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"क्या इसमें ग्रेस मार्क्स…?" लोकसभा सत्र से पहले किरेन रिजिजू और जयराम रमेश के बीच छिड़ी तीखी बहस


नई दिल्ली:

संसद के हंगामेदार सत्र की एक झलक देते हुए सोमवार सुबह सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के दो वरिष्ठ सांसदों के बीच नई लोकसभा की बैठक शुरू होने से कुछ घंटे पहले तीखी नोकझोंक दिखाई दी. 

संसदीय कार्य मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता किरेन रिजिजू ने आज सुबह 18वीं लोकसभा के सदस्यों के लिए एक्स पर एक वैलकम मैसेज लिखा था. उन्होंने लिखा, “18वीं लोकसभा का पहला सत्र आज, 24 जून, 2024 से शुरू हो रहा है. मैं सभी नवनिर्वाचित माननीय सदस्यों का स्वागत करता हूं. संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर मैं सदस्यों की सहायता के लिए हमेशा उपलब्ध रहूंगा. मैं सदन चलाने के लिए समन्वय की सकारात्मक उम्मीद कर रहा हूं.”

किरेन रिजिजू की इस पोस्ट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मंत्री की पोस्ट के जवाब में कहा, “श्रीमान मंत्री जी, कथनी से ज़्यादा करनी बोलती है. जो कहना है, उसे करके दिखाओ.”

इस पर किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए लिखा, कांग्रेस नेता “सदन के लिए एक संपत्ति हो सकते हैं यदि वो सकारात्मक योगदान देते हैं”. “बिल्कुल @जयराम_रमेश जी. आप एक बुद्धिमान सदस्य हैं और यदि आप सकारात्मक योगदान देते हैं तो आप सदन के लिए एक मूल्यवान संपत्ति होंगे. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने रहेंगे लेकिन हम राष्ट्र की सेवा में एकजुट हैं. भारत की समृद्ध संसदीय परंपराओं को बनाए रखने में आपके सहयोग की आशा है.”

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इसके बाद जयराम रमेश ने पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) पर कटाक्ष करते हुए कहा, “धन्यवाद मंत्री. मुझे उम्मीद है कि मेरी बुद्धिमत्ता का आपका प्रमाण पत्र NTA ग्रेडिंग जैसा नहीं होगा. क्या इसमें भी ग्रेस मार्क्स हैं?”

इस आम चुनाव में अपने अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित विपक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी को प्रमुख मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर ली है. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा NEET (UG और PG) और UGC-NET जैसी अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में कुप्रबंधन है. एक और मुद्दा जो प्रोटेम स्पीकर के चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का कारण बना है. बीजेपी ने अस्थायी पद के लिए अपने सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को चुना है, वहीं कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि उसके आठ बार के सांसद के सुरेश को क्यों नहीं चुना गया. इस पर रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि सदन में सुरेश का कार्यकाल निर्बाध नहीं है, लेकिन कांग्रेस झुकने को तैयार नहीं है और उसने घोषणा की है कि विपक्षी दल के सदस्य नए सांसदों को शपथ दिलाने में प्रोटेम स्पीकर की सहायता नहीं करेंगे.

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