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दरबार तो लगा पर, बड़ा गमगीन बेनूर है… अखिलेश यादव का लोकसभा में कविताओं के जरिए सरकार पर तंज


नई दिल्ली:

सोमवार को संसद में जहां हंगामा देखने को मिला और राहुल गांधी लोकसभा में आक्रामक नजर आए, तो वहीं मंगलवार का दिन लोकसभा में काफी हल्का-पुल्का सा रहा. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) जब सदन में बोलने खड़े हुए तो उन्होंने बहुत ही शायराना अंदाज में अपनी कविताओं के जरिए सरकार पर वार किया. उन्होंने कविताएं बोलकर सरकार पर तंज कसा. 

“आवाम ने तोड़ दिया हुकूमत का गुरूर
दरबार तो लगा है पर, बड़ा गमगीन बेनूर है
क्यों ऊपर से जुड़ कोई तार नहीं
नीचे से कोई आधार नहीं
ऊपर से जो है अटकी हुई
यह कोई सरकार नहीं”

सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ बातें काल और समय से परे होती हैं. इसके साथ ही उन्होंने सदन में एक और शेर पढ़कर सुनाया. 

“जो तब सही था और अब और सही साबित हो रहा है
हजूर ए आला आज तक खामोश बैठे हैं, इसी गम में
महफिल लूट ले गया, कोई जबकि सजाई हमने”

अखिलेश यादव ने अयोध्या की जीत का जिक्र करते हुए इसे देश के परिपक्व मतदाता की जीत बचाया. उन्होंने कहा कि अयोध्या की जीत हमारी मर्यादा की जीत है. उन्होंने क्या कुछ कहा.

“होई वही जो राम रचि राखा
यह है उसका फैसला
जिसकी लाठी में नहीं होती आवाज
जो करते से किसी को लाने का दावा
वो हैं खुद किसी के सहारे के लाचार”

अखिलेश यादव ने जब सदन में शायराना अंदाज में सरकार पर तंज कसा तो इसका जवाब बीजेपी सांसद संतोष पांडेय ने उनको शायराना अंदाज में ही दिया.

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“जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा
आके बैठे हो फलसफे में 
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारी दौलत नई-नई है”


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