देश

'प्रकृति से हम जो भी लेते हैं…', 'महाकुंभ' पर ' The Hindkeshariकॉन्‍क्‍लेव' में बोले शोभित कुमार मिश्रा


मुंबई:

दुनिया के सबसे बड़े आयोजन ‘महाकुंभ’ पर ‘ The Hindkeshariकॉन्‍क्‍लेव’ में सबसे बड़ी चर्चा हो रही है. इस चर्चा में देश के सबसे बड़े संत और अर्थशास्त्री एक साथ एक मंच पर महाकुंभ के आर्थिक पहलू और उसके असर पर विचार रख रहे हैं. इस दौरान ‘प्रकृति पर आस्‍था का महाकुंभ’ सेशन में  स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती (परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋ‍षिकेश के अध्‍यक्ष ), शोभित कुमार मिश्रा (अदाणी ग्रुप से स्‍वच्‍छ गंगा मिशन से फ्रेम वर्क के तहत प्रयागराज प्रोजेक्‍ट चला रहे हैं), प्रोफेसर बद्रीनारायण (सामाजिक इतिहासकार और जी.बी. में प्रोफेसर पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद) और ऋषि अग्रवाल (पर्यावरणविद् एवं निदेशक, मुंबई सस्टेनेबिलिटी सेंटर) शामिल हुए. प्रोफेसर बद्रीनारायण ने बताया कि इस बार कुंभ में ऐसी व्‍यवस्‍था की गई है कि प्रकृति भी बचे और परंपरा भी. वहीं, शोभित कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रकृति से हम जो भी लेते हैं, उसको हमें उसी रूप में वापस करना चाहिए.

राज्‍य, समाज और अध्‍यात्‍म मिलकर कर रहे काम- प्रोफेसर बद्रीनारायण

प्रकृति और मानव के संबंध को बताते हुए प्रोफेसर बद्रीनारायण ने बताया, ‘इस बार राज्‍य, समाज और अध्‍यात्‍म तीनों मिलकर गंगा और महाकुंभ की स्‍वच्‍छता, निर्मलता बचाए रखने के लिए जागरूक हैं और कोशिश कर रहे हैं. ये एक तरह से रिवर्सल है, क्‍योंकि भारतीय समाज शुरुआत से ही जब हमारी अपनी पारंपरिक डेमोक्रेसी थी, तो उसमें नदियों के साथ मानव का व्‍यवहार कैसा होगा इसके लिए राज्‍य भी सजक था और समाज भी सजक था. कौटिल्‍य के दौर में हमें यह देखने को मिला. इस दौरान हम प्रकृति से जितना लेते थे, उतना देते भी थे. नदियों में पहले नहाने के भी कुछ कनकहे नियम थे, जैसे नदी के पानी में कुल्‍ला नहीं करेंगे. साबुन से नदी में कपड़े नहीं धोएंगे. ऐसे ही आप देखेंगे कि गंगोत्री से कोलकाता तक चले जाइए, जहां-जहां दो नदियां मिलती हैं, वहां-वहां मेला लगता है. इन मेलों में सालों से करोड़ों लोग आ रहे हैं. ये सब लोग मिलकर अपनी संस्‍कृति और प्रकृति की रक्षा करते रहे हैं. लेकिन इस बीच जब आधुनिक या कहें एग्रेसिव डेमोक्रेसी आई, तो यह सर्कल बिगड़ गया. हालांकि, अब फिर वो दौर लौट रहा है. 

’45 करोड़ लोगों को समझाने की जरूरत नहीं…’

लोगों को कैसे समझाया जाए कि नदियों को स्‍वच्‍छ रखें? इस पर प्रोफेसर बद्रीनारायण ने कहते हैं, ‘महाकुंभ में जो 45 करोड़ लोग आने वाले हैं, उनमें से ज्‍यादातर के लिए गंगा पूजनीय है, वो इसे मां का दर्जा देते हैं. लेकिन इनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो गंदगी फैलाने के आदी हैं. हमें इन लोगों को समझाने की जरूरत है कि नदियों को गंदा न करें. मेला परिसर में गंद न फैलाएं. इसके लिए पुलिस और प्रशासन काम भी कर रही है. कैमरे लगाए गए हैं, लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है.’

