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RG कर रेप-हत्या मामला: सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को सुनाई उम्रकैद की सजा

RG कर रेप-हत्या मामले (Kolkata Rape Murder Case) में सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने संजय पर साथ ही 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है. कुछ दिन पहले ही कोर्ट संजय रॉय को दोषी करार दिया था. जबकि सजा का ऐलान आज किया गया है. सजा के ऐलान से पहले सीबीआई ने कोर्ट में बहस के दौरान कहा कि ये रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस है. इसमें किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिड़गिड़ाता दिखा संजय रॉय

कोर्ट में सुनवाई के दौरान संजय रॉय बार-बार जज के सामने गिड़गिड़ाता नजर आया. उसने जज से कहा कि मुझे इस मामले में फंसाया जा रहा है. मैंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया. उसकी इस बात पर कोर्ट में मौजूद जज ने कहा कि तुम्हारे ऊपर लगे सारे आरोप साबित हो चुके हैं. ऐसे में हम अब सजा क्या दी जाए, इस पर विचार कर रहे हैं. 

संजय रॉय ने क्या कुछ कहा

मामले में सजा सुनाए जाने से पहले रॉय ने अदालत से कहा, ‘‘मुझे फंसाया जा रहा है और मैंने कोई अपराध नहीं किया है. मैंने कुछ भी नहीं किया है फिर भी मुझे दोषी ठहराया गया है.’ उसने कहा, ‘‘जेल में मुझे पीटा गया और मुझसे जबरन कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए.” सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अनिर्बान दास ने रॉय को शनिवार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत दोषी ठहराया था.

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सीबीआई की कड़ी सजा देने की दलील

कार्यवाही के दौरान केंद्रीय अन्वेष्ण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिवक्ता ने दोषी को कड़ी से कड़ी सजा देने का अनुरोध किया. एजेंसी के अधिवक्ता ने अदालत से कहा, ‘‘हम समाज में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए कड़ी से कड़ी सजा का अनुरोध करते हैं.” रॉय के बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत करे, जिससे यह साबित हो सके कि दोषी के सुधरने की कोई संभावना नहीं है.

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उसे सुधरने का मौका देने के लिए ‘मृत्युदंड के अलावा किसी अन्य वैकल्पिक सजा’ का अनुरोध किया. मृतक चिकित्सक के माता-पिता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता ने कड़ी सजा का अनुरोध करते हुए तर्क दिया कि रॉय स्वयंसेवक होने के नाते अस्पताल की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था, लेकिन उसने खुद ही पीड़ित चिकित्सक के साथ जघन्य अपराध किया, जिसकी रक्षा करना उसका कर्तव्य था.


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