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जयशंकर ने LAC पर तनाव के लिए चीन को ठहराया जिम्मेदार, कहा- लिखित समझौतों का पालन नहीं कर रहा पड़ोसी देश

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टोक्यो में पहले रायसीना गोलमेज समिट ( Raisina Roundtable) में शिरकत की.

नई दिल्ली/टोक्यो:

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar)ने एक बार फिर चीन पर निशाना साधा है. उन्होंने सीमा पर तनाव के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है. जयशंकर ने गुरुवार को चीन (India-China Relation) का जिक्र करते हुए कि यह चिंता का विषय है कि कोई देश पड़ोसी के साथ लिखित समझौतों का पालन नहीं करता.

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टोक्यो में पहले रायसीना गोलमेज समिट ( Raisina Roundtable) में शिरकत करते हुए जयशंकर ने कहा, “इंडो-पैसिफिक इलाके के देशों की क्षमताओं, प्रभाव और महत्वाकांक्षाओं में बड़े बदलाव के राजनीतिक और रणनीतिक परिणाम हुए हैं. इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा.”

जयशंकर ने कहा, “अब आप इसे पसंद करें या नहीं, लेकिन यही सच्चाई है और आपको इससे डील करना पड़ेगा. चीजें बदल रही हैं. सभी को कोशिश करनी चाहिए कि चीजों को जितना हो सकते स्थायी रखा जाए. हालांकि, बीते एक दशक में ऐसा नहीं हुआ है.” विदेश मंत्री ने कहा, “उदाहरण के लिए चीन के साथ हमारी 1975 से 2020 तक, करीब 45 वर्षों तक कोई हिंसक झड़प नहीं हुई, लेकिन 2020 में ये बदल गया.” बता दें कि 5 मई, 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच सीमा पर तनाव बहुत अधिक हो गया था.

जयशंकर ने कहा, “आज हम कई बातों पर असहमत हो सकते हैं, लेकिन जब कोई देश, किसी पड़ोसी के साथ लिखित समझौतों का पालन नहीं करता है तो यह चिंता का कारण है.” उन्होंने स्वीकार किया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अन्य देशों के साथ भारत का संबंध भी बदल रहा है.

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इससे पहले जयशंकर ने कहा था कि सरकार सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. चीन-भारत संबंधों में संतुलन होना चाहिए. विदेश मंत्री ने संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए चीन के साथ सीमा समझौतों का पालन करने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया.

भारत सरकार की तरफ से पहले भी कहा गया है कि जब तक सीमा पर शांति नहीं होगी, तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते.

विदेश मंत्री का बयान भारत-चीन कोर कमांडर लेवल की बैठक के 21वें दौर के हफ्तों बाद आई है. इसमें पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ शेष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पर जोर दिया गया. इस बैठक में दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक तंत्र के माध्यम से संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए. साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति के लिए भी प्रतिबद्धता जताई.

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