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ई-रिक्शा चलाकर यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा रही सरस्वती….

रायपुर: सरस्वती नेताम आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। कुछ समय पहले तक उनका जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। सरस्वती मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। कोंडागांव जिले के नहरपारा की रहने वाली सरस्वती के परिवार में उनकी माँ और बड़ी बहन भी हैं, जिनकी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। आर्थिक तंगी के कारण जीवन यापन बेहद मुश्किल हो गया था। ऐसे में श्रम विभाग की दीदी ई रिक्शा योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी है।

सरस्वती बताती हैं कि एक दिन उन्हें स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी से दीदी ई-रिक्शा योजना के बारे में जानकारी मिली। यह योजना श्रम विभाग द्वारा संचालित की जा रही है और इस योजना का लाभ उठाने के लिए छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल में पंजीकृत होना अनिवार्य है। जिसके बाद जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना के बारे में सुनकर सरस्वती ने हिम्मत जुटाई और आवेदन किया। उनकी पात्रता जांच के बाद उन्हें श्रम विभाग की ओर से 50 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

दीदी ई-रिक्शा योजना से मिली नई दिशा

इस अनुदान की मदद से सरस्वती ने एक ई-रिक्शा खरीदी। शुरुआत में उन्हें वाहन चलाने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन धैर्य और लगन से उन्होंने धीरे-धीरे इसे सीख लिया। आज सरस्वती प्रतिदिन शहर में ई-रिक्शा चलाकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाती हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें महीने में 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है।

इस आमदनी से सरस्वती न केवल घर का खर्च उठा रही हैं बल्कि ई-रिक्शा की किस्त और अन्य आवश्यकताओं को भी पूरा कर पा रही हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहाँ उन्हें जीवकोपार्जन के लिए इधर-उधर काम तलाशना पड़ता था, अब उनके पास स्थायी आय का साधन है।

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सरस्वती की यह कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है जो कठिनाइयों से जूझते हुए भी अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखती हैं। सरस्वती की मेहनत एवं आत्मविश्वास ने और शासन की जनकल्याणकारी योजना ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी है। सरस्वती ने बताया इस योजना ने मुझे नई राह दिखाई है। मैं आज आत्मनिर्भर हूँ और अपने परिवार का सहारा बन पाई हूँ। सरस्वती ने शासन से मिली सहायता पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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