यह भी पढ़ें :-  सबकुछ जल गया लेकिन मां गंगा पर कम नहीं हुआ विश्‍वास, जानिए महाकुंभ में लगी आग पर क्‍या बोले चश्‍मदीद

क्‍या है प्रोजेक्‍ट प्रयागराज 

प्रयागराज प्रोजेक्‍ट के बारे में बताते हुए शोभित कुमार मिश्रा ने कहा, ‘प्रकृति से हम जो भी लेते हैं, जैसे हवा, पानी और मिट्टी इसको हमें उसी रूप में वापस करना चाहिए. इसे हमें कनवर्ट करने का कोई अधिकार नहीं है. हमें अगली पीढ़ी को संसाधन उसी रूप में वापस करने हैं. ये हमारी जिम्‍मेदारी बनती है. हमने स्‍वच्‍छ गंगा मिशन से फ्रेम वर्क के तहत प्रयागराज प्रोजेक्‍ट साल 2019 में शुरू किया था और 2023 में इसे पूरा कर लिया. इसके 9 एसटीपी हैं. 6 का हमने रिहेबिलिटेशन किया है और 3 नए एसटीपी बनाए हैं. हमारी जो इंस्‍टोल्‍ड कैपेसिटी है, वो 326 एमएलडी है. 326 मिलियन लीटर पानी ट्रीट हो रहा हैं. ट्रीट होकर जो पानी निकल रहा है, वो पीने वाले जैसा ही है. हम सीवर पंपिंग स्‍टेशन आने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्‍लांट तक ले जाते हैं.’    

महाकुंभ की स्‍पेशल कवरेज के लिए यहां क्लिक करें…  

महाकुंभ में ‘आस्‍था की डुबकी पवित्र डुबकी’

शोभित कुमार मिश्रा ने बताया, ‘प्रोजेक्‍ट प्रयागराज के कारण आज गंगा में 90 प्रतिशत नालों का पानी जाना बंद हो गया है. इन नालों के पानी को ट्रीट यानी साफ करके गंगा में छोड़ा जा रहा है. अर्धकुंभ से महाकुंभ तक काफी अंतर आया है. ये लोगों को देखने को भी मिल रहा है. इससे लोगों के बीच संदेश जाएगा कि सरकार ने काम किया है. अब ये मानकर चलिए कि प्रयागराज में लगे महाकुंभ में ‘आस्‍था की डुबकी पवित्र डुबकी’ होगी हमारा ये प्रोजेक्‍ट 15 सालों तक चलता रहेगा.’  

महाकुंभ के अवसर पर हो नदियों के स्‍वास्‍थ्‍य पर हो चर्चा- ऋषि अग्रवाल

पर्यावरणविद् ऋषि अग्रवाल ने बताया, ‘देखिए, जब-जब कुंभ और महाकुंभ होता है, तो उस समय को हमें नदियों की स्थिति और स्‍वास्‍थ्‍य पर चर्चा करने के लिए भी इस्‍तेमाल करना चाहिए. नदियों को भारत में जितना ऊंचा दर्जा दिया जाता है, उतना शायद ही किसी देश में दिया जाता होगा. हम नदियों को पवित्र और पूजनीय मानते हैं, लेकिन इसके साथ ही विडंबना ये है कि सबसे ज्‍यादा प्रदूषित नदियां भी हिंदुस्‍तान में ही हैं. मुंबई में भी ओशी, दहिसर जैसी जो नदियां हैं, वो भी काफी प्रदूषित हैं. कुछ लोग तो इन्‍हें नदी मानते ही नहीं हैं, वे कहते हैं कि ये तो नाले हैं. हम अपनी नदियों में कचरा, प्‍लास्टिक की थैलियां और न जाने क्‍या-क्‍या डालते हैं. देशभर में सीवर ट्रीटमेंट की समस्‍या है. सभी के सीवर कहीं न कहीं जाकर नदियों में मिल रहे हैं. समय आ गया है, जब हमें नदियों के स्‍वास्‍थ्‍य को गंभीरता से लेना होगा.’

यह भी पढ़ें :-  Maha Kumbh 2025: कई सालों से हाथ ऊपर, एक पैर पर खड़े हैं साधु, आखिर कैसी है ये तपस्या

कॉन्‍क्‍लेव के दौरान स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती ने The Hindkeshariका नदियों के समस्‍याओं को उठाने के लिए धन्‍यवाद दिया. उन्‍होंने कहा, ‘प्रकृति बचेंगी, तो संस्‍कृति बचेगी और हमारी संतती बचेगी. कल्‍चर, नेचर और फ्यूचर… मुझे लगता है कि हमारा भविष्‍य हमारी प्रकृति पर निर्भर करता है. हम अपने नेचर को कैसे रखते हैं, इससे हमारा भविष्‍य तय होगा. हम जागने का समय आ गया है. हमें लोगों को ये बताना होगा कि जिस जल में हम स्‍नान करते हैं, उसे भी बचना होगा. पानी नहीं तो प्रयाग नहीं और पानी नहीं तो कुंभ नहीं. इसलिए मैं The Hindkeshariकी प्रशंसा करता हूं कि आपने मीडिया सोशल रिस्‍पॉन्सिबिटी को निभाया है.’
   
