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जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों के मद्देनज़र राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बुलाई अहम बैठक


नई दिल्ली:

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने आज सुबह 11:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें सदन के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल होंगे. यह बैठक दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों को लेकर होने जा रही है, जिसे लेकर बहस की मांग उठी है. बैठक का मुख्य उद्देश्य दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों पर चर्चा करना करना है.

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राज्य सभा में बहस कराने को लेकर बातचीत

इन आरोपों पर राज्य सभा में बहस कराने को लेकर बातचीत होगी. सभापति ने सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश के यह मुद्दा उठाने के बाद NJAC का ज़िक्र किया था. National Judicial Appointment Commission NJAC का बिल संसद से पारित हुआ था और पचास प्रतिशत विधानसभाओं ने उसे मंज़ूरी दी थी. राष्ट्रपति ने इस पर दस्तखत कर दिए थे लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसे ख़ारिज कर दिया था. सभापति के अनुसार अगर तब यह क़ानून बन जाता तो आज जो हालात बने वैसे हालात नहीं बनते.

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दूसरे चरण की जांच क्यों महत्वपूर्ण

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के बाद नोटों से भरी ‘‘चार से पांच अधजली बोरियां” मिलने की जांच के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है. इसके साथ ही आंतरिक जांच प्रक्रिया दूसरे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है, जिसके निष्कर्ष न्यायाधीश वर्मा के भाग्य का फैसला करेंगे. पॉश लुटियंस दिल्ली इलाके में 14 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के ‘स्टोर रूम’ में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन कर्मियों और पुलिस कर्मियों को कथित तौर पर नकदी मिली थी.

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अब शुरू होगा मामले में सवाल-जवाब का सिलसिला

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने 21 मार्च को अपनी रिपोर्ट में आरोपों की ‘‘गहन जांच” की बात कही थी, जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया. मोबाइल रिकॉर्ड, फोरेंसिक जांच से लेकर मौके पर पहुंचने वाले पुलिस और दमकलकर्मियों से अब इस मामले में सवाल-जवाब होंगे. दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी घर पर नकदी के ढेर के आरोपों की न्यायिक जांच का आदेश देने के CJI  संजीव खन्ना के तुरंत और बड़े फैसले  के बावजूद तीन जजों की कमेटी को जो काम सौंपा गया है वो आसान नहीं है. 



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