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सीएम से पूर्व सीएम तक: दिल्ली की हॉट सीटों पर सियासी महासंग्राम


नई दिल्ली:

दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) के लिए तारीख का ऐलान कर दिया गया है. 5 फरवरी को एक ही चरण में सभी 70 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. दिल्ली में एक बार फिर अधिकतर सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है. कुछ सीटों पर बड़े ही रोचक मुकाबले की संभावना है.  दिग्गजों के खिलाफ विपक्ष की तरफ से भी दिग्गज उम्मीदवारों को उतारा गया है.  नई दिल्ली, कालकाजी,  जंगपुरा, पातपड़गंज जैसी सीटों पर बेहद कड़े मुकाबले की संभावना है.  कई दिग्गजों का भविष्य इस सीट पर तय होने वाला है.

नई दिल्ली सीट का क्या है समीकरण?
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के केंद्र में स्थित है और इसमें वीआईपी इलाके शामिल हैं, जैसे कनॉट प्लेस, लुटियन्स दिल्ली, और सरकारी कार्यालयों वाले क्षेत्र. इस विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर मतदाता शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न हैं, सरकारी अधिकारी, व्यवसायी जैसे वोटर्स की संख्या यहां अधिक है.

इस बार के चुनाव में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के सामने शीला दीक्षित के पुत्र और वरिष्ठ कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित,  पूर्व सीएम साहेब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश वर्मा बीजेपी के उम्मीदवार है. इस सीट पर तीनों दिग्गज नेताओं के बीच रोचक मुकाबले की संभावना है.  दिल्ली में अब तक हुए 7 विधानसभा चुनावों में से इस सीट पर एक बार भारतीय जनता पार्टी, 3 बार कांग्रेस और 3 बार आम आदमी पार्टी को जीत मिली है. 7 में से 6 चुनावों में जीतने वाले उम्मीदवार दिल्ली के सीएम भी बने हैं.

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कालकाजी विधानसभा सीट
कालकाजी विधानसभा सीट पर इस चुनाव में बेहद रोचक मुकाबला होना है. कालकाजी सीट के सामाजिक समीकरण की अगर बात करें तो इस सीट पर मुस्लिम, दलित, पिछड़े वर्ग, और उच्च जातियों के वोटों का मिश्रण है. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी की तरफ से आतिशी,  कांग्रेस की तरफ से अलका लांबा और बीजेपी ने रमेश बिधूड़ी को चुनावी मैदान में उतारा है. तीनों ही दिग्गज नेता माने जाते हैं.

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AAP ने 2015 और 2020 के चुनावों में यहां मजबूत प्रदर्शन किया है. पार्टी का शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर जोर इस क्षेत्र के मतदाताओं के बीच प्रभावी साबित होता रहा है. BJP का इस सीट पर प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, लेकिन AAP के मुकाबले BJP यहां कभी भी मजबूत पकड़ नहीं बना पाई है.  कांग्रेस पार्टी के आधार वोट में इस क्षेत्र में तेजी से गिरावट आयी है. 

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जंगपुरा की जंग में कौन मारेगा बाजी?
जंगपुरा सीट (Jangpura seat) लाजपत नगर से लेकर दरियागंज तक फैली हुई है. इस सीट पर इस चुनाव में रोचक मुकाबले की संभावना है. दिल्ली के पूर्व उपमुख्य़मंत्री मनीष सिसोदिया के मैदान में आने के बाद पूरे देश की इस सीट पर नजर है. यह सीट मुस्लिम बहुल मानी जाती है, जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक भूमिका निभाता है. जंगपुरा सीट आम आदमी पार्टी के लिए एक सुरक्षित और प्रभावशाली सीट मानी जाती है.  2020 और 2015 में AAP ने यहां से बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. मनीष सिसोदिया का इस सीट से उतरना पार्टी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

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कांग्रेस ने इस सीट पर फरहाद सूरी को मैदान में उतारा है वहीं भारतीय जनता पार्टी की तरफ से तरविंदर सिंह मरवाह चुनावी मैदान में हैं.

  • अनुसूचित जाति और गरीब वर्ग के मतदाता जंगपुरा में बड़ी संख्या में हैं.
  • AAP ने अपनी सामाजिक योजनाओं (पानी, बिजली, शिक्षा, और स्वास्थ्य) के जरिए इन मतदाताओं में मजबूत पकड़ बनाई है.
  •  जंगपुरा क्षेत्र में झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में रहने वाले गरीब और मजदूर वर्ग की संख्या भी है. इन वोटर्स का रुझान आप की तरफ रहा है. 
  • मुस्लिम, सिख, और झुग्गी-झोपड़ी के मतदाताओं का झुकाव जिस पार्टी की ओर होता है उसके जीत की अधिक संभावना होती है
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पतपड़गंज : सिसोदिया की विरासत क्या संभाल पाएंगे अवध ओझा?
पतपड़गंज सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है.आम आदमी पार्टी (AAP) ने अवध ओझा को उम्मीदवार बनाया है.ओझा हाल ही में पार्टी में शामिल हुए हैं और यूट्यूबर एवं शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रविंद्र सिंह नेगी को प्रत्याशी बनाया है. नेगी ने 2020 के चुनाव में मनीष सिसोदिया के खिलाफ कड़ी टक्कर दी थी और मात्र 3,207 वोटों के अंतर से पराजित हुए थे. कांग्रेस ने चौधरी अनिल कुमार को प्रत्याशी बनाया है. 2020 के चुनाव में, पटपड़गंज सीट से मनीष सिसोदिया ने 70,163 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी, जबकि रविंद्र सिंह नेगी को 66,956 वोट मिले थे. इस बार तीनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है, जिससे पटपड़गंज सीट का चुनावी समीकरण दिलचस्प हो गया है. 

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बिजवासन सीट पर किसका रहेगा दबदबा?
बिजवासन सीट पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों ने ही इस बार नया प्रत्याशी मैदान में उतारा है. यह सीट दिल्ली के साउथ वेस्ट में आती है और वर्तमान में यहां से आम आदमी पार्टी के विधायक बीएस जून हैं. बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और पार्टी के जाट चेहरा कैलाश गहलोत को मैदान में उतारा है. वहीं उनका सामना आम आदमी पार्टी के सुरेंद्र भारद्वाज से होगा. कैलाश गहलोत साल 2015 और 2020 में दिल्ली के नजफ़गढ़ सीट से विधायक रहे.कांग्रेस ने इस सीट से देविंदर सहरावत को चुनावी मैदान में उतारा है. इस सीट पर भी पूरे देश की नजर है. 

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