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बैंक धोखाधड़ी मामला : यूपी के पूर्व विधायक और परिवार के सदस्यों की 72 करोड़ की संपत्ति जब्त

नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने एक धन शोधन जांच के हिस्से के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों की 72 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की है. ईडी कथित तौर पर 750 करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच कर रही है. संघीय एजेंसी ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश के लखनऊ, महाराजगंज और गोरखपुर जिलों में 27 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं.

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दिवंगत मंत्री और गोरखपुर के बाहुबली हरि शंकर तिवारी के बेटे विनय तिवारी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा की चिल्लूपार सीट का प्रतिनिधित्व किया था. हालांकि बाद में विनय तिवारी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे.

ईडी ने एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्तियां पूर्व विधायक विनय तिवारी, उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत हैं, जो आरोपी कंपनी ‘गंगोत्री एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के निदेशक, प्रवर्तक और गारंटर थे.

ईडी ने बताया कि अस्थायी रूप से जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 72.08 करोड़ रुपये है. ईडी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी पर जांच कर रही है.

ईडी ने आरोप लगाया कि ‘गंगोत्री एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ने अपने प्रवर्तकों, निदेशकों और गारंटरों की मिलीभगत से बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले सात बैंकों के समूह से धोखाधड़ी कर 1,129.44 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था. ईडी ने बताया कि उक्त ऋण का पुनर्भुगतान नहीं किया गया और ‘गंगोत्री एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ और उसके प्रवर्तकों, निदेशकों तथा गारंटरों ने बैंकिंग मानदंडों का उल्लंघन करते हुए बड़े पैमाने पर पैसों का गबन किया, जिससे बैंक को 754.24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

 

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