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चीन-पाक से डॉलर-टैरिफ तक… विदेश मंत्री जयशंकर ने लंदन में बताया भारत का स्टैंड , 10 प्वाइंट में जानिए










भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय यूनाइडेट किंगडम के आधिकारिक यात्रा पर हैं. यहां उन्होंने लंदन के चैथम हाउस थिंक टैंक में “विश्व में भारत का उदय और भूमिका” टॉपिक पर एक सेशन में भाग लिया. चैथम हाउस की डॉयरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ब्रॉनवेन मैडॉक्स के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कश्मीर से लेकर ट्रंप की ओर से भारत को मिल रही टैरिफ वाली चुनौती तक, सभी मुद्दों पर बात की. बदलती भू-राजनीति, भू-अर्थशास्त्र, भारत-ब्रिटेन संबंध, पड़ोस और दुनिया को लेकर भारत का क्या दृष्टिकोण है, इसपर अपना पक्ष रखा.

यहां 10 प्वाइंट में जानिए विदेश मंत्री की इस पूरी बातचीत का निचोड़:

1. पाकिस्तान और कश्मीर पर

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2. ट्रंप और अमेरिका

“यदि आप इसको ट्रैक करते हैं और मान लें कि राजनीतिक नेता आम तौर पर वही करते हैं जो वे वादा करते हैं, तो हम अभी जो देख रहे हैं वह अपेक्षित था.. हम एक ऐसे राष्ट्रपति और प्रशासन को देख रहे हैं, जो हमारी भाषा में बहुध्रुवीयता (मल्टी पोलरिटी) की ओर बढ़ रहे हैं. और यह कुछ ऐसा है जो भारत के लिए सही है.”

3. अमेरिकी टैरिफ4. रूस-यूक्रेन संघर्ष5. चीन

“दुनिया में अरब से अधिक आबादी वाले केवल दो देश के रूप में चीन के साथ हमारा बहुत ही अनोखा रिश्ता है… हम एक ऐसा रिश्ता चाहते हैं जहां हमारे हितों का सम्मान किया जाए, संवेदनशीलताओं को पहचाना जाए और हम दोनों के लिए काम किया जाए.”

6. QUAD:7. BRICS और डॉलर

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“मैं पूरी ईमानदारी से यह कहूंगा, मुझे नहीं लगता कि इस पर ब्रिक्स का कोई एक स्टैंड है. मुझे लगता है कि ब्रिक्स सदस्यों और अब जबकि हमारे पास अधिक सदस्य हैं, इस मामले पर बहुत अलग-अलग स्टैंड रखते हैं. इसलिए मुझे लगता है कि डॉलर के खिलाफ ब्रिक्स एक हो रहा है, यह सुझाव या धारणा तथ्यों पर आधारित नहीं है.”

8. भारतीय रुपया9. भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता10. श्रीलंका

“हमने 4 बिलियन डॉलर से अधिक का पैकेज दिया, जो कि IMF पैकेज के आकार का लगभग दोगुना था… यह सही है कि हम एक बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और कुल मिलाकर हम उदार और गैर-पारस्परिक हैं, लेकिन हमारे हित किसी भी देश की तरह हैं. इसलिए हम अपने पड़ोसियों से भी अपेक्षा करते हैं कि वे इसे पहचानें और हमारी संवेदनाओं का भी ध्यान रखें… मुझे लगता है, जैसे हमारी अपने पड़ोसियों के प्रति जिम्मेदारी है, मुझे लगता है कि हमारे पड़ोसियों की भी हमारे प्रति जिम्मेदारी है.”

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