धर्म

रामायण फिल्म में मारीच का किरदार, जानें सोने के हिरण की कहानी

लंबे इंतजार के बाद रामायण मूवी का पहला ट्रेलर रिलीज हो चुका है. 4 मिनट के इस ट्रेलर में पूरी कास्ट का इंट्रोडक्शन दिया गया है कि किसने किसका रोल अदा किया है. जैसे श्री राम के किरदार में रणबीर कपूर नजर आएंगे, माता सीता का रोल साई पल्लवी करेंगी, दशानन रावण का रोल यश करेंगे. वहीं, मामा मारीच का रोल सौरभ सचदेवा करते नजर आएंगे. तो चलिए जानते हैं कि कौन थे मारीच, जिसने सोने के हिरण का रूप धारण किया था l  

कौन थे मारीच?
मारीच रामायण के बहुत ही महत्वपूर्ण पात्र थे. जब रावण ने माता सीता का हरण किया तो उसमें मारीच की भी अहम भूमिका थी. मारीच राक्षस सुंद और यक्षिणी ताड़का का पुत्र था. ताड़का, यक्षराज सुकेतु की बेटी थी, जिसे भगवान ब्रह्मा से वरदान मिला था. मारीच और उसका भाई सुबाहु दोनों देखने में सुंदर और बहुत शक्तिशाली थे. उन्हें मायावी विद्या का भी अच्छा ज्ञान था और वे जादुई शक्तियों में निपुण थे l  

सङ्गृह्यास्त्रं ततो रामो दिव्यमाग्नेयमद्भुतम्।
सुबाहूरसि चिक्षेप सविद्ध: प्रापतद्भुवि।।

रामायण के बालकांड के मुताबिक, एक बार राक्षस सुंद ने ऋषि अगस्त्य के आश्रम पर हमला कर दिया था. इससे क्रोधित होकर ऋषि अगस्त्य ने अपनी तपस्या की शक्ति से उसे भस्म कर दिया था. सुंद की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी ताड़का और उसके बेटे मारीच और सुबाहु ने भी अगस्त्य ऋषि पर हमला किया. तब ऋषि ने उन्हें श्राप देकर राक्षस बना दिया. कुछ समय बाद ऋषि विश्वामित्र यज्ञ कर रहे थे, लेकिन ताड़का और उसके बेटे बार-बार यज्ञ में बाधा डालते थे. तब विश्वामित्र अयोध्या के राजा दशरथ के पास गए और उनसे श्री राम को यज्ञ की रक्षा के लिए भेजने का आग्रह किया. राजा दशरथ ने मन न होते हुए भी श्री राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेज दिया l  

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जब वे ताड़का के वन में पहुंचे, तो ताड़का ने उन पर हमला किया. तब श्री राम ने लक्ष्मण की मदद से उसे मार दिया था. इसके बाद विश्वामित्र ने अपना यज्ञ शुरू किया. छठे दिन मारीच और सुबाहु फिर आए और यज्ञ को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन श्री राम ने अपने बाण से मारीच को बहुत दूर फेंक दिया और सुबाहु का वध कर दिया. इस तरह यज्ञ सफलतापूर्वक पूरा हुआ l

दंडकारण्य में मारीच का श्री राम से युद्ध

पराक्रमज्ञो रामस्य शठो दृष्टभयः पुरा।
समुद्भान्तस्ततोमुक्तस्तावुभौ राक्षसौ हतौ।।

अरण्यकांड के अनुसार, राजा दशरथ ने कैकेयी के कहने पर श्री राम को 14 साल के वनवास के लिए भेज दिया था. श्री राम के साथ लक्ष्मण और मां सीता भी वन में चले गए थे. तीनों दंडकारण्य होते हुए गोदावरी नदी के किनारे पंचवटी में रहने लगे और वहीं एक कुटिया बनाई. कुछ समय बाद मारीच ने उन्हें देखा और बदला लेने के लिए हमला कर दिया. श्री राम ने उसके साथियों को मार दिया, लेकिन मारीच किसी तरह बचकर भाग गया l  

इसी दौरान रावण की बहन शूर्पणखा वहां आई और श्री राम से विवाह का प्रस्ताव रखा. श्री राम ने उसे मना कर दिया और उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया. लक्ष्मण ने मजाक किया, जिससे शूर्पणखा क्रोधित हो गई और उसने सीता पर हमला करने की कोशिश की. तब लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए l  

अपमानित होकर शूर्पणखा लंका पहुंची और रावण को सारी बात बताकर मां सीता का हरण करने के लिए उकसाया. इसके बाद रावण अपने मामा मारीच के पास गया और उसे सोने का हिरण बनकर श्री राम की कुटिया के पास जाने को कहा, ताकि सीता उसे देखकर श्री राम से उसे पकड़ने की जिद करें l  

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श्री राम ने स्वर्ण हिरण का किया वध

इत्युक्तो लक्ष्मणस्तस्याः क्रुद्धो रामस्य पार्श्वतः।
उद्धृत्य खङ्गं चिच्छेद कर्णनासं महाबलः।।

उसके बाद, मारीच और रावण पंचवटी पहुंचे. मारीच ने एक सुंदर सोने के हिरण का रूप धारण कर लिया, जिसके शरीर पर चांदी जैसे धब्बे थे. वह श्री राम की कुटिया के आसपास घूमने लगा. उस समय सीता फूल तोड़ रही थीं. सुंदर हिरण को देखकर वे मोहित हो गईं और श्री राम व लक्ष्मण को उसे दिखाने के लिए बुलाया. लक्ष्मण को शक हुआ कि यह मारीच की चाल हो सकती है, लेकिन सीता के कहने पर श्री राम उस हिरण को पकड़ने के लिए उसके पीछे चले गए और लक्ष्मण को सीता की रक्षा के लिए छोड़ गए l  

श्री राम काफी देर तक हिरण का पीछा करते रहे और अंत में उसे बाण से मार दिया. मरते समय मारीच ने अपना असली रूप लिया और श्री राम की आवाज में पुकारा, ‘हे सीता! हे लक्ष्मण!’ यह सुनकर सीता घबरा गईं और लक्ष्मण से श्री राम को देखने जाने को कहा. लक्ष्मण ने समझाया कि श्री राम को कोई नुकसान नहीं हो सकता, लेकिन सीता के बार-बार कहने पर वे मजबूर होकर चले गए. जैसे ही लक्ष्मण वहां से गए, रावण साधु का वेश बनाकर आया. सीता उसे दान देने के लिए आगे बढ़ीं, तभी रावण ने उन्हें पकड़ लिया और उनका हरण कर लिया l 

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