दुनिया

सुएला ब्रेवरमैन: ब्रिटेन में एक साल में दो बार मंत्री पद से हटाई गईं भारतीय मूल की विवादास्पद मंत्री

भारतीय मूल की 43 वर्षीय कैबिनेट मंत्री के विवादों से पुराने नाते को देखते हुए उनका सरकार से हटना अनपेक्षित नहीं था. ब्रेवरमैन को अपने कार्यकाल के दौरान अवैध प्रवासियों के लिए ‘हरीकेन’ जैसे शब्दों का उपयोग करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था. वह अवैध प्रवासियों को रवांडा भेजना चाहती थीं, जबकि इस संबंध में नीति कानूनी पचड़ों में उलझी हुई थी.

हाल में तो उन्होंने प्रधानमंत्री सुनक की अनदेखी करते हुए मेट्रोपॉलिटन पुलिस के साथ नए सिरे से टकराव का मोर्चा खोल दिया. ब्रेरवमैन को बर्खास्त करने के पीछे मेट्रोपॉलिटन पुलिस को निशाना बनाने वाला एक विवादास्पद लेख भी जिम्मेदार माना जा रहा है. ‘द टाइम्स’ अखबार में छपे एक लेख में ब्रेवरमैन ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस पर इजराइल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद लंदन में होने वाले प्रदर्शनों से सख्ती से नहीं निपटने का आरोप लगाया था.

ब्रेवरमैन ने अपने संदेश में कहा, ‘‘गृह मंत्री के रूप में सेवाएं देना मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है. मैं आने वाले समय में काफी कुछ कहूंगी.” इससे उन्होंने भविष्य में सरकार के लिए कठिनाई पैदा करने का संकेत दिया.

पिछले साल अक्टूबर में गृह मंत्री पद से उसके निष्कासन को इस्तीफा बताया गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री लिज ट्रस अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में मंत्रिमंडल संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए ब्रेवरमैन के साथ संबंध तोड़ना चाहती थीं.

हालांकि इस बार ब्रेवरमैन को पद से हटाए जाने के पीछे यह कहानी भी सत्ता के गलियारों में चल रही है कि वह स्वयं प्रधानमंत्री को अगले साल संभावित आम चुनाव से पहले खुद को बर्खास्त करने के लिए उकसा रही थीं.

यह भी पढ़ें :-  ब्रिटेन में फैमली वीजा के लिए नई वेतन सीमा लागू, जाने से पहले जान लें सुनक सरकार के नियम

दरअसल ऐसा इसलिए किया गया होगा कि इसके बाद टोरी पार्टी के धुर दक्षिणपंथी धड़े में उनका समर्थन बढ़ जाएगा और वह सुनक के चुनाव हारने की स्थिति में उनकी जगह लेने के लिए नेतृत्व की तैयारी शुरू कर देंगी.

उनकी नाटकीय बर्खास्तगी ने एक बार फिर ब्रिटेन की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर गहरे विभाजन को उजागर कर दिया है, जिसमें हाल के दिनों में कई नेताओं और मंत्रियों का आना-जाना देखा गया है.

ब्रेवरमैन दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में फेयरहैम से कंजर्वेटिव पार्टी की संसद सदस्य हैं. उन्होंने मंत्रिमंडल में गृह मंत्री के रूप में भारतीय मूल की प्रीति पटेल का स्थान लिया था.

गोवा मूल की ब्रेवरमैन पहले बोरिस जॉनसन नीत सरकार में अटॉर्नी जनरल के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं. जॉनसन की जगह प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में वह भी दावेदार थीं. वह कंजर्वेटिव पार्टी में ब्रेक्जिट समर्थक धड़े की प्रमुख सदस्य भी हैं जो यूरोप से पूरी तरह अलगाव चाहता है.

ब्रेवरमैन कई बार अपने निजी और पारिवारिक जीवन का उल्लेख करती रहीं हैं और हिंदू तमिल मां उमा तथा गोवा मूल के पिता क्रिस्टी फर्नांडीज की लंदन में जन्मी बेटी के रूप में खुद का परिचय देती रही हैं. उनके माता-पिता 1960 के दशक में क्रमश: मॉरीशस और केन्या से ब्रिटेन में आकर बस गए थे.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय से विधि स्नातक ब्रेवरमैन ने 2018 में राएल ब्रेवरमैन से शादी की थी. वह अपने गर्भावस्था अवकाश के दौरान खबरों में बनी रही थीं जब उन्होंने पिछले साल अपनी दूसरी संतान को जन्म देने के दौरान कैबिनेट मंत्री बने रहने के लिए कानून में बदलाव कराया था.

यह भी पढ़ें :-  ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने संस्मरण 'अनलीश्ड' में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की

ब्रेवरमैन बौद्ध धर्म का अनुसरण करती हैं और नियमित रूप से लंदन बुद्धिस्ट सेंटर जाती हैं. उन्होंने संसद में अपने पद की शपथ भगवान बुद्ध के ‘धम्मपद’ के नाम पर ली थी.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

Show More

संबंधित खबरें

Back to top button