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आंगनवाड़ी केंद्र कैसे हो रहे हाईटेक… स्मृति ईरानी ने समझाया तकनीक ने ऐसे आसान किया काम

अमृतकाल की आंगनवाड़ियां , भारतीय बच्चों के भविष्य को आकार दे रही हैं. महिला एवं बाल विकासमंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने The Hindkeshariसे खास बातचीत में जानकारी दी कि सक्षम आंगनवाड़ी की कल्पना साधारण आंगनवाड़ी से पूरी तरह अलग है. छोटा-सा कमरा और वहां आंगनवाड़ी दीदी, ऐसी कल्पना आंगनवाड़ी को लेकर पीएम मोदी की नहीं है. सक्षम आंगनवाड़ी के तहत आंगनवाड़ी का स्पेस भारतनेट से जुड़ा हो, ऑडियो विजिअुल डिवाइस, रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था, हर आंगनवाड़ी बहन के पास स्मार्टफोन, वो भी उसमें ऐसे ऐप और डिवाइस के साथ जिससे हर लाभार्थी तक रिकॉर्ड सहित पहुंचा जा सके. 2 लाख आंगनवाड़ियां सिर्फ आकांक्षी जिलों से शुरू की गई है. देश के हर जिले में आंगनवाड़ी आबादी के हिसाब से चिह्नित की जाती है. आदिवासी इलाकों की बात करें तो वहां आबादी ज्यादा नहीं है, फिर भी पीएम ने कहा कि नियमों में बदलाव करके वहां आंगनवाड़ी समेत सभी सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए. 

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स्मृति ईरानी ने आगे बताया कि पीएम मोदी की तीन चिंताएं थीं, पहली प्रसव के समय मृत्यु दर, छह साल से कम उम्र के बच्चों को पोषित आहार, तीसरी चिंता एकेडमिक ड्रॉप आउट खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा बीच में छूट जाने को लेकर काम हो रहा है या नहीं. इस पर पीएम मोदी का खास फोकस रहा. इस दृष्टि से आकांक्षी जिले चुने गए. जिलाधिकारियों इस तरह के बीमारू जिलों में पोस्टिंग को सजा मानते थे. पीएम मोदी का कहना था कि सबसे काबिल ऑफिसर को वैसे जिले दें. राष्ट्रीय उपबल्धि का स्तर उने बताया गया. दरअसल, पीएम मोदी का संकल्प विकसित भारत का संकल्प है. अगर विकसित भारत बनाना है तो उसे बुनियादी तौर पर मजबूत करना होगा. 

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गौरतलब है कि ‘अमृतकाल की आंगनवाड़ी’, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा The Hindkeshariका एक-दिवसीय कॉन्क्लेव, प्रारंभिक शिक्षा केंद्र तथा अर्ली इन्टरवेन्शन सेंटर के साथ-साथ माताओं और छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और स्वस्थ स्थान के रूप में आंगनवाड़ियों की क्षमता को सामने लाता है. मंत्रालय की ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ पहल, दिव्यांग प्रोटोकॉल, DIY और पारंपरिक खिलौना निर्माण सिखाया जाना तथा पोषण व आहार विविधता पर फोकस करने की पहल ने आंगनबाड़ियों का स्वरूप बदल दिया है. माननीय मंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि हम भारत के भविष्य को आकार देने के लिए आंगनवाड़ियों की पुनर्कल्पना कैसे कर सकते हैं.

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