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किन बातों से तय होगी नरेंद्र मोदी की तीसरी कैबिनेट, बीजेपी ने की है यह कोशिश

नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार के मंत्रिमंडल का आकार करीब-करीब फाइनल हो गया है.मोदी पहली बार एक ऐसी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं,जिसमें अकेले बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है.ऐसे में मंत्रिमंडल गठन में बीजेपी सहयोगी पार्टियों का विशेष ख्याल रख रही है. एनडीए के घटकों को खुश करने के अलावा बीजेपी क्षेत्रिय संतुलन साधने के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को जगह देने की कोशिश करते हुए भी दिखना चाहती है. 

नरेंद्र मोदी आज शाम सवा सात बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे.राष्ट्रपति भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले बीजेपी मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप में देने में लगी हुई है. इस बीच कुछ ऐसे नाम सामने आएं हैं, जिनको शपथ ग्रहण के लिए टेलीफोन गया है. वहीं बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे भी भी हैं, जिनका मंत्री बनाया जाना करीब-करीब तय माना जा रहा है.ये लोग नरेंद्र मोदी की पिछली दो सरकारों में भी मंत्री रहे हैं. 

किन नेताओं के पास आया है फोन

जिन लोगों ने शपथ ग्रहण के लिए टेलीफोन आने की पुष्टि की है, उनमें टीडीपी के राम मोहन नायडू, जेडीयू के ललन सिंह और रामनाथ ठाकुर,जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी, एलजेपी के चिराग पासवान,हम के जीतनराम मांझी,आरएलडी के जयंत चौधरी,अपना दल की अनुप्रिया पटेल, एजेएसयू के सुदेश महतो. 

इनके अलावा बिहार से राजीव प्रताप रूडी (बीजेपी),संजय जायसवाल (बीजेपी), नित्यानंद राय (बीजेपी), सुनील कुमार (जदयू), कौशलेंद्र कुमार (जदयू), रामनाथ ठाकुर (जदयू), संजय झा (जदयू), उत्तर प्रदेश से राजनाथ सिंह (बीजेपी), जितिन प्रसाद (बीजेपी).कर्नाटक से प्रह्लाद जोशी (बीजेपी), बसवराज बोम्मई (बीजेपी), गोविंद करजोल (बीजेपी), पीसी मोहन (बीजेपी), एचडी कुमारस्वामी (जेडीएस). महाराष्ट्र    से प्रतापराव जाधव(बीजेपी), नितिन गडकरी (बीजेपी), पीयूष गोयल (बीजेपी). मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया (बीजेपी), शिवराज सिंह चौहान (बीजेपी). तेलंगाना से किशन रेड्डी (बीजेपी),एटाला राजेंदर (बीजेपी), डीके अरुणा (बीजेपी), डी अरविंद (बीजेपी), बंडी संजय (बीजेपी). ओडिशा से बीजेपी के धर्मेंद्र प्रधान और मनमोहन सामल, राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत (बीजेपी), दुष्यंत सिंह (बीजेपी),
वहीं केरल से बीजेपी के पहले सांसद केरल सुरेश गोपी. बंगाल से शांतुनु ठाकुर (बीजेपी), आंध्र प्रदेश से बीजेपी की दग्गुबती पुरंदेश्वरी. जम्मू    से बीजेपी जीतेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों से बीजेपी के सर्बानंद सोनोवाल, बिजुली कलिता मेधी, किरेन रिजिजू और बिप्लब देव के नाम चर्चा में हैं.

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किन वरिष्ठ नेताओं को मिलेगी जगह?

दरअसल बीजेपी ने इन नामों के जरिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. वहीं राजनाथ सिंह, अमित शाह, पीयूष गोयल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नितिन गडकरी, अश्वनि वैष्णव, डॉक्टर एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण जैसे नाम भी हैं, जो मोदी की पहली दो सरकारों में भी मंत्री रहे हैं. लेकिन इनके मंत्रालयों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. यह भी तय है कि  कैबिनेट समिति में शामिल चारों मंत्रालय गृह, रक्षा, वित्त और विदेश बीजेपी अपने ही पास रखेगी. ये मंत्रालय इन लोगों में से ही संभालेंगे. 

कैसे खुश होंगे बीजेपी के सहयोगी दल?

