देश

'नटवर ने तेल का पैसा खाया…' पोल वॉल्कर की वो रिपोर्ट जिसके बाद सोनिया के 'दुश्मन' बन गए नटवर


नई दिल्‍ली:

कुंवर नटवर सिंह. 10 जनपथ का सबसे बड़ा राजदार. सोनिया गांधी के सियासी गुरु. राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया को राजनीतिक दीक्षा देने, उनकी छवि गढ़ने के पीछे  नटवर ही थे. 1984 में इंदिरा गांधी ने विदेश सेवा के इस अधिकारी की सियासत में एंट्री करवाई, लेकिन कांग्रेस में नटवर की असली पारी नब्बे के दशक में शुरू हुई. वह कांग्रेस में इतने खास होते चले गए कि उन्हीं के शब्दों में- ‘जो बातें राहुल-प्रियंका को भी नहीं बताई जाती थीं, वह सोनिया उनसे शेयर करती थीं.’ 

राजनीति के माहिर खिलाड़ी 

इस भरोसे की बड़ी वजह थी. राजीव की हत्या के बाद दरअसल सोनिया को ‘साोनिया गांधी’ बनाने का काम नटवर सिंह ने ही किया था. हिंदी सुधरवाने से लेकर, कांग्रेस में  उठ रहे बगावत के भंवर से सोनिया को किनारे लगाने का काम कूटनीति के इस माहिर खिलाड़ी ने किया. इसका उन्हें इनाम भी मिला. यूपीए-1 की मनोहन सरकार में वह विदेश मंत्री बने. लेकिन 2005 में उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. वजह बनी ईरान से तेल के बदले अनाज कांड पर पोल वोल्कर कमिटी की रिपोर्ट, जिसमें उनका नाम भी शामिल था. 

और गांधी परिवार का यह सिपाही बागी हो गया…

इसके बाद गांधी परिवार का यह सिपाही बागी हो गया. 10 जनपथ में बेरोक-टोक आने जाने वाले नटवर के कदम इसके बाद इस पते पर जीते जी कभी नहीं पड़े. आखिरी सांस तक नटवर के दिल में यह टीस रही. अपनी आत्मकथा ‘वन लाइफ इज नॉट इनफ’में नटवर ने यह बयां भी किया.किताब में ऐसे खुलासे कर डाले, जिसने बवंडर ला दिया. नटवर के सीने में गांधी परिवार के कितने गहरे राज दफन थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सालों से बंद बातचीत के बावजूद घबराई सोनिया-प्रियंका को नटवर के घर जाकर माफी मांगनी पड़ी थी. यह किताब आने से ठीक पहले का किस्सा है.

यह भी पढ़ें :-  तीन विशाल मंच, PM-CM के साथ संतों की मौजूदगी, फिल्मी सितारों का जमघट... रामलीला मैदान में ऐसा होगा BJP सरकार का शपथ ग्रहण

पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह का शनिवार रात निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे और गुरुग्राम के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. उन्हें यहां लगभग दो सप्ताह पहले भर्ती कराया गया था. पूर्व राजनयिक ने 2004-05 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्हें 1953 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुना गया था, जिसे उन्होंने 1984 में छोड़ दिया. फिर वो कांग्रेस के टिकट पर राजस्थान के भरतपुर से चुनाव लड़े और लोकसभा सांसद बने.

ये भी पढ़ें :- कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का 93 वर्ष की आयु में निधन



Show More

संबंधित खबरें

Back to top button