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RBI की मुद्रा प्रबंधन परियोजना के लिए ईआईएल, मेकॉन और चार अन्य कंपनियां दौड़ में


मुंबई:

देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की भविष्य की नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुद्रा प्रबंधन बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार की परियोजना के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) और मेकॉन के साथ-साथ चार निजी क्षेत्र की कंपनियां भी दौड़ में हैं. चार निजी कंपनियां- एक्सेंचर सॉल्यूशंस, कोलियर्स इंटरनेशनल (इंडिया) प्रॉपर्टी सर्विसेज, प्राइसवाटरहाउस कूपर्स और द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (इंडिया) हैं.

आरबीआई ने इससे पहले ‘भारत में मुद्रा प्रबंधन अवसंरचना के आधुनिकीकरण के लिए परामर्श और परियोजना प्रबंधन सेवाओं की खरीद’ के लिए रुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए थे. केंद्रीय बैंक को 11 कंपनियों से जवाब मिले थे. एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन करने के बाद आरबीआई ने कहा कि उसने प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी करने के लिए छह कंपनियों को सूचीबद्ध किया है.

ईओआई दस्तावेज के अनुसार, आरबीआई ने नए मुद्रा प्रबंधन केंद्रों के निर्माण, गोदाम स्वचालन की शुरुआत, सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों की स्थापना, एक भंडार प्रबंधन प्रणाली और एक केंद्रीकृत कमान केंद्र का प्रस्ताव रखा है. एनआईसी (चलन में मौजूद नोट) की वृद्धि दर में नरमी के बावजूद, निकट भविष्य में वृद्धि सकारात्मक बनी रहने की संभावना है. हालांकि, अगले दशक में इसकी गति धीमी रहने की उम्मीद है.

बैंक नोट चार प्रिंटिंग प्रेस में छापे जाते हैं, और सिक्के चार टकसालों में ढाले जाते हैं.

न‍ए बैंक नोट और सिक्के देश भर के 19 निर्गम कार्यालयों (आईओ) में प्राप्त होते हैं, जहां से उन्हें अनुसूचित बैंकों द्वारा संचालित लगभग 2,800 करेंसी चेस्ट (सीसी) में वितरित किया जाता है. आरबीआई ने ईओआई में कहा कि कई केंद्रीय बैंकों/मौद्रिक प्राधिकरणों को बैंक नोटों की छपाई, वितरण, प्राप्ति और प्रसंस्करण की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती लागत और उनसे जुड़े सुरक्षा जोखिमों के कारण मुद्रा प्रबंधन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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बैंक नोटों की बढ़ती मात्रा को संभालने के लिए, कुछ केंद्रीय बैंकों/मौद्रिक प्राधिकरणों ने अपनी मुद्रा प्रबंधन प्रक्रियाओं की उपयुक्त पुनः इंजीनियरिंग अपनाकर और बैंक नोटों के प्रबंधन के लिए अलग सुविधाएं स्थापित करके अपनी मुद्रा प्रबंधन अवसंरचना का सक्रिय रूप से आधुनिकीकरण किया है.

इन देशों में ऑस्ट्रिया, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया और अमेरिका शामिल हैं.

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