स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती ने बताया, ‘हम संगम में स्‍नान करने से पहले, संगम को स्‍नान कराएंगे और निषादराजों के साथ कराएंगे और स्‍वच्‍छता कर्मियों के साथ कराएंगे. स्‍नान करने से पहले हम संगम के तट को साफ करेंगे. हालांकि, हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मार्गदर्शन में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मेले के लिए बहुत काम किया है. ये मेला माहौल को बदलेगा, पूरे मुल्‍क को बदलेगा साथ ही ये मेला प्रयागराज की शक्‍ल को ही नहीं लोगों की अक्‍ल को भी बदल देगा. ये प्रयाग का प्रयोग सबको जोड़ने और सबको जुड़ने का काम करेगा. प्रयागराज में आने वाले लोगों को साधना और पूजा करने के साथ-साथ ये भी ध्‍यान रखना चाहिए कि पूजा और प्रदूषण दोनों साथ-साथ नहीं जाते हैं. गांदगी और बंदगी दोनों साथ-साथ नहीं होते हैं.’

हम संगम में स्‍नान करने से पहले, संगम को स्‍नान कराएंगे- स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती

कॉन्‍क्‍लेव के दौरान स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती ने The Hindkeshariका नदियों के समस्‍याओं को उठाने के लिए धन्‍यवाद दिया. उन्‍होंने कहा, ‘प्रकृति बचेंगी, तो संस्‍कृति बचेगी और हमारी संतती बचेगी. कल्‍चर, नेचर और फ्यूचर… मुझे लगता है कि हमारा भविष्‍य हमारी प्रकृति पर निर्भर करता है. हम अपने नेचर को कैसे रखते हैं, इससे हमारा भविष्‍य तय होगा. हम जागने का समय आ गया है. हमें लोगों को ये बताना होगा कि जिस जल में हम स्‍नान करते हैं, उसे भी बचना होगा. पानी नहीं तो प्रयाग नहीं और पानी नहीं तो कुंभ नहीं. इसलिए मैं The Hindkeshariकी प्रशंसा करता हूं कि आपने मीडिया सोशल रिस्‍पॉन्सिबिटी को निभाया है.’

Latest and Breaking News on NDTV

   
स्‍वामी चिदानंद सरस्‍वती ने बताया, ‘हम संगम में स्‍नान करने से पहले, संगम को स्‍नान कराएंगे और निषादराजों के साथ कराएंगे और स्‍वच्‍छता कर्मियों के साथ कराएंगे. स्‍नान करने से पहले हम संगम के तट को साफ करेंगे. हालांकि, हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मार्गदर्शन में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मेले के लिए बहुत काम किया है. ये मेला माहौल को बदलेगा, पूरे मुल्‍क को बदलेगा साथ ही ये मेला प्रयागराज की शक्‍ल को ही नहीं लोगों की अक्‍ल को भी बदल देगा. ये प्रयाग का प्रयोग सबको जोड़ने और सबको जुड़ने का काम करेगा. प्रयागराज में आने वाले लोगों को साधना और पूजा करने के साथ-साथ ये भी ध्‍यान रखना चाहिए कि पूजा और प्रदूषण दोनों साथ-साथ नहीं जाते हैं. गांदगी और बंदगी दोनों साथ-साथ नहीं होते हैं.’

यह भी पढ़ें :-  'आतंक का परिणाम विनाशकारी होता है': UNGA में विदेश मंत्री एस जयशंकर की पाकिस्तान को खरी-खरी

मानवता की अमूर्त विरासत के रूप में प्रसिद्ध सनातन संस्कृति के सबसे बड़े मानव समागम महाकुंभ 2025 को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों में जिज्ञासा है. इस बार महाकुंभ की भव्‍य तैयारियां की गई हैं. प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान 45 दिन में 45 करोड़ श्रद्धालु, 7500 करोड़ रुपये का बजट, 4000 हेक्‍टेयर में मेला क्षेत्र, 13 हजार ट्रेने, 1.6 लाख से ज्‍यादा टेंट, 2700 आर्टिफिशियल (AI) तकनीक वाले कैमरे, कुंभ क्षेत्र में 488 किलोमीटर की सड़कें, 67 हजार एलईडी लाइट, 200 वाटर एटीएम का इंतजाम किया गया है. 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज की धरती पर महाकुंभ-2025 होने जा रहा है.


Show More

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button