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पाकिस्तान : शरीफ और जरदारी मिलकर बनाएंगे नई सरकार? PML-N और PPP के बीच फॉर्मूले पर चर्चा तेज

पीएमएल-एन, पीपीपी और पीटीआई, तीनों ही प्रमुख दलों में से किसी को 266 सदस्यीय नेशनल असेंबली में बहुमत हासिल करने के लिए आवश्यक सीट नहीं मिली हैं और इसलिए वे अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएंगे. इसलिए, अभी यह साफ नहीं है कि नकदी के संकट से जूझ रहे देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा.

केंद्र और प्रांतों में गठबंधन सरकार बनाने के अपने प्रयासों के तहत पीएमएल-एन और पीपीपी के नेताओं ने आठ फरवरी के चुनाव के बाद अपनी पहली बैठक में आधे कार्यकाल के लिए एक प्रधानमंत्री नियुक्त करने के विचार पर बातचीत की. घटनाक्रम के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह जानकारी दी.

सूत्रों ने कहा, ‘‘प्रस्ताव रखा गया है कि पीएमएल-एन का एक उम्मीदवार तीन साल के लिए प्रधानमंत्री रहेगा और पीपीपी का नेता दो साल इस पद पर रहेगा.” उन्होंने कहा कि पहला कार्यकाल किसे मिलेगा, यह अभी तय नहीं हुआ है. बैठक में पीपीपी के संसदीय अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी, पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी और पीएमएल-एन से पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए. पीएमएल-एन और नेशनल पार्टी ने 2013 में बलूचिस्तान में सत्ता साझेदारी के इसी फॉर्मूले को अपनाया था.

पीएमएल-एन के पाकिस्तान में हुए आठ फरवरी के आम चुनाव में साधारण बहुमत हासिल नहीं करने के बावजूद इसके अध्यक्ष नवाज शरीफ अब भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बने हुए हैं. सोमवार को पीएमएल-एन के कुछ नेताओं ने यह बात कही.

पीएमएल-एन सीनेटर इरफान सिद्दीक ने एक निजी समाचार चैनल से कहा, ‘‘हम केंद्र में अगली गठबंधन सरकार बनाने के लिये सत्ता साझेदारी के फॉर्मूले को लेकर पीपीपी के साथ बातचीत कर रहे हैं और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नवाज शरीफ (74) के नाम को खारिज नहीं किया जा सकता.”

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सूत्रों ने कहा कि लाहौर में बिलावल के आवास पर रविवार को हुई बैठक में दोनों पक्षों ने आम चुनाव के बाद देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए सहयोग के सिद्धांत पर सहमति जताई.

पीपीपी के एक नेता ने कहा कि पार्टी इस मांग से पीछे नहीं हट रही कि बिलावल भुट्टो जरदारी को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए.

पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने रविवार को आम चुनाव के अंतिम परिणाम घोषित किए, जिसमें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने 101 सीट पर जीत दर्ज की है.

वहीं, तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) 75 सीट जीतकर तकनीकी रूप से संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

बिलावल जरदारी भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को 54 सीट मिलीं, जबकि विभाजन के दौरान भारत से आए उर्दू भाषी लोगों की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) को 17 सीट मिली हैं. बाकी 12 सीट पर अन्य छोटे दलों ने जीत हासिल की.

पीटीआई ने शुरू में सरकार बनाने का दावा किया था, लेकिन उसकी संभावनाएं बाद में कमजोर पड़ने लगीं.

सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को प्रत्यक्ष मतदान से निर्वाचित 133 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी. कुल मिलाकर, साधारण बहुमत हासिल करने के लिए 336 में से 169 सीट की आवश्यकता है, जिसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित सीट भी शामिल हैं.

नवाज शरीफ ने शनिवार को पाकिस्तान को मौजूदा कठिनाइयों से बाहर निकालने के लिए गठबंधन सरकार बनाने का आह्वान किया था. माना जाता है कि शरीफ को देश की शक्तिशाली सेना का समर्थन प्राप्त है.

इस बीच, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के एक और नवनिर्वाचित निर्दलीय सांसद ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन में शामिल होने का फैसला किया.

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इससे एक दिन पहले, इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी समर्थित निर्दलीय सांसद ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) का दामन थाम लिया था. कुल दो निर्दलीय सांसद पीएमएल-एन में शामिल हो चुके हैं.

पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने सोमवार को ‘एक्स’ पर लिखा कि एनए-189 सीट से सांसद सरदार शमशीर मजारी, पीपी-195 से निर्वाचित इमरान अकरम, पीपी-240 से निर्वाचित सोहेल खान, पीपी-297 के सांसद खिज्र हुसैन मजारी और पीपी-249 से नेशनल असेंबली के सदस्य साहिबजादा मोहम्मद गाज़िन अब्बासी ने नवाज शरीफ से मुलाकात की.

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(इस खबर को The Hindkeshariटीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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