व्यापक बदलाव” का आह्वान करते हुए कहा, “जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक हम आंदोलन जारी रखेंगे… हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक कि कोलकाता में डॉक्टर के रेप और मर्डर केस के वास्तविक दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता है, और हमारी स्वास्थ्य सेवा को प्रभावित करने वाले मुद्दों को दूर नहीं किया जाता है.” आरजी कर मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे फिलहाल एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि हमारा काम बंद करना, तब तक दृढ़ता से जारी रहेगा जब तक कि सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला नहीं सुना देता. यह सिर्फ एक विरोध नहीं है; यह हमारे देश में हर चिकित्सा पेशेवर की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के लिए एक स्टैंड है.’ वहीं FORDA (फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) ने कहा कि वह पहले ही 35 रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चुका है. अब अपनी प्रतिक्रिया के लिए रेजिडेंट डॉक्टरों से परामर्श करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के रेप और मर्डर के मामले में सुनवाई की. इस दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों से जल्द काम पर लौटने की अपील की थी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा,” चूंकि ये अदालत अपने कार्यस्थल पर सभी चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा और उनके संरक्षण से संबंधित मामले पर विचार कर रही है. यह एक राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है. हम उन सभी डॉक्टरों से अनुरोध करेंगे कि वह जल्द से जल्द अपने काम पर वापस लौटें.”

कोलकाता मर्डर केस पर

जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों और पेशेवरों को भरोसा है कि उनकी चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से ध्यान दिया जा रहा है. पीठ ने कहा कि वकीलों द्वारा चिकित्सा समुदाय की चिंताओं को उनके समक्ष रखा गया है और उनके काम से दूर रहने के कारण समाज पर काफी असर पड़ रहा है, जिसे चिकित्सा की सबसे अधिक जरूरत है. पीठ ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को भयावह बताया. उन्होंने देश भर में डॉक्टरों की सुरक्षा के मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया है.

सीबीआई को क्या कहा?

कोलकाता रेप-मर्डर केस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, “हम यहां मौजूद सभी डॉक्टरों से यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी सुरक्षा और संरक्षण, राष्ट्रीय चिंता का विषय है. हमें लगता है कि यह अब किसी विशेष अपराध का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा मामला है जो पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा संस्थान को प्रभावित करता है.” सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “हम इस बात से बेहद चिंतित हैं कि देश भर में खासकर सरकारी अस्पतालों में युवा डॉक्टरों की सुरक्षा का अभाव है.” सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से दो दिनों के भीतर कोलकाता रेप-मर्डर मामले और राज्य सरकार से अस्पताल परिसर के अंदर हुई तोड़फोड़ की घटना के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.

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