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"कंबल मांगे हो हमसे…" बिहार में छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रशांत किशोर का ये वीडियो हो रहा वायरल


नई दिल्ली:

बिहार में आयोजित बीपीएससी की परीक्षा को दोबारा कराए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद इसे लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इस वजह से प्रशांत किशोर समेत 700 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर पुलिस केस भी दर्ज किया गया है. उनपर विरोध प्रदर्शन को भड़काने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने का आरोप लगा है. 

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधा है और उन पर विरोध प्रदर्शन को विफल करने की कोशिश का आरोप लगाया है. विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने किशोर का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोगों ने सत्तारूढ़ बीजेपी की “बी टीम” के रूप में प्रदर्शनकारियों को गुमराह करने की कोशिश की है.

क्या है बीपीएससी प्रोटेस्ट? 

13 दिसंबर से ही बिहार में छात्र बीपीएससी परीक्षा में हुई अनियमितताओं के चलते परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हुए थे. वहीं कुछ का कहना है कि प्रश्न पत्र देरी से बांटे गए थे और कुछ को तो परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद प्रश्न पत्र मिला था. वहीं अन्यों का कहना है कि आंसर शीट भी फटी हुई थी. बता दें कि पटना के गर्दनीबाग में यह प्रदर्शन किया जा रहा है. 

विरोध का आह्वान

जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर पिछले हफ्ते इस प्रदर्शन में शामिल हुए और रविवार को उन्होंने पटना के गांधी मैदान में छात्र सांसद का आयोजन किया. बीपीएससी परीक्षाओं में अनियमितताएं आम बात हो गई थीं और इस बैठक का उद्देश्य इसका समाधान ढूंढना था. बैठक के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने कहा कि गांधी मैदान प्रतिबंधित क्षेत्र है और कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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रविवार को क्या हुआ 

प्रशांत किशोर ने मीडिया को बताया कि, “बैठक में तय हुआ कि विरोध प्रदर्शन कोचिंग सेंटर या राजनेताओं द्वारा नहीं बल्कि सिर्फ छात्रों द्वारा किया जाएगा. गांधी मैदान पब्लिक प्लेस है और इस वजह से अनुमति लेने का कोई सवाल नहीं है. वो विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहे थे. हमने इस स्थान पर फैसला किया क्योंकि वहां बड़ी संख्या में छात्र थे. छात्र वहां बैठे और शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों पर चर्चा की और फिर उन्होंने आंदोलन के नेताओं का चुनाव किया. कोई समस्या नहीं थी.” उन्होंने कहा, “इसके बाद तय हुआ कि छात्र अपनी मांगों के बारे में सरकार को बताएंगे. दो चीजें तय की गई : हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे सरकार इसे गैरकानूनी कहे और हम वहां रुक जाएंगे जहां भी पुलिस हमें रोकेगी.” 

मार्च और कार्यवाही 

इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर की ओर मार्च करने लगे और पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इसके बाद मुख्य सचिव अमृत लाल मीना ने उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया, लेकिन वे मुख्यमंत्री से मिलने पर अड़े रहे. करीब दो घंटे तक प्रदर्शनकारियों ने वहीं प्रदर्शन किया, जहां उन्हें रोका गया था. पुलिस ने उन्हें वहां से चले जाने की चेतावनी दी, लेकिन वे वहीं डटे रहे. एक समय तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पानी की बौछारें कीं.

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प्रशांत किशोर पर निशाना 

पुलिस द्वारा कार्यवाही किए जाने के बाद ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर आए जिनमें प्रशांत किशोर पर निशाना साधा जा रहा है. कइयों का कहना है कि पुलिस की कार्यवाही से पहले प्रशांत किशोर वहां से भाग गए थे. शाम को जब किशोर गर्दनीबाग धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों से मिलने गए तो वहां विवाद हो गया. वायरल हुए एक वीडियो में प्रशांत किशोर एक प्रदर्शनकारी को “बिल्कुल नया नेता” कहते हुए सुनाई दे रहे हैं. प्रदर्शनकारी ने जवाब दिया कि प्रशांत किशोर ही नेता हैं. एक मौके पर किशोर कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, “तुमने मुझसे कंबल मांगा और तुम बदतमीजी कर रहे हो?” छात्र ने जवाब दिया, “तुम हमें कंबल दिखाकर डराने की कोशिश कर रहे हो?” इसके बाद तीखी नोकझोंक हुई और छात्रों ने ‘वापस जाओ’ के नारे भी लगाए. हालांकि, The Hindkeshariवीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता.

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इस वीडियो को आरजेडी ने अपने आधिकारिक हैंडल पर शेयर किया है. वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “उन्हें लगता है कि लोग उनका खरीदा हुआ स्टाफ है और वो उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं. यह बिहार  का बाजारू बाबू है.” प्रशांत किशोर ने मीडिया से कहा कि वो पुलिस एक्शन से पहले ही वहां से चले गए थे. 


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