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हरियाणा : तोशाम में भाई Vs बहन का मुकाबला, एक्सपर्ट से समझें दोनों उम्मीदवारों का प्लस-माइनस पॉइंट


चंडीगढ़:

हरियाणा में आम आदमी पार्टी (AAP) अकेले 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने सोमवार को 20 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. कांग्रेस अब तक दो लिस्ट में 41 कैंडिडेट घोषित कर चुकी है. जबकि BJP ने 67 उम्मीदवार उतारे हैं. AAP की 20 उम्मीदवारों की लिस्ट से साफ हो गया कि अब वह इस चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन की गुंजाइश नहीं बची है. वहीं, उन 11 सीटों पर भी कैंडिडेट खड़े किए हैं, जहां कांग्रेस पहले ही प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है. वहीं, हरियाणा के भिवानी जिला के चार हलकों में सबसे हॉट सीट तोशाम की बात करें, तो यहां बंसीलाल के पोते और पोती के बीच टक्कर देखने को मिलेगी.

कांग्रेस ने क्रिकेट प्रशासक से नेता बने अनिरुद्ध चौधरी को टिकट दिया है. जबकि BJP से उनका मुकाबला अपनी बहन श्रुति चौधरी से है. श्रुति चौधरी बंसीलाल के छोटे बेटे दिवंगत सुरेंद्र सिंह और BJP नेता किरण चौधरी की बेटी हैं. अनिरुद्ध चौधरी, रणबीर सिंह महेंद्र के बेटे हैं. महेंद्र, बंसीलाल के बड़े बेटे हैं.

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जाट बहुल तोशाम में बंसीलाल परिवार का रहा है दबदबा
तोशाम सीट जाट बहुल सीट है. यहां पूर्व सीएम बंसीलाल के परिवार का दबदबा रहा है. हरियाणा बनने के बाद इस सीट पर 14 बार चुनाव हुए. 12 बार बंसीलाल परिवार ने जीत दर्ज की. बंशीलाल, बेटे सुरेंद्र सिंह, बहू किरण चौधरी विधायक और मंत्री बने. 2005 में हेलीकॉप्टर हादसे में सुरेंद्र सिंह का निधन हो गया. 2005 के उपचुनाव में किरण चौधरी इस सीट से विधायक बनीं.

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तोशाम विधानसभा सीट चौधरी बंसीलाल की परंपरागत सीट मानी जाती है. बंसीलाल इस सीट से 7 बार चुनाव लड़े, जिसमें से 6 बार विधायक बनने में सफल रहे. 

किरण चौधरी 2005 से लगातार रहीं विधायक
2005 से किरण चौधरी लगातार विधायक रही हैं. अब BJP भी इसमें शामिल हो गई हैं. इस बार किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी को टिकट मिला है. कांग्रेस से उनके खिलाफ उनके ही भाई अनिरुद्ध चौधरी को उतारा है. वहीं, भाई बनाम बहन के बीच बिछी सियासी बिसात पर BJP से टिकट नहीं मिलने के चलते पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने निर्दलीय ताल ठोक दी है, जिससे तोशाम सीट का मुकाबला काफी रोचक बन गया है.

क्या है श्रुति चौधरी का कमजोर और मजबूत पक्ष
वरिष्ठ पत्रकार बलवंत तक्षक बताते हैं, “तोशाम विधानसभा सीट पर BJP प्रत्याशी श्रुति चौधरी का मजबूत पक्ष यह है कि उनकी मां किरण चौधरी और पिता सुरेंद्र सिंह तीन-तीन बार विधायक रह चुके हैं. श्रुति चौधरी खुद भी 2009 में सांसद रही हैं. BJP से चुनावी मैदान में उतरने से गैर-जाट वोटों का झुकाव उनकी तरफ हो सकता है.” बलवंत तक्षक के मुताबिक, हालांकि बंसीलाल के वोटर्स और जाट वोटर्स को साधना बड़ी चुनौती होगी. दूसरी ओर, BJP के पूर्व विधायक शशि रंजन परमार निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने से भी BJP का वोट बंटना तय माना जा रहा है. 

अनिरुद्ध चौधरी का कमजोर और मजबूत पक्ष
अमर उजाला हरियाणा यूनिट के संपादक विजय गुप्ता कहते हैं, “तोशाम सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अनिरुद्ध चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के इकलौते पोते होने के साथ पूर्व विधायक रणबीर महेंद्रा के बेटे हैं. लिहाजा बंसीलाल का परंपरागत वोट उनके खाते में जा सकता है.” उन्होंने कहा, “दूसरी ओर अनिरुद्ध पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे है. ऐसे में तोशाम को वोटर्स को साधना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.”

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आप और कांग्रेस का गठबंधन नहीं होने पर क्या बोले एक्सपर्ट?
अमर उजाला हरियाणा यूनिट के संपादक विजय गुप्ता बताते हैं, “हरियाणा में जो कांग्रेस और AAP का गठबंधन होने जा रहा था. इसमें कई बार अनिश्चितता की स्थिति देखी गई. दोनों ही पार्टियों के प्रदेश स्तर के नेता कहीं न कहीं गठबंधन चाहते ही नहीं थे. रीजनल लेवल पर दोनों पार्टियां अकेले-अकेले लड़ना चाह रही थी. कांग्रेस की बात करें, तो पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा या रणवीर सुरजेवाला हो… ये दोनों AAP के साथ गठबंधन के सख्त खिलाफ थे. दोनों नेताओं ने साफ तौर पर कई दफा कहा कि वो 90 में से 90 सीटों पर लड़ना चाहते हैं. AAP भी ऐसी ही सोच रखती थी.”

वरिष्ठ पत्रकार बलवंत तक्षक बताते हैं, “उम्मीदवार उतारकर आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. हरियाणा में AAP ने इससे पहले भी अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल पाई. इस बार लोकसभा चुनाव में हरियाणा के कुरुक्षेत्र सीट पर AAP ने चुनाव लड़ा, लेकिन उसके कैंडिडेट अपनी जमानत भी बचा नहीं पाए. अगर अभी भी हरियाणा में कांग्रेस-AAP का गठबंधन होता भी है, तो एक और एक 11 की कहावत चरितार्थ होगी. यानी 10 नंबर कांग्रेस के और 1 नंबर AAP का.”

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