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अब तो महाकुंभ में भी 'जय श्रीराम' : श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज में श्रृंगवेरपुर धाम बना नया ठिकाना


प्रयागराज:

प्रयागराज का इस बार का महाकुंभ पिछले कुंभ मेले से कैसे अलग है! इस सवाल के कई जवाब हो सकते हैं. पर सबसे सही जवाब का रास्ता शृंगवेरपुर धाम तक जाता है. प्रयागराज में संगम इलाके से बस 30 किलोमीटर दूर. ये वही जगह है जहां भगवान राम और निषादराज का मिलन हुआ था. अयोध्या से चलकर प्रभु राम ने यहीं पहली बार गंगा पार की थी. महाकुंभ मेले से पहले इस इलाके की तकदीर और तस्वीर बदल गई है. श्रृंगवेरपुर धाम अब प्रयागराज की पहचान है. यहां आने वाले लेटे हुए हनुमान मंदिर जाना नहीं भूलते हैं. ठीक उसी तरह महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रृंगवेरपुर धाम भी एक नया ठिकाना है. 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी महीने श्रृंगवेरपुर धाम में भगवान राम और निषादराज की मूर्ति का उद्घाटन किया. रामायण में इस बात का जिक्र है कि वनवास के लिए अयोध्या से निकलकर प्रभु श्रीराम प्रयागराज के श्रृंगवेरपुरधाम पहुंचे थे. यहां निषादराज की मदद से गंगा नदी पार की थी. फिर वे भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे थे। श्रृंगी ऋषि की तपस्थली होने कारण ही यह इलाका श्रृंगवेरपुर कहलाता है. महाकुम्भ से पहले ही योगी सरकार ने श्रृंगवेरपुर में भव्य कॉरिडोर और निषादराज के प्रभु राम से मिलन वाली प्रतिमा का निर्माण करवाया. 

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निषादराज और भगवान राम  का संबंध उनके जन्म से भी पहले का है, ऐसा रामायण में लिखा है. जिसके मुताबिक पुत्र कामेष्टि यज्ञ के लिए राजा दशरथ ने वशिष्ठ मुनि के कहने पर श्रृंगी ऋषि को अयोध्या बुलाया था. श्रृंगी ऋषि के यज्ञ फल से ही राजा दशरथ के राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चार बेटों का जन्म हुआ. 

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श्रृंगी ऋषि की तपस्थली होने के कारण गंगा तट का यह क्षेत्र श्रृंगवेरपुर कहलाता है. रामायण में लिखा है कि श्रीराम की बहन शांता का विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ ही हुआ था. आज भी श्रृंगवेरपुर में श्रृंगी ऋषि और शांता मां का मंदिर है, जहां श्रद्धालु संतान प्राप्ति की चाहत में आते हैं और पूजा करते हैं. 

सनातन धर्म में श्रृंगवेरपुर धाम का बड़ा विशेष महत्व है. वाल्मीकि रामायण और राम  चरित मानस में इसका जिक्र है.  राजा दशरथ की आज्ञा का पालन कर भगवान राम वनवास के लिए अयोध्या से निकले. वे सबसे पहले श्रृंगवेरपुर ही पहुंचे थे. यहां उनकी भेंट निषादराज से हुई. निषादराज ने अपनी नाव में उन्हें गंगा पार कराया. निषादराज और भगवान राम का संवाद बहुत लोकप्रिय है. उनके आग्रह पर प्रभु राम एक रात रुके. केवटों का वह गांव आज भी रामचौरा के नाम से जाना जाता है. गंगा जी के तट के पास राम शयन आश्रम भी है. कहते हैं प्रभु श्रीराम माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहीं ठहरे थे.

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महाकुंभ से पहले ही योगी सरकार ने श्रृंगवेरपुर धाम का कायाकल्प कर दिया है. करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से श्रृंगवेरपुर धाम में भव्य कॉरिडोर का निर्माण हुआ है. प्रभु श्रीराम और निषदाराज के मिलन की 52 फीट की प्रतिमा और पार्क का निर्माण हुआ है. इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रयागराज के पिछले दौरे में किया था. इसके साथ ही श्रृंगवेरपुर धाम में गंगा किनारे निषादराज पार्क भी बनाया गया है. 

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