धर्म

रामायण में रावण की मां कैकसी की कहानी, जिसने दशानन को जन्म दिया

 कुछ दिनों पहले फिल्म रामायण का पहला ट्रेलर रिलीज हो चुका है. ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया. इस मूवी में इंडस्ट्री के कई बड़े और मशहूर कलाकार नजर आने वाले हैं, जिसकी वजह से दर्शकों के बीच इसे लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. उसी में से एक कलाकार हैं शोभना, जो इस मूवी में रावण की मां कैकसी का रोल अदा करेंगी. तो आइए जानते हैं कि कौन थी कैकसी, जिसकी कोख से जन्मा था दशानन रावण l  

कौन थी कैकसी?
रामायण के उत्तरकांड के मुताबिक, कैकसी रावण की मां थी, जिसका दूसरा नाम निकाशा भी था. रावण की मां कैकसी एक शक्तिशाली राक्षस सुमाली और उनकी पत्नी केतुमती की बेटी थी, जो पाताल लोक पर राज करते थे. राजा सुमाली ने जब देखा कि ऋषि विश्रवा के पुत्र कुबेर धन-धान्य और लंका पर राज कर रहे हैं, तो उसने अपनी पुत्री कैकसी को विश्रवा ऋषि के पास वर की इच्छा प्राप्ति के लिए भेजा. कैकसी जब आश्रम पहुंची थी, तब संध्या काल यानी अशुभ बेला में ऋषि विश्रवा हवन कर रहे थे. कैकसी ने विनम्रतापूर्वक उनके पास जाकर अपने पिता की इच्छा बताई. ऋषि विश्रवा ने कहा कि तुमने अत्यंत भयानक और दारुण समय में आकर संतान की याचना की है, इसलिए तुम्हारे पुत्र क्रूर और भयानक रूप वाले राक्षसी स्वभाव वाले होंगे.

ऋषि विश्रवा की यह बात सुनकर कैकसी दुखी हो गई और उनके चरणों में गिरकर बोली, ‘हे ब्रह्मर्षि! आपसे मुझे ऐसे दुराचारी और अधर्मी पुत्रों की अपेक्षा नहीं थी. कृपया मुझ पर कृपा करें.’ कैकसी की प्रार्थना सुनकर ऋषि ने कहा कि, ‘तुम्हारा सबसे छोटा पुत्र मेरी ही तरह धर्मात्मा और भक्तिभाव वाला होगा. उसके मन में धर्म के प्रति निष्ठा रहेगी.’

यह भी पढ़ें :-  Aaj Ka Rashifal 2 August 2026: इन राशियों पर रहेगी किस्मत मेहरबान, जानें किसे बरतनी होगी सावधानी

जिसके चलते सबसे पहले दस सिर और बीस भुजाओं वाले विकराल बालक का जन्म हुआ, जिसके सिर पर काले बादल जैसी कांति थी. उसके जन्म लेते ही अमंगलकारी लक्षण दिखाई देने लगे. पिता विश्रवा ने दस सिर होने के कारण उसका नाम दशग्रीव (रावण) रखा. उसके बाद, विशालकाय कुंभकर्ण का जन्म हुआ, जो स्वभाव से अत्यंत क्रूर, विशाल और महाबली था. फिर, फिर एक डरावने रूप वाली कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम शूर्पणखा (सूर्पणखा) रखा गया. आखिरी में, सौम्य बालक विभीषण का जन्म हुआ, जिसके जन्म के समय आकाश से पुष्प वर्षा हुई थी. इसी के बाद कैकसी ने कुबेर के वैभव को देखकर अपने ज्येष्ठ पुत्र दशग्रीव यानी रावण को उसके भाइयों सहित तपस्या करने के लिए गोकर्ण क्षेत्र भेजा था.

कैकसी से मिली थी रावण को लंका विजय की प्रेरणा
उत्तरकांड के अनुसार, कैकसी की प्रेरणा और निर्देश मिलने के बाद रावण, कुंभकर्ण और विभीषण तीनों भाई गोकर्ण आश्रम पहुंचे. वहां उन्होंने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की. कहा जाता है कि रावण ने दस हजार वर्षों तक घोर तपस्या की. प्रत्येक एक हजार वर्ष पूरा होने पर वह अपना एक सिर काटकर अग्नि में अर्पित कर देता था. जब वह अपना दसवां सिर काटने वाला था, तब ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उसके कटे हुए सभी सिर वापस जोड़ दिए. जिसके बाद रावण ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगा. ब्रह्मा जी के मना करने पर उसने वरदान मांगा कि देव, दानव, यक्ष, गंधर्व या नाग उसका वध न कर सकें. ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दे दिया था.

यह भी पढ़ें :-  आज का राशिफल: बुधवार को इन राशियों को मिलेगी अच्छी खबर, जानें किसकी चमकेगी किस्मत और कैसा रहेगा दिन

वरदान पाने के बाद रावण का अहंकार और बल अत्यधिक बढ़ गया था. उसने अपने नाना सुमाली के उकसाने और माता कैकसी की इच्छा पूरी करने के लिए कुबेर के पास दूत भेजा और लंका छोड़ने को कहा.

कुबेर देवता को पिता विश्रवा की सलाह
जब कुबेर ने अपने पिता ऋषि विश्रवा से इस बारे में सलाह ली, तो ऋषि विश्रवा ने कुबेर को रावण से युद्ध न करने और लंका छोड़कर कैलाश पर्वत के पास अलकापुरी नगरी बसाने की सलाह दी. कुबेर ने पिता की आज्ञा मानकर शांतपूर्वक लंका छोड़ दी.

इसके बाद रावण ने धूमधाम से लंका में प्रवेश किया. वह लंका का अधिपति बना और अपनी माता कैकसी का सपना पूरा किया. आगे चलकर रावण ने पुष्पक विमान भी कुबेर से छीन लिया और तीनों लोकों पर अत्याचार कर विजय हासिल की.

Show More

संबंधित खबरें

Back to top button