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राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने किस देश के लिए दिया क्या संदेश, भारत के लिए क्या है मैसेज


नई दिल्ली:

डोनाल्ड़ ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है. शपथ लेने के बाद ट्रंप ने कई कार्यकारी आदेशों पर दस्तखत किए हैं. इसमें कैपिटल हिल हिंसा के दोषियों को माफी देने के साथ-साथ पेरिस जलवायु समझौते और डब्लूएचओ से बाहर होने और दक्षिण सीमा पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू करने जैसे आदेश शामिल हैं.ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद से पूर्ववर्ती जो बाइडेन प्रशासन के 78 फैसलों को पलट दिया है. आइए देखते हैं कि ट्रंप की ओर से जारी किए गए कार्यकारी आदेशों से दुनिया के 10 देशों के लिए क्या संदेश छिपा हुआ है. 

ब्रिक्स के लिए संदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ब्रिक्स ने डॉलर की जगह किसी और मुद्रा में कारोबार करने की सोची तो उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा. ट्रंप ने यह बात ओवल ऑफिस में की, जहां वो राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि उनके बयान को धमकी के रूप में न लिया जाए,बल्कि इसे इस मामले में हमारा साफ रुख माना जाए. 

एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

बीते साल रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संगठन के सदस्य देशों से अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार पर जोर दिया था. इसे ब्रिक्स की अपनी करेंसी बनाने की ओर पहले कदम के तौर पर देखा गया. जबकि इस समय पूरी दुनिया में इंटरमीडिएट करेंसी अमेरिकी डॉलर को माना जाता है. साल 2023 से ही उम्मीद जताई जा रही है कि ब्रिक्स अमेरिकी डॉलर के विकल्प के रूप में अपनी मुद्रा के चलन पर जोर देंगे.  ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका सदस्य हैं.अगर ट्रंप इस तरह का कोई कार्यकारी आदेश जारी करते हैं तो उसका असर इन देशों पर पड़ेगा.

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मैक्सिको सीमा पर इमरजेंसी

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर नेशनल इमरजेंसी कर दिया है. इसके साथ ही ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका में अवैध प्रवेश को तुरंत रोका जाएगा और सरकार लाखों अवैध प्रवासियों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगी.
ट्रंप ने इस सीमा पर अधिक सैनिकों और संसाधनों की तैनाती करने को भी कहा है. उन्होंने ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आश्वासन दिया है. 

पनामा नहर का क्या होगा

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पनामा नहर को चीन चला रहा है. ट्रंप ने कहा है कि हमने इसे चीन को नहीं दिया.हम इसे वापस लेंगे.ट्रंप ने पिछले साल पनामा से कहा था कि वो पनामा नहर की फीस कम करे या तो उस पर नियंत्रण अमेरिका को वापस कर दे.उन्होंने कहा था कि पनामा नहर चीन के लिए नहीं है. उन्होंने कहा था कि ये नहर गलत हाथों में चली गई है. पनामा के राष्ट्रपति ने ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नहर पर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से चीन का नियंत्रण नहीं है.

राष्ट्रपति पद के शपथ लेते डोनाल्ड ट्रंप. इसके बाद उन्होंने बाइडन प्रशासन के कई फैसलों को पलट दिया.

राष्ट्रपति पद के शपथ लेते डोनाल्ड ट्रंप. इसके बाद उन्होंने बाइडन प्रशासन के कई फैसलों को पलट दिया.

पनामा नहर का निर्माण 1900 के दशक के शुरू में हुआ था. अमेरिका का 1977 तक इस नहर पर नियंत्रण था.राष्ट्रपति जिमी कार्टर की मध्यस्थता में जमीन को वापस पनामा को सौंप दिया गया था. इसके बाद पनामा ने 1999 में इस पर नियंत्रण हासिल कर लिया.

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मध्य पूर्व में तनाव का क्या होगा

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि दुनिया में इन दिनों जारी युद्धों का क्या होगा. गाजा में पिछले करीब 15 महीने से चल रहे इजरायल-हमास युद्ध में रविवार को एक युद्धविराम समझौता लागू हुआ. कहा जा रहा है कि इस समझौतो को लागू करवाने में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी भूमिका निभाई थी.राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने तीन इजरायली बंधकों की रिहाई का जिक्र किया. उन्होंने कहा है कि वो मध्य पूर्व में शांति लाने वाले और सबको जोड़ने वाले नेता बनेंगे.

कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने कनाडा और मैक्सिको के उत्पादों पर 1 फरवरी से 25 फीसदी टैरिफ (उत्पाद शुल्क) लगाने की योजना बनाई है. उनका कहना था कि ये दोनों देश बहुत बड़ी संख्या में लोगों को आने की इजाजत दे रहे हैं.  उन्होंने अधिकारियों को अमेरिकी व्यापार नीतियों की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि वो सभी तरह के आयात पर यूनिवर्सल टैरिफ लगा सकते हैं, क्योंकि सभी देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं. 

डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर.

डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर.

क्यूबा, निकारागुआ, हैती और बेनेजुएला

राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने उस कार्यक्रम पर रोक लगा दी है कि क्यूबा, निकारागुआ, हैती और बेनेजुएला से प्रवासियों को अमेरिका आकर काम करने की इजाजत दी जाती थी. इन देशों के प्रवासियों को अमेरिका में दो साल काम करने की इजाजत दी जाती थी. इसके लिए जरूरी था कि उनका कोई नियोक्ता हो और उन्होंने सुरक्षा जांच को पूरा किया हो. इस कार्यक्रम को 2023 में शुरू किया गया था. इस कार्यक्रम के जरिए पांच लाख से अधिक प्रवासी काम करने के लिए अमेरिका आए हैं. 

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