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शिला पर ध्यान और शिकागो की धर्म संसद में दुनिया हैरान, स्वामी विवेकानंद की वो अद्भुत कहानी

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अपने इस भाषण के दौरान विवेकानंद ने सांप्रदायिकता पर भी अपने विचार रखे थे. उन्होंने कहा था सांप्रदायिकता, कट्टरता और इसके भयानक वंशजों के धार्मिक हठ ने लंबे समय से इस खूबसूरत धरती को जकड़ रखा है. उन्होंने इस धरती को हिंसा से भर दिया है और कितनी ही बार धरती खून से लाल हो चुकी है. ना जाने कितनी सभ्यताएं तबाह हुईं और कितने देश मिटा दिए गए.

टापू पर समुद्र में तैरकर पहुंचे थे विवेकानंद

कहा जाता है कि 1892 में जब स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी के तट पर पहुंचे थे तो उन्होंने देखा कि तट से कुछ मीटर दूरी पर एक टापू है. हालांकि उस दौरान भी वहां नौकाएं चलती थी लेकिन उन्होंने वहां तक तैरकर पहुंचने का फैसला किया. वह तैरकर इस टापू पर पहुंचे और फिर उन्होंने इसी शिला पर बैठकर ध्यान लगाया. कहा जाता है कि उस दौरान विवेकानंद तीन दिन और तीन रात तक इसी टापू पर रहे और इस दौरान उन्होंने ध्यान लगाया और ज्ञान प्राप्त किया. 

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गुरुवार दोपहर बाद कन्याकुमारी पहुंचेंगे पीएम मोदी

आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर अभी तक जो जानकारी बाहर आई है उसके मुताबिक पीएम मोदी आध्यात्मिक प्रवास के लिए 30 मई दोपहर बाद कन्याकुमारी पहुंचेंगे. यहां से वह विवेकानंद रॉक मेमोरियल जाएंगे. 30 मई की शाम से एक जून की शाम तक वह यहां के ध्यान मंडपम में ध्यान लगाएंगे. पीएम मोदी अपने आध्यात्मिक प्रवाश के दौरान श्री भगवती अम्मन मंदिर में दर्शन के लिए भी जाएंगे. इस दौरान पीएम यहां पूजा-अर्चना भी करेंगे. 

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