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नीट-यूजी को दोबारा परीक्षा लेने के लिए पर्यवेक्षक इंतजार करते रहे, परीक्षा देने वाले ही नहीं आए


चंडीगढ़:

पर्यवेक्षक इंतजार कर रहे थे, पुलिस कर्मी मौके पर थे और मेटल स्कैनर लगे हुए थे, लेकिन जिन दो छात्रों को चंडीगढ़ के एक परीक्षा केंद्र पर एनईईटी-यूजी की दोबारा परीक्षा देनी थी, वे नहीं आए. चंडीगढ़ के सेक्टर 44 में सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल 1,563 उम्मीदवारों की पुन: परीक्षा के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा चुने गए सात केंद्रों में से एक है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इन उम्मीदवारों को 5 मई को आयोजित परीक्षा में कम समय मिलने और उत्तरों के संशोधन के लिए ग्रेस मार्क्स दिए गए थे. परीक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद के बीच ग्रेस मार्क्स रद्द कर दिए गए थे, लेकिन अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया गया.

बाद में गेट बंद कर दिया

The Hindkeshariने आज सुबह चंडीगढ़ केंद्र का दौरा किया और पाया कि पुलिसकर्मी और शिक्षक दोनों परीक्षार्थियों का इंतजार कर रहे थे. गेट पर दो सुरक्षाकर्मी मेटल स्कैनर के साथ थे. एक पर्यवेक्षक ने कहा, “परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होगी और दोपहर 1.30 बजे गेट बंद कर दिया जाएगा. हम छात्रों का इंतजार कर रहे हैं और सभी तैयारियां कर ली गईं हैं.” जब छात्र नहीं आए तो नियमानुसार परीक्षा केंद्र का गेट बंद कर दिया गया.

काफी विरोध हुआ

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) देश भर के कॉलेजों में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक अखिल भारतीय परीक्षा है. 5 मई को 24 लाख छात्रों द्वारा दी गई परीक्षा, 4 जून को परिणाम घोषित होने के बाद सवालों के घेरे में आ गई. कुल 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक हासिल किए और कट-ऑफ इतनी ऊंची हो गई कि अच्छे अंक लाने वालों को भी किसी कॉलेज में एडमिशन मिलने को लेकर संशय था. 

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हो रही कार्रवाई

अनियमितताओं के आरोपों के कारण नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. बिहार में पेपर लीक मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उनमें से एक छात्र ने पुलिस को बताया कि उसे परीक्षा से एक रात पहले प्रश्न मिल गए थे. शुरुआत में पेपर लीक से इनकार करने वाली सरकार ने अब मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. एनटीए के महानिदेशक को बर्खास्त कर दिया गया है. विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि परीक्षा को लेकर हुए कुप्रबंधन ने लाखों छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है.



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