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पिता की हारी सीट पर बाजी पलटने उतरे बेटे, जानें कौन हैं ये दोनों


नई दिल्ली:

कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार देर रात अपनी तीसरी सूची जारी की. इसमें दो नामों ने सबको चौकाया पार्टी ने कैथल से आदित्य सुरजेवाला और कलायत से विकास सहारण को उम्मीदवार बनाया है. आदित्य कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला और विकास हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश के बेटे हैं. इस चुनाव से इन दोनों नेताओं ने अपने बेटों को लांच किया है.विकास अपने टिकट को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने नाम की घोषणा से पहले ही नामांकन कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर कर दिया था. सुरजेवाला और जयप्रकाश ने पिछला विधानसभा चुनाव इन्हीं सीटों से लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 

क्या रणदीप सुरजेवाला भी मांग रहे थे टिकट

पिछले काफी समय से चर्चा थी कि रणदीप सुरजेवाला खुद चुनाव लड़ना चाह रहे थे. वो कैथल से ही टिकट मांग रहे थे. लेकिन कांग्रेस ने बुधवार को उनके बेटे को टिकट देकर इन कयासों पर विराम लगा दिया. हालांकि कुछ दिन पहले ही यह साफ हो गया था कि शायद सुरजेवाला को टिकट न मिले. इसे देखते हुए ही उन्होंने अपने बेटे को लांच करने के लिए एक जनसभा का आयोजन किया था. आदित्य आज अपना नामांकन दाखिल करेंगे. 

कैथल में बुधवार को आयोजित एक जनसभा में आदित्य सुरजेवाला.

कैथल में बुधवार को आयोजित एक जनसभा में आदित्य सुरजेवाला.

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद जयप्रकाश अपने बेटे के लांचिंग की तैयारी काफी समय से कर रहे थे. लेकिन चुनवा लड़ने का फैसला वो पार्टी आलाकमान पर डाल दे रहे थे. लेकिन नाम की घोषणा होने से पहले ही उन्होंने बेटे विकास का नामांकन बुधवार को करवा दिया. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है. 

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कैथल की लड़ाई

कैथल में आदित्य सुरजेवाला की लड़ाई आसान नहीं है. यहां उनका मुकाबला बीजेपी के लीलाराम गुर्जर, बसपा के अनिल तंवर और आम आदमी पार्टी के सतवीर गोयल से होगा.साल 2019 का चुनाव  लीला राम ने बीजेपी के टिकट पर जीता था. उन्होंने उस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार और आदित्य के पिता रणदीप सुरजेवाला को केवल 1246 वोटों के बहुत छोटे से अंतर से हराया था. जननायक जनता पार्टी के रामफल मलिक तीसरे स्थान पर रहे थे. लेकिन उन्हें 10 हजार वोट भी नहीं मिले थे. इस बार इंडियन नेशनल लोकदल और बसपा यह चुनाव मिलकर लड़ रहे हैं. लेकिन 2019 के चुनाव में इस सीट पर बसपा को केवल 2243 वोट ही मिले थे. वहीं इनेलो उम्मीदवार अनिल कुमार केवल 472 वोट ही हासिल कर पाए थे.

कैथल से अपना नामांकन पत्र दाखिल करते आदित्य सुरजेवाला.

कैथल से अपना नामांकन पत्र दाखिल करते आदित्य सुरजेवाला.

इस तरह अगर पिछले चुनाव के आंकड़ों को देखें तो यहां का मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहने वाला है. पिछली बार रणदीप सुरजेवाला एक बहुत ही कड़े मुकाबले में बहुत ही कम वोट से हारेंगे. इसलिए लगता है कि इस बार वो अपने बेटे को जिताने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे.साल 2004 से 2014 तक यह सीट सुरजेवाला परिवार के पास ही रही. आदित्य के दादा और पिता यहां से विधायक रह चुके हैं.वहीं बीजेपी उम्मीदवार की कोशिश अपना जनाधार बढ़ाने की होगी. लेकिन किसान आंदोलन के बाद लोगों में बीजेपी को लेकर पैदा हुई नाराजगी दूर करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी. 

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कलायत की लड़ाई

कांग्रेस सांसद जयप्रकाश के बेटे विकास सहारण को भी कलायत में कड़े मुकाबले का सामना करना होगा. उनका मुकाबला बीजेपी की कमलेश ढांडा से है. कमलेश ने 2019 का चुनाव बीजेपी के टिकट पर जीता था. उस चुनाव में उन्होंने विकास के पिता और कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश को करीब नौ हजार वोट के अंतर से हराया था. इस चुनाव में विकास के सामने आम आदमी पार्टी के टिकट पर अनुराग ढांडा मैदान में हैं.

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साल 2019 के चुनाव में कलायत में जननायक जनता पार्टी तीसरे स्थान पर थी. उसके उम्मीदवार सतविंदर सिंह ने 37 हजार 425 वोट हासिल किए थे.जजपा इस बार का चुनाव आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर लड़ी रही है. कलायत सीट जजपा के खाते में गई है. जजपा ने इस साल अपना उम्मीदवार बदल दिया है. उसने सतविंदर सिंह की जगह प्रीतम मेहरा कोलेखां को उम्मीदवार बनाया है. ये आंकड़े बताते हैं कि कलायत की लड़ाई आसान नहीं है.इस बार विकास को एक कड़े मुकाबले का सामना कर पड़ सकता है. विकास के पिता जयप्रकाश 2014 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कलायत से चुनाव जीते थे.

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