देश

हिमांगी सखी को मिला साध्वी त्रिकाल भवंता का साथ, अब किन्नर और महिला अखाड़ा की ताकत बढ़ेगी?

हिमांगी सखी अब जगद्गुरु बन गई हैं. उन्हें महिला अखाड़े की महंत साध्वी त्रिकाल भवंता ने पट्टाअभिषेक कर ये उपाधि दी. हिमांगी सखी विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हैं. 2014 में पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं. महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने खुद बताया था कि उनका जन्म गुजरात के बड़ौदा में हुआ है.उनके पिता राजेंद्र बेचर भाई पंचाल थे. उनकी मां चंद्रकांता रघुवीर कुमार गिरी पंजाबी फैमिली से थी. हिमांगी के मुताबिक, मुंबई के होली फैमिली कॉन्वेंट स्कूल में उनकी पढ़ाई हुई. मगर, मेरे पिता का हार्ट अटैक होने के बाद मां समेत सभी मुंबई से गुजरात आ गए. उन्हें बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति आकर्षण था.वह उनको अपना आराध्य मानती थीं. कृष्ण भक्ति की उनकी शुरुआत मुंबई के उनके घर के नजदीक बने इस्कॉन मंदिर से हुई. यहां उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में जाना. इसके बाद वह दिल्ली और वृंदावन गईं. अपने प्रथम गुरु से भी उनकी मुलाकात वृंदावन में हुई थी.

Latest and Breaking News on NDTV

भागवत कथा सुनाने की उनकी शुरुआत मॉरीशस से हुई. उन्होंने वहां अंग्रेजी में भागवत सुनाई. इस्कॉन मंदिर समिति द्वारा उन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और इसके बाद वह देश और विदेश में भागवत सुनाने के लिए जाती रहीं. स्पेन, बहरैन, सिंगापुर जैसे देशों के अलावा उन्होंने भारत के भी कई राज्यों में भागवत कथा का पाठ किया है. हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि 2019 में दी गई थी. यह उपाधि उन्हें नेपाल के पशुपतिनाथ पीठ के द्वारा दी गई थी. प्रयागराज में हुए कुंभ के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर गौरी शंकर महाराज ने उन्हें यह उपाधि दी थी.महामंडलेश्वर हिमांगी सखी पांच भाषाओं में भागवत कथा सुनाती हैं. वह हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, गुजराती तथा मराठी में भागवत कथा सुनाती हैं. उनका यह मानना है कि भागवत हर किसी को सुननी और समझनी चाहिए. भागवत सुनने की प्रक्रिया में भाषा बाधा ना बन सके इसलिए वह श्रोताओं की सुविधा अनुसार उनकी भाषा में ही भागवत सुनाती हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता गुजराती और मां पंजाबी थीं. महाराष्ट्र में उनका पालन पोषण हुआ. इसी कारण उन्हें पांचों भाषाएं आती हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

देश का पहला महिला अखाड़ा परी अखाड़ा है. इसकी महंत साध्वी त्रिकाल भवंता हैं. वह इलाहाबाद के सर्वेश्वरी महादेव बैकुंठधाम मुक्तिद्वार की महामंडलेश्वर भी हैं. साल 2013 में उन्होंने देश के 14वें और पहले महिला अखाड़े का गठन किया. इनकी 7 हजार से अधिक साध्वियां और शिष्याएं  बताई जाती हैं.  साध्वी त्रिकाल भवंता उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले की मूल निवासी हैं और उन्होंने ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई भी की है. वे पिछले कुछ सालों से संन्यास जीवन में हैं. इससे पहले वे एक नर्स की भूमिका में इलाहाबाद के प्राइवेट हॉस्पिटल में काम किया करती थीं. बाद में उन्होंने अपना खुद का एक क्लिनिक खोल लिया. यह क्लिनिक इलाहाबाद के पक्की सड़क (दारागंज) पर मौजूद थी.

यह भी पढ़ें :-  विवादित आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को केंद्र सरकार ने बर्खास्त किया

दूसरे अखाड़े क्या करेंगे

करीब बीस साल पहले उनकी शादी इलाहाबाद के शालिक राम शर्मा से हुई थी, जो पेशे से टीचर थे. त्रिकाल भवंता उर्फ अनीता शर्मा का एक बेटा रवि शर्मा और एक बेटी अपराजिता शर्मा है. वो एनजीओ में भी काम कर चुकी हैं और महिलाओं के साथ उत्पीड़न न हो, इसलिए महिला अखाड़े का गठन किया.वर्ष 2001 में उन्होंने इलाहाबाद शहर दक्षिणी से विधानसभा का चुनाव लड़ा था. वर्ष 2013 के इलाहाबाद कुंभ में उन्होंने परी अखाड़े की स्थापना की और उसकी पहली महिला शंकराचार्य होने का दावा किया. समर्थकों के बीच वह जगदगुरु  शंकराचार्य त्रिकाल भवंता सरस्वती जी महाराज के रूप में ख्यात हैं. हिमांगी सखी और साध्वी त्रिकाल भवंता पर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं. अब दोनों के साथ आने पर अन्य अखाड़े क्या करते हैं, ये देखने वाली बात होगी. महाकुंभ 2025 अब शुरू होने ही वाला है.



Show More

संबंधित खबरें

Back to top button