नरेंद्र मोदी पहली बार गठबंधन की ऐसी सरकार का नेतृत्व करने जा रहे हैं, जिसमें उनकी पार्टी का बहुमत नहीं है. इस बार एनडीए में बीजेपी के 240 सदस्यों के अलावा टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सदस्य शामिल हैं. ऐसे में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने सहयोगी दलों को खुश रखने की भी चुनौती है. इससे इन दोनों दलों को अच्छी संख्या में मंत्रालय मिलने की संभावना है. मोदी की पिछली सरकार में जेडीयू शामिल नहीं हुआ था. वो जीतने मंत्रालय मांग रहा था, बीजेपी ने उतने देने से इनकार कर दिए थे. उस सरकार में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत था, इसलिए ऐसा संभव हो पाया.लेकिन इस बार शायद ऐसा न होने पाए.वहीं बिहार से सबसे अधिक मंत्री भी बनाए जा सकते हैं, क्योंकि वहां दो तरह की चुनौती है, एक तो जेडीयू और लोजपा (आर) के खुश रखना और दूसरा राज्य में अपना आधार बढाने के लिए अपने नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देना, क्योंकि बिहार में बड़ी पार्टी होने के बाद भी बीजेपी जेडीयू की जूनियर पार्टी है.बीजेपी वहां अपने दम पर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. यही हाल आंध्र प्रदेश का है, जहां बीजेपी कभी सफल नहीं हो पाई.दक्षिण के इस राज्य में सफल होने के लिए बीजेपी दूसरे दलों पर निर्भर है. ऐसे में आंध्र प्रदेश में से भी अधिक सदस्य मंत्रिमंडल में दिख सकते हैं.

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बीजेपी की दक्षिण भारत पर नजर

दक्षिण भारत के कर्नाटक और तेलंगाना को छोड़कर किसी दूसरे राज्य में बीजेपी की उल्लेखनीय मौजदूगी नहीं है. बीजेपी ने इस साल के चुनाव में केरल में एक सीट जीती है.वामपंथ और कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी की यह पहली जीत है. वहीं तमिलनाडु में बीजेपी ने अपना वोट शेयर बढ़ाया है. इसे देखते हुए बीजेपी ने नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में दक्षिण के राज्यों को अधिक प्रतिनिधिनत्व दे सकती है. बीजेपी बहुत समय से दक्षिण भारत में पैर पसारने की कोशिश कर रही है. लेकिन उसे अधिक सफलता नहीं मिली है, जैसा कि उसे उत्तर भारत के राज्यों में मिलती रहती है.

इसके अलावा बीजेपी ने मंत्रिमंडल में क्षेत्रिय संतुलन और अपने छोटे-छोटे सहयोगियों को भी साधने की कोशिश की है.इसी के तहत हर सहयोगी दल के सदस्यों को मंत्रिमंडल में जगह देने की चर्चा है. यह स्पष्ट बहुमत न होने का ही दबाव है कि बीजेपी इस बार चिराग पासवान और जीतनराम मांझी को भी मंत्री बनाने जा रही है. इससे पहले 2019 के चुनाव में चिराग पासवान की लोजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन उनके पिता जी के निधन के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. बाद में पार्टी में टूट होने के बाद उनके चाचा को केंद्रीय मंत्री बनाया गया था. इसी तरह से पहली बार सांसद बने माझी भी मंत्री बनाए जा सकते हैं. वह अपनी पार्टी के अकेले सदस्य हैं. 

बिहार की राजधानी पटना में एनडीए की सरकार का जश्न मनाते लोग.

बिहार की राजधानी पटना में एनडीए की सरकार का जश्न मनाते लोग.

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पूर्वोत्तर की कितनी मिलेगी जगह?

इसी तरह से बीजेपी पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल के नेताओं की भी मोदी मंत्रिमंडल में मौजूदगी दिख सकती है. बीजेपी पूर्वोत्तर के अपने वरिष्ठ नेताओं सर्वानंद सोनेवाल और विप्लब देव को मंत्री बनाया जा सकता है. ये दोनों नेता क्रमश: असम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वहीं अरुणाचल प्रदेश से आने वाले किरेन रिजिजू को भी मंत्री बनाया जा सकता है. वो पिछली सरकार में भी मंत्री थे. पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी पिछले काफी समय से अच्छा प्रदर्शन कर रही है.वहीं बीजेपी बंगाल में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की लगातार कोशिशें कर रही है, इस वजह से वहां के कुछ नेता मोदी मंत्रिमंडल में दिखाई देंगे.

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