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Infrashakti Awards: पॉलिसी, मैनेजमेंट और अप्रोच… प्रणव अदाणी ने बताए Adani Group के 3 सबक


नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लीडरशिप में देश ने 10 साल में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कई उपलब्धियां हासिल की. बीते एक दशक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आया है. The Hindkeshariने  मंगलवार को इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए डेवलपमेंट को लेकर Infrashakti Awards का आयोजन किया. इसके तहत इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों को Infrashakti Awards से सम्मानित किया गया.

‘इन्फ्राशक्ति अवॉर्ड्स 2024’ के दौरान अदाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अदाणी ने कीनोट एड्रेस दिया. इस दौरान उन्होंने अदाणी ग्रुप में सीखे गए 3 सबक भी सबके साथ शेयर किए.

प्रणव अदाणी ने अदाणी ग्रुप में सीखे 3 सबसे अहम सबक का ज़िक्र करते हुए कहा, “मैं तीन सबसे अहम सबकों का सारांश पेश करता हूं… सबसे पहले, राष्ट्रीय नीतियों (Policy) और प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाना अहम है… इसका आदर्श उदाहरण PM गति शक्ति योजना हो सकती है. ये राष्ट्रीय एकीकृत मास्टर प्लान है, जो भारत के समग्र बुनियादी ढांचे के विकास की नींव रखता है…”

प्रणव अदाणी ने आगे कहा, “यह मोटे तौर पर सात क्षेत्रों में भारत की ज़रूरतों को प्राथमिकता देता है. यानी सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, जन परिवहन प्रणाली, जलमार्ग और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचा… हमारे लिए आगे बढ़ने का समझभरा रास्ता इन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जुड़ना है… अगर हम वह निर्माण करते हैं, जिसकी भारत को जरूरत है, तो हम जटिलताओं से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं. इसके नतीजे के तौर पर हम बड़ा और अच्छा निर्माण अधिक कुशलता के साथ कर सकते हैं.” 

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प्रणव अदाणी ने कहा, “प्राचीन हो या आधुनिक, मानव इतिहास हमें साफ़-साफ़ बताता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ही सभी तरह के विकास की नींव है… यही वह नींव है, जिस पर कोई भी विकसित या विकासशील समाज तैयार होता है. यही वो बुनियाद है, जो आर्थिक तरक्की की राह बनाती है, जीवनस्तर को सुधारती है, और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को सुनिश्चित करती है…”

प्रणव अदाणी ने कहा, “दूसरा, हमारे पास बड़ी और जटिल परियोजनाओं के प्रबंधन (Management) और कार्यान्वयन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और दक्षताओं के साथ मज़बूत प्रतिभा बेंच होनी चाहिए… तीसरा सबक यह है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए घरेलू और वैश्विक दोनों रुझानों का अनुमान लगाने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण (Approach) की आवश्यकता होती है… हमारे मामले में, गौतम अदाणी ने बहुत पहले ही देख लिया था कि दुनिया को ऊर्जा परिवर्तन के एक हिस्से के रूप में थर्मल पॉवर की आवश्यकता होगी और इसीलिए हमने नवीकरणीय ऊर्जा में उतरने का फैसला किया…”

 


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